Premium

Explained : क्या होता है गोल्ड-सिल्वर रेश्यो, जिससे पता चलता है कब भरभरा कर गिरेंगे चांदी के दाम?

Gold-Silver Prices के बीच हमेशा से एक रिश्ता रहा है। इस रिश्ते को GSR यानी गोल्ड-सिल्वर रेश्यो या मिंट रेश्यो भी कहा जाता है। इस रेश्यो में ही वह राज छिपा है, जिससे पता चलता है कि कब सिल्वर ओवरबॉट है और कीमतों में कब बढ़ी गिरावट आ सकती है। जानते हैं फिलहाल, यह रेश्यो निवेशकों को क्या बता रहा है?

Image
Photo : TN Innovations
क्या बता रहा गोल्ड-सिल्वर रेश्यो

Gold-Silver ने पिछले एक साल में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। चांदी में जहां करीब 300 फीसदी और सोने में 100 फीसदी के करीब रिटर्न मल्टीबैगर रिटर्न मिला है। खासतौर पर चांदी के दाम में पिछले दो महीने में ही 100% का उछाल आ चुका है। भारतीय बाजार में चांदी की कीमत दो महीने के भीतर 1.70 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसी तरह सोने के दाम में भी दो महीने में करीब 40 फीसदी का उछाल आया है।

Gold Price History

एक साल से लेकर एक महीने के तक रिटर्न डाटा से यह साफ पता चलता है कि सिल्वर के प्राइस की तेजी गोल्ड की तुलना में बेहद तेज रही है। हालांकि, लॉन्ग टर्म में देखें, तो 30 साल में गोल्ड ने करीब 3200% का रिटर्न दिया है। वहीं, इस दौरान चांदी ने 5000% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, दोनों मेटल्स के रिटर्न में यह पहली बार नहीं है, जब बड़ा फर्क आया है। पहले भी कई बार सिल्वर ने GSR के बंधन को तोड़ते हुए सोने से ज्यादा चमक बिखेरी है। लेकिन, अतीत के इस डाटा से यह भी पता चलता है कि जब भी चांदी इस रेश्यो के बंधन को तोड़ती है, तो औंधे मुंह गिरती है।

Silver Price History

फिलहाल कितना है गोल्ड-सिल्वर रेश्यो?

Tradingview के आंकड़ों मुताबिक फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 52.530 से 43.554 के बीच बना हुआ है। अगस्त 2011 के बाद यह रिकॉर्ड लो स्तर पर है। 1992 से लेकर अब तक ऐसे सिर्फ कुछ ही मौके आए हैं, जब यह रेश्यो 50 से नीचे आया है।

Gold Silver Ratio

क्या बताता है ये रेश्यो?

Gold–Silver Ratio यह बताता है कि एक आउंस सोना खरीदने के लिए कितने आउंस चांदी की जरूरत है। इसे समझना बेहद आसान है। अगर सोने की कीमत 3,300 डॉलर प्रति आउंस है और चांदी 33 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रही है, तो Gold–Silver Ratio 100 होगा। इसका मतलब 1 आउंस सोने के बराबर 100 आउंस चांदी। यह रेश्यो सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि सोने की तुलना में चांदी सस्ती है या महंगी। इसी वजह से इसे प्रोफेशनल ट्रेडर्स, हेज फंड्स और कमोडिटी एनालिस्ट्स बड़े ध्यान से ट्रैक करते हैं।

Gold–Silver Ratio लेवलबाजार का संकेतचांदी के दामों पर असरनिवेशकों के लिए संकेत
110+चांदी बेहद सस्ती, डर और संकट का माहौलनीचे से तेज रैली की संभावनासिल्वर में वैल्यू बायिंग का मौका
90–100सोने को ज्यादा तरजीह, अनिश्चितता ऊंचीचांदी में रिकवरी की शुरुआतधीरे-धीरे सिल्वर एक्सपोजर बढ़ाया जा सकता है
70–80सामान्य स्थिति, संतुलित बाजारचांदी और सोना दोनों स्थिरन्यूट्रल ज़ोन, ट्रेंड फॉलो करना बेहतर
55–65चांदी मजबूत, डिमांड तेजचांदी आउटपरफॉर्म करती हैमुनाफा सुरक्षित करने का वक्त
45–55चांदी ओवरहीटेड, स्पेकुलेशन हावीतेज करेक्शन का खतरासिल्वर में सतर्कता जरूरी
40–45 से नीचेमैनिया ज़ोनभरभराकर गिरावट संभवसिल्वर से आंशिक/पूरा एग्जिट

रेश्यो ऊंचा और नीचा होने का मतलब

जब Gold–Silver Ratio बहुत ऊंचा होता है, तो इसका मतलब होता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। ऐसे दौर में अक्सर सिल्वर में वैल्यू बायिंग देखने को मिलती है। इसके उलट, जब रेश्यो बहुत नीचा आ जाता है, तो यह संकेत देता है कि चांदी की कीमत सोने के मुकाबले जरूरत से ज्यादा तेज बढ़ चुकी है और यहां से करेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि Gold–Silver Ratio को चांदी के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम माना जाता है।

क्या कहता है इतिहास?

अगर हम साल 2000 के बाद का डेटा देखें, तो Gold–Silver Ratio ज्यादातर समय 60 से 80 के दायरे में घूमता रहा है। हालांकि, जब-जब ग्लोबल संकट आता है, तो यह रेश्यो तेजी से ऊपर जाता है। मसलन 2008 का फाइनेंशियल क्राइसिस या 2020 का कोविड शॉक में यह रेश्यो तेजी से ऊपर गया, क्योंकि निवेशकों ने सोने को ज्यादा सुरक्षित माना। 2020 में यह रेश्यो एक समय 110 के पार चला गया था। इसका मतलब था कि चांदी ऐतिहासिक रूप से बेहद सस्ती थी। इसके बाद जो हुआ, वह सबके सामने है। चांदी में लंबी और दमदार रैली।

साल/दौरGold–Silver Ratioसिल्वर का ट्रेंडनतीजा
1979–80~45पैराबॉलिक रैलीतेज क्रैश
200880+पहले गिरावट, फिर रिकवरीलॉन्ग रैली की शुरुआत
2011~30–35रिकॉर्ड हाईभारी गिरावट
2020110+बेहद कमजोरमल्टी-ईयर अपट्रेंड
2024–2550 के आसपासतेज उछालकरेक्शन का खतरा

दूसरा पहलू भी अहम

इतिहास बताता है कि जब Gold–Silver Ratio तेजी से नीचे गिरता है, तो अक्सर यह चांदी के लिए खतरे की घंटी साबित होता है। 1979–80 का सिल्वर मैनिया हो या 2011 की रैली, दोनों मामलों में रेश्यो के नीचे आने के बाद चांदी में तेज और दर्दनाक गिरावट देखी गई। आज की स्थिति भी कुछ हद तक वैसी ही दिख रही है। हालिया चार्ट्स के मुताबिक Gold–Silver Ratio ने एक लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड चैनल को तोड़ा है और बेहद कम स्तरों तक फिसल गया है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि चांदी ने सोने की तुलना में बेहद तेज रफ्तार पकड़ ली है।

क्या कह रहे एनालिस्ट?

एनालिस्ट्स का मानना है कि जब रेश्यो इतनी तेजी से नीचे आता है, तो इसका मतलब होता है कि बाजार में स्पेकुलेशन हावी है और कीमतें फंडामेंटल्स से आगे निकल चुकी हैं। वहीं, चांदी में जारी तेजी के पीछे एक्सपर्ट कई वजह बताते हैं।

  • चांदी की मौजूदा रैली सिर्फ एक कारण से नहीं आई है। इसके पीछे कई फैक्टर काम कर रहे हैं।
  • एक तरफ जियो-पॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल अनिश्चितता ने सेफ हेवन डिमांड को बढ़ाया।
  • दूसरी तरफ, एनर्जी ट्रांजिशन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और डेटा सेंटर जैसी इंडस्ट्रीज से चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड भी मजबूत बनी हुई है।
  • इसके अलावा, ETF फ्लो और रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने इस रैली को और ज्यादा आक्रामक बना दिया।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

चांदी की कीमतें जितनी तेजी से ऊपर गई हैं, उतनी तेजी से डिमांड कमजोर भी पड़ सकती है। ऊंचे दाम पर इंडस्ट्रियल यूजर्स खरीद कम कर सकते हैं और निवेशक मुनाफा बुक करना शुरू कर सकते हैं। इतिहास बताता है कि चांदी जब गिरती है, तो वह धीरे नहीं गिरती। अक्सर इसमें कीमतें नाक के बल गिरती दिखती हैं, यानी जैसी तेजी, वैसी ही गिरावट।

निवेश की रणनीति में क्या इस्तेमाल?

प्रोफेशनल ट्रेडर्स Gold–Silver Ratio का इस्तेमाल सिर्फ भविष्यवाणी के लिए नहीं, बल्कि पोजिशन मैनेजमेंट के लिए करते हैं। जब रेश्यो बहुत नीचे आ जाता है, तो वे सिल्वर एक्सपोजर घटाकर गोल्ड की तरफ शिफ्ट करना शुरू करते हैं। जब रेश्यो बहुत ऊपर होता है, तब इसके उलट रणनीति अपनाई जाती है। यानी यह रेश्यो सिर्फ यह नहीं बताता कि क्या खरीदें, बल्कि यह भी बताता है कि कब सतर्क हो जाएं।

क्या चांदी गिरने वाली है?

यह समझना जरूरी है कि Gold–Silver Ratio कोई टाइमिंग टूल नहीं है। इससे यह नहीं बताया जा सकता है कि गिरावट कल आएगी या अगले हफ्ते। लेकिन यह जरूर पता चलता है कि रिस्क बढ़ चुका है और रिवॉर्ड अब पहले जितना आकर्षक नहीं रहा। कई बार रेश्यो के नीचे आने के बाद चांदी कुछ समय तक साइडवेज भी रह सकती है, लेकिन इतिहास में ज्यादातर मामलों में इसके बाद तेज करेक्शन आया है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

End of Article