रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसे बचाना नहीं होता, बल्कि बढ़ती उम्र, महंगाई और हेल्थकेयर के बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए ऐसा फंड तैयार करना होता है, जो नौकरी छोड़ने के बाद भी आपकी वित्तीय जरूरतों को आराम से पूरा कर सके। इसलिए जितनी जल्दी रिटायरमेंट की योजना शुरू की जाए, उतना ही कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है और भविष्य में बड़ा कॉर्पस बनाना आसान हो जाता है। आज हम भारत में उपलब्ध रिटायरमेंट-फोकस्ड कुछ मुख्य इन्वेस्टमेंट विकल्पों के बारे में बता रहे हैं। आप अपनी जरूरत के अनुसार, इनमें से किसी में निवेश शुरू कर अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं।
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सरकार समर्थित एक स्वैच्छिक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है। इसमें सैलरी पाने वाले और खुद का काम करने वाले, दोनों तरह के लोग शामिल हो सकते हैं।
NPS के तहत, इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी सिक्योरिटीज़ और वैकल्पिक एसेट्स के मिश्रण में निवेश किया जाता है। सब्सक्राइबर अपनी पसंद के हिसाब से एसेट एलोकेशन चुन सकते हैं या उम्र के आधार पर ऑटोमैटिक एलोकेशन का विकल्प चुन सकते हैं।
रिटायरमेंट के समय, जमा हुई कुल रकम का एक हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल एन्युइटी खरीदने के लिए करना होता है, जिससे रेगुलर पेंशन मिलती है। इस स्कीम में टैक्स का फ़ायदा भी मिलता है।
एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF)
एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग की सबसे आम स्कीम में से एक है।
इसमें कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों ही हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का एक तय हिस्सा जमा करते हैं। जमा हुई रकम पर एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) की ओर से सालाना घोषित ब्याज मिलता है। अभी ब्याज दर सालाना 8.25 प्रतिशत है।
इस फंड की रकम आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद निकाली जा सकती है, लेकिन EPFO के नियमों के तहत कुछ खास स्थितियों में, जैसे मेडिकल इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई-लिखाई के लिए, इसमें से कुछ हिस्सा निकालने की इजाजत होती है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सरकार द्वारा समर्थित एक लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है, जिसे पांच-पांच साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।
इस योजना में सरकार द्वारा तय की गई ब्याज दरें मिलती हैं और रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े नहीं होते हैं। इसमें इनकम टैक्स एक्ट के नियमों के तहत टैक्स का फायदा भी मिलता है। जो निवेशक रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए स्थिर और लंबी अवधि की बचत की तलाश में हैं, वे अक्सर PPF को चुनते हैं।
अटल पेंशन योजना (APY)
अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए है, हालांकि योजना की शर्तों के अनुसार अन्य पात्र व्यक्ति भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
सब्सक्राइबर अपने कामकाजी जीवन के दौरान नियमित रूप से योगदान करते हैं और तय उम्र पूरी होने के बाद, अपने योगदान की राशि और चुने गए पेंशन विकल्प के आधार पर गारंटीड मासिक पेंशन पाते हैं। इस स्कीम का संचालन PFRDA करता है।
सीनियर सिटिज़न्स सेविंग्स स्कीम (SCSS)
सीनियर सिटिजन्स सेविंग्स स्कीम रिटायरमेंट के बाद के लोगों के लिए बनाई गई है। यह बैंकों और पोस्ट ऑफिस के जरिए उपलब्ध है।
इस स्कीम में सरकार द्वारा तय ब्याज दर मिलती है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है। ब्याज का भुगतान नियमित अंतराल पर किया जाता है, जिससे यह उन रिटायर लोगों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन जाती है जो निश्चित आय चाहते हैं। इस स्कीम की अवधि तय होती है और इस पर सरकार द्वारा तय निवेश सीमा और पात्रता की शर्तें लागू होती हैं।
