Rajesh Export Share Price Boom : राजेश एक्सपोर्ट के शेयर प्राइस में पिछले 7 कारोबारी सत्र में करीब 34 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। 15 जून से शेयर में लगातार अपर सर्किट लग रहा है। हालांकि, बाजार में ऐसे बहुत से शेयर होते हैं, जिनमें लंबे समय तक अपर सर्किट लगता रहता है। लेकिन, ऐसा मामला देखना दुर्लभ होता है, जब बाजार नियामक सेबी की तरफ से किसी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए जाएं और प्रमोटर को ट्रेंडिंग करने से बैन कर दिया जाए। लेकिन, इसके बाद भी शेयर में ताबड़तोड़ तेजी देखने को मिले।
SEBI ने 3 जून को Rajesh Export के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कहा, कंपनी ने अपने रेवेन्यू को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया है। इसके साथ ही फंड डायवर्जन जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शेयर मार्केट में कंपनी के शेयरों में उन्हें ट्रेडिंग करने से बैन कर दिया। इसके बाद बैंक लोन से जुड़े विवाद भी सामने आए हैं।
सेबी की कार्रवाई के बाद भी भागा स्टॉक
लेकिन, हैरान करने वाली बात ये है कि 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट के खिलाफ सेबी ने जब कार्रवाई की, तो कंपनी का शेयर प्राइस 109.38 रुपये था, तो लगातार लोअर सर्किट में गिरते रहने की वजह से 12 जून तक 76.41 रुपये तक लुढ़क गया। इसके बाद इसमें ऐसी तेजी शुरू हुई कि ये रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। शुक्रवार 12 जून के भाव से आज सोमवार 22 जून के बीच 7 कारोबारी सत्र में ये शेयर 34 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 102.38 रुपये पर पहुंच चुका है।
क्या थे सेबी के आरोप?
SEBI ने आरोप लगाया कि कंपनी की विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड की वैलकैम्बी SA, ने जो रेवेन्यू बताया था, उसका एक बड़ा हिस्सा गलत बताया गया था। रेगुलेटर के मुताबिक, इस समय के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों का हिस्सा 97-99% था। सेबी के मुताबिक कंपनी ने 15.15 लाख करोड़ का रेवेन्यू मिसरिप्रेजेंटेशन किया है।
क्यों आ रही स्टॉक में तेजी?
Market Analysts के मुताबिक फिलहाल Rajesh Export Share में कोई फंडामेंटल चेंज नहीं आया है। रेगुलेटरी रिस्क अब भी कायम है। फिलहाल, शेयर में तो तेजी है उसे डेड कैट बाउंस कहा जा सकता है, जो कि एल्गो और ऑटोमेटेड ऑर्डर, लो लिक्विडिटी जैसी वजहों से देखने को मिल रहा है। NSE-BSE पर डाटा इसे तेजी की कहानी बता रहा है। सेबी की कार्रवाई से पहले इस शेयर में डेली एवरेज वॉल्यूम 500,000 से 1,400,000 के बीच रहता था, जो अब घटकर 10,000 से 16,000 के बीच आ गया है। यानी कम वॉल्यूम में ऑटोमेटेड ट्रिगर्स की वजह से हो रही ट्रेडिंग और रिटेलर्स की तरफ से एवरेजिंग के प्रयासें की वजह से प्राइस में तेजी देखने को मिल रही है।
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