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विदेश में जमा अघोषित संपत्ति के ऐलान का आखिरी मौका! CBDT ने जारी किए नए नियम, डेडलाइन 31 दिसंबर 2026

Foreign Assets Disclosure Scheme 2026: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड CBDT ने विदेश में जमा अघोषित संपत्ति या आय की स्वैच्छिक घोषणा के लिए एक और मौका दिया है।

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विदेश में संपत्ति रखने वालों को बड़ी राहत! 31 दिसंबर 2026 तक कर सकेंगे अघोषित संपत्ति का खुलासा

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Foreign Assets Disclosure Scheme 2026 : भारत सरकार के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने छोटे करदाताओं को राहत देते हुए विदेश में स्थित अघोषित संपत्तियों और आय की घोषणा के लिए 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स - डिस्क्लोजर स्कीम रूल्स, 2026' की अधिसूचना जारी कर दी है। यह योजना प्रभावी हो गई है। वित्त अधिनियम, 2026 के अध्याय IV के तहत शुरू की गई यह एक स्वैच्छिक खुलासा योजना है। इसके तहत करदाता एक निर्दिष्ट टैक्स या शुल्क का भुगतान करके विदेश में मौजूद अपनी अघोषित संपत्ति या आय को कानूनी रूप से घोषित कर सकते हैं। यह योजना उन लोगों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो पहले किसी कारणवश अपनी विदेशी संपत्तियों की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को नहीं दे पाए थे। योजना का लाभ उठाने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2026 तय की गई है, जिसके बाद कोई भी घोषणा स्वीकार नहीं की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न होगी, जिससे करदाताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?

इस योजना के तहत वे सभी व्यक्ति पात्र माने जाएंगे जो प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के दौरान भारत के निवासी रहे हैं। इसके अलावा, अनिवासी या 'निवासी लेकिन सामान्यतः निवासी नहीं' (RNOR) कैटेगरी के लोग भी इस योजना का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए शर्त यह है कि वे उस वित्तीय वर्ष में भारत के निवासी रहे हों जिससे वह अघोषित विदेशी आय संबंधित है, या फिर उस वर्ष में भारत के निवासी थे जिस वर्ष वह विदेशी संपत्ति खरीदी गई थी।

मूल्यांकन की तारीख और संपत्तियों का मूल्य

विदेश में स्थित अघोषित संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए 31 मार्च 2026 को कट-ऑफ तारीख माना गया है। इसका अर्थ यह है कि जिस भी संपत्ति की घोषणा की जा रही है, उसका उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value - FMV) 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार तय किया जाएगा। इस योजना के तहत केवल वही करदाता आवेदन कर सकते हैं जिनकी विदेश में स्थित कुल संपत्तियों का कुल मूल्य 5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। अगर कुल विदेशी संपत्ति का मूल्य 5 करोड़ रुपये से अधिक है, तो वह व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं होगा।

भुगतान की जाने वाली राशि और शुल्क का गणित

योजना के तहत देय राशि का निर्धारण दो अलग-अलग कैटेगरी में किया गया है। पहली कैटेगरी के तहत, घोषित की गई अघोषित विदेशी संपत्ति या आय के मूल्य पर 30% टैक्स और इस टैक्स के बराबर ही अतिरिक्त राशि (यानी कुल 60%) का भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का विदेश में 60 लाख रुपये का अघोषित बैंक खाता है और 20 लाख रुपये की अघोषित आय है (कुल 80 लाख रुपये), तो उसे 24 लाख रुपये टैक्स और 24 लाख रुपये अतिरिक्त राशि मिलाकर कुल 48 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं दूसरी कैटेगरी के तहत, अगर विदेश में मौजूद संपत्तियों का कुल मूल्य 5 करोड़ रुपये से कम है, तो इसके लिए 1 लाख रुपये का एकमुश्त शुल्क तय किया गया है।

विभिन्न संपत्तियों का फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) कैसे तय होगा?

विदेशी संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है। सामान्य नियम के अनुसार, संपत्ति का बाजार मूल्य उसकी खरीद लागत और मूल्यांकन तारीख पर खुले बाजार में मिलने वाली संभावित कीमत में से जो भी अधिक हो, उसे माना जाएगा। इसके लिए उस देश के मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट अनिवार्य होगी। अगर खुले बाजार का मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है, तो इंडेक्स की गई खरीद लागत को ही बाजार मूल्य माना जाएगा। सोना, चांदी, कीमती पत्थर, पुरातात्विक वस्तुएं, पेंटिंग्स और कलाकृतियों के मामले में भी यही नियम लागू होगा। अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) के लिए भी संबंधित देश के सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर उच्चतम मूल्य या इंडेक्स लागत तय की जाएगी।

शेयरों और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध शेयरों के लिए 31 मार्च 2026 को उच्चतम और न्यूनतम मूल्य के औसत को आधार माना जाएगा। अगर उस दिन कोई ट्रेडिंग नहीं हुई है, तो उससे ठीक पहले के ट्रेडिंग वाले दिन के मूल्यों का औसत निकाला जाएगा। गैर-सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों के लिए बुक वैल्यू, बैलेंस शीट की देनदारियों और निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।

किन परिस्थितियों में की जा सकती है घोषणा?

यह योजना उन करदाताओं के लिए बेहद उपयोगी है जो धारा 139 के तहत इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में विफल रहे थे, या जिन्होंने योजना शुरू होने से पहले दाखिल किए गए रिटर्न में अपनी विदेशी संपत्ति का डिटेल नहीं दिया था। इसके अतिरिक्त, जिनकी विदेशी आय या संपत्ति आयकर अधिनियम की धारा 147 के तहत कर आकलन से छूट गई थी, वे भी 16 अगस्त 2026 से 31 दिसंबर 2026 के बीच फॉर्म 1 के माध्यम से अपनी घोषणा दर्ज करा सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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