Rupees Crosses 83 Level Against Dollar:रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 पैसे गिरकर 83.07 पर चला गया। घरेलू शेयर बाजार में नकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती के कारण रुपया कमजोर हुआ। अमेरिकी बांड यील्ड और यूएस डॉलर इंडेक्स में में मजबूती तथा विदेशी कोषों की सतत बिकवाली से भी रुपये पर भी असर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में अक्टूबर 2022 के बाद से यह सबसे बड़ी गिरावट है। अक्टूबर में रुपया 82.89 के स्तर पर पहुंच गया था।
गिरावट के प्रमुख फैक्टर
सोमवार को अंत रबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 83.04 पर खुला और फिर 83.07 प्रति डॉलर के भाव पर पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में 25 पैसे की गिरावट पर है।रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 82.82 पर बंद हुआ था।इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.17 प्रतिशत बढ़कर 103.01 पर पहुंच गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.89 प्रतिशत गिरकर 86.04 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था।
गिरावट से आयात को नुकसान
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से आयात पर असर पड़ता है। भारतीय इकोनॉमी अभी भी आयात आधारित है, ऐसे में डॉलर के मुकाबले रूपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है। इस कारण कीमतें बढ़ती हैं। वहीं कमजोर रुपये का निर्यातकों को फायदा मिलता है। लेकिन भारतीय इकोनॉमी के लिए डॉलर का मजबूत होने ओवरऑल नुकसानदायक है। हालांकि भारत इससे निपटने के लिए अब दो देशों के बीच एक-दूसरे की करंसी में कारोबार को तरजीह दे रहा है।
