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White Paper: मोदी सरकार ने पेश किया अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र,दावा-UPA से मिली थी नाजुक इकोनॉमी, हमने ऊंचाइयों पर पहुंचाया

  • Authored by: रामानुज सिंह
  • Updated Feb 8, 2024, 06:31 PM IST

Modi government white paper on economy: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार (8 फरवरी 204) को लोकसभा में मोदी सरकार का श्वेत पत्र (White Paper) पेश किया।

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सरकार ने पेश किया अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र

Modi government white paper on economy: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार (8 फरवरी 204) को लोकसभा में मोदी सरकार का श्वेत पत्र (White Paper) पेश किया। इस श्वेत पत्र में UPA सरकार के 10 साल यानी 2004 से 2014 और मोदी सरकार के 10 यानी 2014 से अबतक की तुलना की गई है। सरकार ने अपने श्वेत पत्र में 2014 से पहले और 2014 के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में आए अंतर को बताया है। शुक्रवार को लोकसभा में इस पर चर्चा होगी और राज्यसभा में शनिवार को चर्चा होगी। सरकार ने श्वेत पत्र में कहा कि यूपीए सरकार को विरासत में एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था मिली थी जो और अधिक सुधारों के लिए तैयार थी लेकिन अपने 10 वर्षों में इकोनॉमी को नॉन-परफॉर्मिंग बना दिया।

Modi Government White Paper

यूपीए और मोदी सरकार की जीडीपी वृद्धि दर

इसमें कहा गया है कि यूपीए सरकार शायद ही कभी 1991 के सुधारों का श्रेय लेने में विफल रहता है लेकिन 2004 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया। सरकार ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद किसी भी तरह से उच्च आर्थिक विकास को बनाए रखने की अपनी खोज में व्यापक आर्थिक नींव को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। इसमें कहा गया है कि बैंकिंग संकट यूपीए सरकार की "सबसे महत्वपूर्ण और बदनाम विरासतों" में से एक था।

श्वेत पत्र में यूपीए सरकार की विफलताओं का जिक्र

श्वेत पत्र में यूपीए सरकार की आर्थिक विफलताओं का डिटेल दिया गया था और उन 10 वर्षों में राष्ट्रमंडल खेलों, 2जी टेलीकॉम, सारदा चिट फंड, आईएनएक्स मीडिया, एंट्रिक्स देवास आदि समेत विभिन्न भ्रष्टाचारों को बताया गया। श्वेत पत्र में आर्थिक सुधार के लिए बीजेपी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया गया है। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली तो अर्थव्यवस्था ऐसी राह पर थी जहां आर्थिक नीति में कई गलत मोड़ से उत्पन्न गहरे संकट के स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं दे रहे थे। जैसे ही 2014 में हमारी सरकार ने सत्ता संभाली हमने इसे पहचान लिया भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ने में मदद करने के साथ-साथ अपनी व्यापक आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए प्रणालियों और प्रक्रियाओं में सुधार और सुधार की तत्काल आवश्यकता है। श्वेत पत्र में कहा गया कि अमृत काल अभी शुरू हुआ है और हमारा लक्ष्य '2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। यह हमारा कर्तव्य काल है।

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यूपीए काल में अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट हुई

10वें स्थान से पांचवें नंबर पर पहुंची अर्थव्यवस्था

भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था करीब एक दशक में ही नाजुक 5 अर्थव्यस्थाओं में से टॉप पांच में पहुंच गई है। पिछले 10 वर्षों में कोविड महामारी जैसी बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का उदय हुआ। 2014 में 10वें स्थान से 2023 में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार 2027 तक तीसरा सबसे बड़ा बनने की उम्मीद है।

श्वेत पत्र में यूपीए सरकार पर आरोप

यूपीए सरकार आर्थिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में पूरी तरह विफल रही। उसने ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे अर्थव्यवस्था ठहर गई थी। इसने वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सुधारों का लाभ उठाते रहे। लेकिन लॉन्ग टर्म आर्थिक परिणामों की अधिक चिंता किए बिना संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तेज आर्थिक विकास का शोषण करना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि बैड लोन का पहाड़ खड़ा हो गया। बहुत कुछ छिपा होने के बावजूद उच्च राजकोषीय घाटा, उच्च चालू खाता घाटा, पांच वर्षों के लिए दो अंकों की महंगाई दर हो गई। जिसने अधिकतर भारतीयों की जेब पर असर डाला।

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यूपीए सरकार के समय महंगाई बढ़ी

वे न केवल अर्थव्यवस्था में गतिशीलता लाने में विफल रहे बल्कि अर्थव्यवस्था को इस तरह लूटा कि हमारे उद्योगपतियों ने ऑन रिकॉर्ड कहा कि वे भारत के बजाय विदेश में निवेश करना पसंद करेंगे। निवेशकों को भगाना आसान है लेकिन उन्हें वापस लाना कठिन है। यूपीए सरकार ने यह भी दिखा दिया अर्थव्यवस्था की मदद करने की तुलना में उसे नुकसान पहुंचाना आसान है। उन्हें एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली और उन्होंने हमें एक कमजोर अर्थव्यवस्था सौंपी। हमने इसकी जीवंत बनाया। हमने बता दिया हम पिछले 10 वर्षों में कर सकते हैं और हमें उम्मीद है कि हम अगले पच्चीस वर्षों में इसे और आगे बढ़ाएंगे।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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