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कौन हैं केविन वार्श, क्या उन्हीं की वजह से कांपने लगा है दुनिया का गोल्ड-सिल्वर मार्केट?

गोल्ड और सिल्वर मार्केट कैप में करीब 4 लाख करोड़ डॉलर यानी भारत की GDP जितनी गिरावट आई है। इसके तमाम कारणों के साथ ही केविन वार्श का नाम भी आ रहा है। आखिर कौन हैं केविन वार्श, क्या उन्हीं की वजह से दुनिया का गोल्ड-सिल्वर मार्केट कांपने लगा है?

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केविन वार्स का फेड में आना क्यों बढ़ा रहा तनाव (इमेज क्रेडिट, हूवर इंस्टीट्यूट)

Who is Kevin Warsh and Why Gold Silver Down? अमेरिका के अगले फेडरल रिजर्व चेयर को लेकर बढ़ती अटकलों ने वैश्विक कमोडिटी बाजार में तेज उथल-पुथल मचा दी है। पूर्व फेड गवर्नर केविन वार्श का नाम आगे आते ही सोना और चांदी में जोरदार बिकवाली देखी गई। बाजार इस आशंका से घिर गया है कि अगर वार्श को चेयरमैन बनाया गया, तो अमेरिकी मौद्रिक नीति पहले से ज्यादा सख्त हो सकती है, जिसका सीधा असर बुलियन कीमतों पर पड़ेगा।

फेड चेयर की रेस और बाजार की घबराहट

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट् के मुताबिक US President Donald Trump आज Fed Chair के नाम का ऐलान कर सकते हैं। इसी वजह से बाजारों ने पहले ही प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। वार्श को नीतिगत रूप से हॉकिश माना जाता है और वह लंबे समय से फेड की ढीली मौद्रिक नीति की आलोचना करते रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने कहा है कि फेड को अपनी साख बहाल करने के लिए “रेजिम चेंज” की जरूरत है। यही बयान निवेशकों को डरा रहा है।

एशियाई बाजार में तेज बिकवाली

वार्श की संभावित नियुक्ति की खबर एशियाई ट्रेडिंग सेशन में सामने आते ही सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया। गोल्ड फ्यूचर करीब 7 फीसदी फिसला, जबकि चांदी में भी 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। StoneX के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन के मुताबिक वार्श को लेकर चल रही अफवाहों ने गोल्ड और सिल्वर पर तत्काल दबाव डाला है, क्योंकि बाजार ज्यादा सख्त फेड की आशंका को पहले ही दामों में गिनने लगा है।

डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव

बुलियन पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती भी है। U.S. Dollar Index में हालिया उछाल ने गोल्ड और सिल्वर की चमक फीकी कर दी। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर कीमती धातुओं में गिरावट आती है, क्योंकि ये गैर-अमेरिकी निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं। वार्श के हॉकिश रुख की उम्मीद ने डॉलर को और सपोर्ट दिया है।

क्रिप्टो तक दिखा असर

वार्श का असर सिर्फ गोल्ड-सिल्वर तक सीमित नहीं है। 10x Research के फाउंडर मार्कस थिलेन के अनुसार बाजार वार्श को बिटकॉइन और क्रिप्टो के लिए भी नेगेटिव मानता है। उनकी सख्त मौद्रिक सोच क्रिप्टो को महंगाई के खिलाफ हेज नहीं, बल्कि सट्टा संपत्ति के रूप में पेश करती है।

केविन वॉर्श के बयान क्या संकेत देते हैं

पूर्व फेड गवर्नर केविन वार्श के अब तक के बयानों और नीतिगत रुख को देखें तो बाजार की मौजूदा घबराहट बेवजह नहीं लगती। वॉर्श लंबे समय से अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर सवाल उठाते रहे हैं और उनकी सोच मौजूदा फेड अप्रोच से काफी अलग मानी जाती है। यही वजह है कि उनका नाम सामने आते ही गोल्ड, सिल्वर और रिस्क एसेट्स में हलचल तेज हो गई।

  1. सख्त मौद्रिक नीति का साफ झुकाव : वॉर्श बार-बार यह कह चुके हैं कि जरूरत से ज्यादा ढीली मौद्रिक नीति ने फेड की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। उनका मानना है कि कम ब्याज दरों और भारी लिक्विडिटी ने महंगाई को बढ़ावा दिया और एसेट बबल तैयार किए। ऐसे बयान यह क्लू देते हैं कि अगर उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो वे ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने और फेड की बैलेंस शीट को सख्ती से कंट्रोल करने के पक्ष में रह सकते हैं।
  2. “रेजिम चेंज” वाला बयान क्यों अहम : वॉर्श का सबसे ज्यादा चर्चित बयान फेड में “रेजिम चेंज” की जरूरत को लेकर रहा है। इस शब्द का इस्तेमाल बाजार में एक बड़े पॉलिसी शिफ्ट के संकेत के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब सिर्फ दरों में बदलाव नहीं, बल्कि फेड के पूरे कम्युनिकेशन और पॉलिसी फ्रेमवर्क में सख्ती आना हो सकता है। यही वजह है कि निवेशक पहले से ही भविष्य की टाइट फाइनेंशियल कंडीशंस को प्राइस इन करने लगे हैं।
  3. महंगाई पर सख्त नजर का संकेत : वॉर्श के भाषणों और लेखों में महंगाई को लेकर चिंता बार-बार सामने आती है। वे मानते हैं कि फेड ने समय रहते महंगाई को गंभीरता से नहीं लिया। इससे यह संकेत मिलता है कि उनके नेतृत्व में फेड का प्राथमिक फोकस ग्रोथ सपोर्ट से ज्यादा प्राइस स्टेबिलिटी पर हो सकता है। ऐसे माहौल में गोल्ड और सिल्वर जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
  4. डॉलर और बॉन्ड मार्केट को सपोर्ट : वॉर्श की सोच मजबूत डॉलर और ऊंची रियल यील्ड के पक्ष में मानी जाती है। बाजार इसे इस तरह पढ़ रहा है कि उनके आने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊपर रह सकती हैं और डॉलर को मजबूती मिल सकती है। यही कारण है कि उनके नाम की चर्चा भर से डॉलर इंडेक्स में उछाल और बुलियन में बिकवाली देखने को मिली।
  5. क्रिप्टो पर भी सख्त नजर : वॉर्श के बयानों से यह भी संकेत मिलता है कि वे क्रिप्टोकरेंसी को महंगाई के खिलाफ सुरक्षित विकल्प नहीं मानते। उनकी नजर में यह ज्यादा सट्टा संपत्ति है, जिसे ढीली मौद्रिक नीति ने जरूरत से ज्यादा हवा दी। यह सोच क्रिप्टो बाजार के लिए भी नकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

कुल मिलाकर क्या क्लू मिलते हैं

केविन वॉर्श के पुराने बयानों और नीतिगत सोच से साफ संकेत मिलता है कि वे हॉकिश फेड चेयर साबित हो सकते हैं। ऊंची दरें, सख्त लिक्विडिटी और महंगाई पर कड़ा रुख उनकी पहचान रही है। यही क्लू बाजार को डरा रहे हैं और इसी वजह से गोल्ड, सिल्वर और दूसरे रिस्क एसेट्स में फिलहाल तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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