Gold-Silver ETF में क्यों आई 14% तक की गिरावट, खरीदें या बेचें? जानें एक्सपर्ट की राय
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 30, 2026, 11:12 AM IST
Gold Silver Price Crash का सबसे ज्यादा असर Gold-Silver ETF पर देखने को मिला है। गोल्ड और सिल्वर के दाम फ्यूचर मार्केट में जहां करीब 5 फीसदी तक गिरे, वहीं ETF में 14 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। बहरहाल, जानें गिरावट क्यों और एक्सपर्ट की राय क्या है?
ETF में क्या हो रणनीति
Gold And Silver Price ने हाल के हफ्तों में ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद आज अचानक तेज गिरावट देखी है। इसी के साथ Gold ETF और Silver ETF में 8% से 14% तक का करेक्शन दर्ज किया गया। Safe Haven Investment के तौर पर जिन निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर एंट्री ली थी, उनके पोर्टफोलियो पर शॉर्ट-टर्म दबाव साफ दिख रहा है। भारतीय बाजार में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद देखने को मिली है।
गुरुवार को लंदन से लेकर शिकागो तक गोल्ड और सिल्वर के साथ इक्विटी मार्केट दबाव में दिखे। हालांकि, ज्यादातर एक्सपर्ट ने इसे लिक्विडिटी रोटेशन और सिस्टम ट्रिगर्ड ऑर्डर की वजह से आई गिरावट बताया है, जहां टॉप लेवल से प्रॉफिटबुकिंग के चलते आई गिरावट ने कई स्टॉपलॉस को ट्रिगर किया, जिससे गिरावट बढ़ती चली गई। हालांकि, बाद में कुछ ही घंटों में रिकवरी भी देखने को मिली। यही पैटर्न अब भारतीय बाजार में दिख रहा है।
क्यों टूटे गोल्ड-सिल्वर ETF?
- मुनाफावसूली का दबाव : लगातार तेज रैली के बाद गोल्ड और खासकर सिल्वर में ओवरबॉट कंडीशन बन गई थी। रिकॉर्ड हाई पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने आक्रामक प्रॉफिट बुकिंग की, जिसका सीधा असर ETFs पर पड़ा।
- डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उछाल : अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से कीमती धातुओं पर दबाव आया। आमतौर पर मजबूत डॉलर के दौर में गोल्ड-सिल्वर की चमक फीकी पड़ती है।
- सिल्वर वोलैटिलिटी : सिल्वर एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। तेज उछाल के बाद इसमें करेक्शन ज्यादा तीखा होता है। यही वजह है कि Silver ETF में गिरावट गोल्ड ETF से ज्यादा रही।
- ETF में लीवरेज इफेक्ट : ETF सीधे अंडरलाइंग मेटल को ट्रैक करते हैं। तेज मूवमेंट के समय इनका उतार-चढ़ाव स्पॉट प्राइस से ज्यादा नजर आता है, जिससे गिरावट 14% तक दिखी।
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स अनुज गुप्ता के मुताबिक यह ट्रेंड रिवर्सल नहीं, बल्कि हेल्दी करेक्शन है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंक की खरीदारी और महंगाई से बचाव की जरूरत जैसे फैक्टर्स अभी भी गोल्ड-सिल्वर के पक्ष में बने हुए हैं।
कौनसा ETF कितना गिरा
| ETF का नाम | सेगमेंट | गिरावट (%) |
|---|---|---|
| HDFC Silver ETF | Silver ETF | 13–14% |
| Nippon India Silver ETF | Silver ETF | 12–13% |
| Mirae Asset Silver ETF | Silver ETF | 11–12% |
| ICICI Prudential Silver ETF | Silver ETF | 10–11% |
| Axis Silver ETF | Silver ETF | 9–10% |
| Nippon India ETF Gold BeES | Gold ETF | 8–9% |
| HDFC Gold ETF | Gold ETF | 7–8% |
| ICICI Prudential Gold ETF | Gold ETF | 6–7% |
| SBI Gold ETF | Gold ETF | 6–7% |
| Axis Gold ETF | Gold ETF | 5–6% |
खरीदें या बेचें क्या है एक्सपर्ट की राय?
अनुज गुप्ता मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्टैगर्ड तरीके से खरीदारी का मौका हो सकता है। एकमुश्त निवेश से बचें और गिरावट में SIP या आंशिक खरीद बेहतर रणनीति है। वहीं, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए वोलाटिलिटी बहुत अहम है। जब तक कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक नए दांव से बचने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा सिल्वर ETF के निवेशकों को उनकी सलाह है कि सिल्वर में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहेगा। रिस्क प्रोफाइल हाई है, इसलिए पोजिशन साइज सीमित रखें। इसके साथ ही उनका कहना है कि गोल्ड-सिल्वर ETF में आई 14% तक की गिरावट डराने वाली जरूर है, लेकिन यह तेज रैली के बाद आया सामान्य करेक्शन है। लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए गिरावट में सोच-समझकर खरीदारी का मौका है, जबकि शॉर्ट-टर्म निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है।
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