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कम EMI या कर्ज से जल्दी आजादी? Home Loan की अवधि चुनने का क्या है सही फॉर्मूला

होम लोन को लेकर हर दूसरे व्यक्ति के जेहन में यह सवाल आता है कि लंबी अवधि का लोन चुनें या छोटी अवधि का लोन चुनें। हालांकि, दोनों ही विकल्पों के अपने फायदे हैं तो नुकसान भी हैं।

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Home Loan Tenure (Photo: iStock)

Lower EMI vs Faster Debt Repayment: होम लोन (Home Loan) लेते समय सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि लंबी अवधि वाला लोन लेना बेहतर है या कम समय में लोन खत्म करना। कई लोग कम EMI के लिए लंबा टेन्योर चुनते हैं, जबकि कुछ लोग जल्दी कर्ज खत्म करने के लिए छोटी अवधि का विकल्प लेते हैं। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। ऐसे में सही फैसला आपकी आय, खर्च और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है। आइए दोनों विकल्पों के फायदे और नुकसान समझने की कोशिश करते हैं-

लंबी अवधि का लोन

Home Loan Tenure

Home Loan Tenure (Photo: iStock)

अगर कोई व्यक्ति लंबी अवधि वाला होम लोन चुनता है तो उसकी मासिक EMI कम हो जाती है। इससे हर महीने बजट संभालना आसान रहता है और दूसरे खर्चों के लिए भी पैसा बचता है। नौकरी की शुरुआत में या अनिश्चित आय वाले लोगों के लिए यह विकल्प ज्यादा आरामदायक माना जाता है। कम EMI होने से निवेश, बच्चों की पढ़ाई या इमरजेंसी फंड के लिए भी जगह बची रहती है।

हालांकि लंबा टेन्योर चुनने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि कुल ब्याज काफी ज्यादा देना पड़ता है। होम लोन जितने अधिक वर्षों तक चलता है, बैंक को उतना ज्यादा ब्याज जाता है। शुरुआत के वर्षों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में ही चला जाता है और मूल रकम यानी प्रिंसिपल धीरे-धीरे कम होती है।

कम अवधि का लोन

दूसरी तरफ, कम अवधि वाला होम लोन चुनने पर EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज काफी कम देना पड़ता है। इससे व्यक्ति जल्दी कर्ज मुक्त हो सकता है। जिन लोगों की आय स्थिर है और जो हर महीने ज्यादा EMI आराम से भर सकते हैं, उनके लिए छोटा टेन्योर फायदेमंद माना जाता है।

कौन-सा विकल्प ज्यादा सही

बहुत ज्यादा छोटा या बहुत ज्यादा लंबा टेन्योर चुनने की बजाय संतुलित तरीका ज्यादा बेहतर हो सकता है। कई लोग शुरुआत में लंबा टेन्योर चुनते हैं ताकि EMI कम रहे और बाद में बोनस या अतिरिक्त आय मिलने पर प्रीपेमेंट करते रहते हैं। इससे मासिक दबाव भी कम रहता है और ब्याज की बचत भी हो सकती है।

ईएमआई को लेकर जरूरी बातें

होम लोन के शुरुआती वर्षों में किया गया छोटा प्रीपेमेंट भी लाखों रुपये का ब्याज बचा सकता है। क्योंकि शुरुआती EMI में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है, इसलिए उस समय प्रिंसिपल कम करने का फायदा बड़ा मिलता है।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि केवल आज की सैलरी देखकर लोन टेन्योर तय नहीं करना चाहिए। हो सकता है भविष्य में खर्च बढ़ जाएं या आय में उतार-चढ़ाव आए। ऐसे में EMI इतनी होनी चाहिए कि व्यक्ति बिना ज्यादा तनाव के बाकी वित्तीय जिम्मेदारियां भी संभाल सके।

कुछ मामलों में बैंक ब्याज दर कम होने पर EMI घटाने की बजाय लोन की अवधि बढ़ा देते हैं। इसलिए उधारकर्ताओं को समय-समय पर अपना लोन स्टेटमेंट चेक करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बैंक से टेन्योर कम करने का अनुरोध करना चाहिए।

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Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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