बिजनेस

कमाई के शुरुआती 5 साल: पैसे से जुड़ी ये आदतें आपका भविष्य बना सकती हैं या बिगाड़

Career Mistakes: कामकाजी जीवन के शुरुआती 5 सालों में अनियंत्रित खर्च, कर्ज, निवेश में देरी और इमरजेंसी फंड की अनदेखी जैसी गलतियां युवाओं के आर्थिक भविष्य को कमजोर करती हैं। सही आदतें ही स्थायी धन बनाती हैं।

Image

सावधान! पहली नौकरी के 5 सालों में की गईं ये 9 गलतियां ताउम्र करेंगी परेशान

Photo : iStock

Career Mistakes: करियर के शुरुआती 5 साल किसी भी युवा के वित्तीय भविष्य की नींव तय करते हैं। इस दौर में सैलरी का आकार उतना मायने नहीं रखता, जितनी पैसे से जुड़ी आदतें रखती हैं। शुरुआत में नियमित बचत, सही निवेश और कर्ज से दूरी बनाने का अनुशासन विकसित हो जाए, तो आगे की राह आसान हो जाती है। इसके विपरीत, इस दौरान पड़ी गलत आदतें - जैसे क्रेडिट कार्ड का बेहिसाब इस्तेमाल, दिखावे के खर्च और फिजूलखर्ची - धीरे-धीरे आपकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देती हैं। आइए जानते हैं वे कौन सी 9 आम आर्थिक गलतियां हैं, जो युवा अपने कामकाजी जीवन के शुरुआती 5 सालों में करते हैं।

सैलरी बढ़ते ही खर्च बढ़ा लेना

भारत के संगठित क्षेत्र में हर साल औसतन 8 से 10 फीसदी तक सैलरी बढ़ती है। लेकिन कई युवा अपनी बढ़ती आय को बचत या निवेश में लगाने के बजाय जीवनशैली को महंगा बनाने में खर्च कर देते हैं। नया और महंगा घर, लेटेस्ट गैजेट्स, बार-बार छुट्टियां मनाना और महंगे होटलों में खाना खाने जैसी आदतें इस बढ़ी हुई सैलरी को लील जाती हैं। नतीजा यह होता है कि आपकी आय तो बढ़ती है, लेकिन आपकी बचत या कुल संपत्ति (नेट वर्थ) में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होती।

निवेश में देरी करना और कंपाउंडिंग का फायदा गंवाना

शुरुआती सालों में अक्सर युवाओं को लगता है कि रिटायरमेंट या बड़े वित्तीय लक्ष्य अभी बहुत दूर हैं, इसलिए निवेश बाद में शुरू करेंगे। लेकिन इस सोच के चक्कर में वे 'कंपाउंडिंग' (ब्याज पर ब्याज) की ताकत का फायदा उठाने का मौका गंवा देते हैं। अगर आप शुरुआती 5 साल निवेश नहीं करते हैं, तो बाद के सालों में उसी वित्तीय लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपको दोगुनी या तीन गुनी राशि का निवेश करना पड़ता है।

इमरजेंसी फंड न बनाना

अक्सर युवा बिना कोई इमरजेंसी फंड बनाए सीधे म्यूचुअल फंड या शेयरों में पैसा लगाने लगते हैं। लेकिन अचानक नौकरी चले जाने, बीमारी या किसी पारिवारिक संकट के समय जब पैसों की जरूरत होती है, तो उन्हें अपने निवेश को घाटे में बेचना पड़ता है या फिर भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। हर कामकाजी व्यक्ति के पास कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना बेहद जरूरी है।

सिर्फ कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना

कई युवा सोचते हैं कि उनकी कंपनी ने उन्हें जो हेल्थ इंश्योरेंस कवर दिया है, वह उनके लिए काफी है। लेकिन यह सुरक्षा अधूरी होती है। नौकरी बदलने के दौरान या कंपनी की पॉलिसी में बदलाव होने पर आप बिना कवर के रह सकते हैं। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई के दौर में कंपनी का कवर परिवार के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। इसलिए शुरुआती उम्र में ही एक व्यक्तिगत (पर्सनल) हेल्थ इंश्योरेंस जरूर ले लेना चाहिए।

खराब कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) के जाल में फंसना

आज के समय में क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और 'बाय नाऊ पे लेटर' (BNPL) जैसी सुविधाओं के कारण कर्ज लेना बहुत आसान हो गया है। युवा अक्सर अपनी इच्छाओं को पूरा करने और ऐसी चीजें खरीदने के लिए कर्ज ले लेते हैं, जिनकी कीमत समय के साथ घटती है। क्रेडिट कार्ड के बिल और लोन की ईएमआई चुकाने में ही उनकी आय का बड़ा हिस्सा चला जाता है, जिससे वे भविष्य के लिए बचत नहीं कर पाते।

रातों-रात अमीर बनने वाले ट्रेंड्स के पीछे भागना

हर दौर में कोई न कोई ऐसा निवेश ट्रेंड आता है जो रातों-रात अमीर बनने का दावा करता है, चाहे वह सट्टा वाले शेयर हों, क्रिप्टोकरेंसी हो या सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने वाले कोई और एसेट। नए निवेशक बिना समझे इनमें पैसा लगा देते हैं और बड़ा नुकसान उठाते हैं। टिकाऊ संपत्ति हमेशा धैर्य, विविधता (डायवर्सिफिकेशन) और अनुशासित निवेश से ही बनती है।

भविष्य के बड़े लक्ष्यों की अनदेखी करना

शादी, खुद का घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य भले ही शुरुआती दिनों में बहुत दूर नजर आएं, लेकिन समय के साथ महंगाई के कारण इनकी लागत काफी बढ़ जाती है। जो लोग अपने शुरुआती करियर में इन दूरगामी लक्ष्यों की योजना नहीं बनाते, उन्हें बाद के जीवन में अचानक पैसों का बड़ा इंतजाम करने में भारी तनाव का सामना करना पड़ता है।

कंपनी के फायदों का पूरा इस्तेमाल न करना

बहुत से कर्मचारी अपनी कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं और अलाउंस को ध्यान से समझते ही नहीं हैं। प्रोविडेंट फंड (PF) में कंपनी का योगदान, मेडिकल टॉप-अप, टैक्स बचाने वाले रीइम्बर्समेंट, वेलनेस बेनिफिट्स और एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) जैसी सुविधाएं आपकी कुल आय का अहम हिस्सा होती हैं। इन्हें नजरअंदाज करने का मतलब है अपने ही पैसे छोड़ देना।

स्किल्स और करियर ग्रोथ पर खर्च न करना

शुरुआती सालों में युवा अक्सर बचत और खर्चों को मैनेज करने पर इतना ध्यान देते हैं कि वे अपनी सबसे बड़ी संपत्ति यानी खुद की कमाने की क्षमता पर निवेश करना भूल जाते हैं। शुरुआती 5 सालों में नई स्किल्स सीखने, सर्टिफिकेशन कोर्स करने और नेटवर्किंग पर किया गया खर्च आपको भविष्य में जो रिटर्न देता है, वह किसी भी वित्तीय निवेश से कहीं ज्यादा हो सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article