विदेशों में रहने वाले भारतीयों और उनके परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशों से भारत भेजे जाने वाले पैसे यानी 'इनवर्ड रेमिटेंस' (Inward Remittance) की प्रक्रिया को और भी तेज और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अक्सर देखा जाता था कि जब कोई व्यक्ति विदेश से भारत में अपने परिजनों को पैसा भेजता था, तो उसे बैंक खातों में क्रेडिट होने में दो से तीन दिन या उससे भी अधिक समय लग जाता था। लेकिन अब RBI के नए नियमों के बाद बैंकों को यह पैसा उसी दिन (Same Day) लाभार्थी के खाते में क्रेडिट करना होगा जिस दिन उन्हें यह प्राप्त होता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल इंडिया की मजबूती को बढ़ाना और विदेशों से आने वाले धन के प्रवाह को और अधिक सुचारू बनाना है, ताकि इमरजेंसी के समय लोगों को पैसों के लिए भटकना न पड़े।
बैंक नहीं उठा पाएंगे फ्लोट पीरियड का फायदा
इन नए नियमों के आने से उन लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो विदेशों से आने वाले पैसों पर निर्भर हैं। अब तक बैंक 'फ्लोट पीरियड' का फायदा उठाते थे, यानी पैसा मिलने के बाद भी वे उसे कुछ दिनों तक अपने पास होल्ड पर रखते थे, जिससे ग्राहकों को असुविधा होती थी। लेकिन अब RBI ने साफ कर दिया है कि यदि बैंक को रेमिटेंस की सूचना और राशि मिल चुकी है, तो उसे बिना किसी देरी के उसी वर्किंग डे पर ग्राहक के खाते में डालना अनिवार्य है।
यह नियम न केवल व्यक्तिगत खातों के लिए है, बल्कि व्यापारिक लेन-देन के लिए भी उतना ही प्रभावी होगा। इसके अलावा, RBI ने बैंकों को अपनी प्रणालियों को और अधिक आधुनिक बनाने का निर्देश दिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर में लगने वाले समय को कम से कम किया जा सके और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जा सके।
क्यों जरुरी है ये नियम?
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस नए नियम से केवल रफ़्तार ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि लागत में भी कमी आने की संभावना है। जब पैसा जल्दी ट्रांसफर होगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी, तो ट्रांजेक्शन चार्ज भी कम हो सकते हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है, और इस तरह के सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। हालांकि, ग्राहकों को यह ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते का KYC पूरी तरह अपडेट हो और विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेज सही हों, ताकि बैंक को पैसा क्रेडिट करने में कोई तकनीकी बाधा न आए। कुल मिलाकर, RBI का यह फैसला डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे विदेशों से आने वाली पाई-पाई का हिसाब अब तुरंत और सटीक मिलेगा।
