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Explained: हाइड्रोजन के बाद अब पटरी पर दौड़ी देश की पहली LNG ट्रेन, जानिए कैसे काम करती है इसकी तकनीक

LNG Train Explained: हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन चलने के बाद अब देश की पहली LNG ट्रेन पटरी पर दौड़ने लगी है। आइए विस्तार से जानते यह ट्रेन किस टेक्नोलॉजी पर चलती है।

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प्रदूषण घटेगा, करोड़ों बचेंगे: जानिए भारतीय रेलवे की पहली LNG ट्रेन की बड़ी बातें (तस्वीर-X)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Sep 27, 2026, 14:19 IST
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LNG train Explained : भारतीय रेलवे पर्यावरण को बचाने और प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार नए और आधुनिक कदम उठा रही है। जींद से सोनीपत के बीच हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत के बाद अब रेलवे के इतिहास में एक और नया और शानदार अध्याय जुड़ गया है। अब देश में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) यानी तरल प्राकृतिक गैस से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार 27 सितंबर 2026 को साबरमती रेलवे स्टेशन से भारत की इस पहली LNG ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कदम रेलवे में डीजल की खपत को घटाने और साफ-सुथरे ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है यह नई LNG ट्रेन और इसकी टेक्नोलॉजी?

आसान शब्दों में समझें तो रेलवे ने अपनी पुरानी डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन में बदलाव करके उसे 'डुअल-फ्यूल सिस्टम' (Dual-Fuel System) में बदल दिया है। डुअल-फ्यूल का मतलब होता है एक ऐसा इंजन जो दो अलग-अलग तरह के ईंधनों से चल सकता है। इस नई ट्रेन का इंजन डीजल और LNG दोनों की मदद से चलेगा। अहमदाबाद रेलवे डिवीजन ने बताया है कि पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार (DPC) में LNG ईंधन प्रणाली को जोड़ा गया है। इससे इंजन की ताकत और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होगा और रेलवे को एक नया विकल्प मिलेगा।

अब पेट्रोल-सीएनजी कार की तरह चलेगी ट्रेन!  (तस्वीर-X)

अब पेट्रोल-सीएनजी कार की तरह चलेगी ट्रेन! (तस्वीर-X)

कार की तरह काम करेगी यह डुअल-फ्यूल टेक्नोलॉजी

इस तकनीक को समझना बहुत आसान है। यह बिल्कुल हमारी उन कारों की तरह काम करती है जिनमें पेट्रोल और CNG दोनों का विकल्प होता है। जब कार में CNG खत्म हो जाती है, तो वह पेट्रोल पर चलने लगती है। ठीक उसी तरह यह ट्रेन भी काम करेगी। यह ट्रेन पूरी तरह से केवल LNG पर निर्भर नहीं रहेगी। जरूरत और ईंधन की उपलब्धता के हिसाब से इसका इंजन LNG से डीजल या डीजल से LNG पर अपने आप स्विच कर सकता है। अगर रास्ते में कहीं LNG खत्म भी हो जाए, तो भी ट्रेन रुकेगी नहीं और डीजल के सहारे अपनी यात्रा आसानी से पूरी कर लेगी।

ट्रेन में ईंधन की क्षमता और सफर की दूरी

इस नई ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में एक विशेष प्रकार का LNG टैंक लगाया गया है, जिसकी क्षमता करीब 2,200 लीटर है। इस बड़े टैंक में एक बार पूरा ईंधन (LNG) भरवाने के बाद ट्रेन रोज करीब 222 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर सकती है। LNG ईंधन की एक खास बात यह भी है कि इसकी मदद से ट्रेन एक बार में ज्यादा दूरी तय कर पाती है, जिससे बार-बार ईंधन भरवाने का समय बचता है।

पर्यावरण को होगा भारी फायदा, घटेगा प्रदूषण

आज के समय में बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। इस LNG ट्रेन के चलने से पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होगा। जब यह इंजन LNG और डीजल के मिश्रण से चलेगा, तो इससे निकलने वाला जहरीला धुआं काफी हद तक कम हो जाएगा। यह नई तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और हवा को गंदा करने वाले सूक्ष्म कणों (Particulate Matter) के उत्सर्जन को बहुत कम कर देगी। इससे ट्रेनों से होने वाला वायु प्रदूषण घटेगा और लोगों को साफ हवा मिलेगी।

रेलवे के करोड़ों रुपयों की होगी बचत

LNG ट्रेन न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी है, बल्कि यह रेलवे के पैसों की भी बड़ी बचत करेगी। डीजल की तुलना में LNG काफी सस्ती होती है। इस ट्रेन में LNG का इस्तेमाल होने से डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक की कमी आएगी। शुरुआती परीक्षणों और आंकड़ों के आधार पर रेलवे का अनुमान है कि ट्रेन के एक पावर कार (DPC) से हर साल करीब 11.9 लाख रुपये की बचत होगी। अगर 8 डिब्बों वाली पूरी ट्रेन की बात करें, तो रेलवे हर साल करीब 23.9 लाख रुपये बचा सकेगी।

भविष्य के हरित और स्वच्छ रेल परिवहन का आधार

भारतीय रेलवे का लक्ष्य आने वाले समय में अपने पूरे नेटवर्क को ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि LNG जैसी डुअल-फ्यूल तकनीक को अपनाना स्वच्छ ऊर्जा, ईंधन की बचत, कम परिचालन लागत और प्रकृति की सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हाइड्रोजन और LNG जैसी तकनीकों के आने से भारत में रेल यात्रा न केवल सुरक्षित और आधुनिक बनेगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुंदर वातावरण भी तैयार करेगी।

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