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पहली बार कर रहे हैं निवेश, समझें डायवर्सिफकेशन का गणित, कौन सा एसेट देगा ग्रोथ और कौन सुरक्षा?

अगर आप कमाने लगे हैं और निवेश के विकल्प तलाश रहे हैं, तो कुछ भी शुरू करने से पहले उन सभी विकल्पों के बारे में जरूर जान लें, जिनका इस्तेमाल आपको एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने के लिए करना चाहिए।

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निवेश में डायविर्सफिकेशन जरूरी

Investment Tips For Beginners : देश में बड़ी तादाद में ऐसे युवा हैं, तो बचत या निवेश को महत्व नहीं देते हैं। कई बार आधी-अधूरी जानकारी या दोस्तों की सलाह पर ऐसे एसेट्स में निवेश कर फंस जाते हैं, कि उनका फिर निवेश से मोह भंग हो जाता है। युवावस्था में जब जिम्मदारियां नहीं होती हैं और आय बढ़ रही होती है, तो निवेश और बचत बोरिंग और गैर-जरूरी चीज लगती है। लेकिन, पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों का अनुभव यही बताता है कि बचत आपकी एक्स्ट्रा इनकम है और निवेश इस एक्स्ट्रा इनकम से अमीर बनने का जरिया।

लिहाजा, अगर आप पहली बार बचत और निवेश के बारे में सोच रहे हैं, तो निवेश के उन सभी विकल्पों के बारे में जरूर जान लें, जो लॉन्ग टर्म के लिए आपके जीवन के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिहाज से आपकी मदद करें। मिसाल के तौर पर अगर आपकी पहली बार नौकरी लगी है और आपका वेतन 50 हजार रुपये है। इस वेतन के आधार पर अगर आप 10 साल में 25-30 लाख रुपये का फंड जुटाना है, तो आपको किस तरह के एसेट में कितना निवेश करना चाहिए यह तय करने के लिए आपके पास शुरुआती जानकारी जरूरी है।

क्या है पहली सीढ़ी?

अगर आप भविष्य के बढ़े लक्ष्य लेकर चल रहे हैं और निवेश के जरिये उन्हें हासिल करना चाहते हैं, तो बचत असल में निवेश की पहली सीढ़ी है। यानी सबसे पहले आपको बचत पर ध्यान देना शुरू करना होगा। बचत की आदत बनने के बाद ही नियमित निवेश किया जा सकता है।

बचत क्यों पर्याप्त नहीं?

अगर आपने बचत की आदत बना ली है। लेकिन, उस बचत से निवेश नहीं कर रहे हैं, तो यह समझदारी नहीं है। बचत की शुरुआत करने के बाद लॉन्ग टर्म बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपको निवेश करना होगा। अगर आप बचत करते हुए अपने बैंक खाते में पैसा जमा कर रहे हैं, तो इस रकम से आपके लॉन्ग टर्म लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल होगा। लिहाजा, आपको अलग-अलग तरह के एसेट्स में निवेश करते हुए डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाना होगा।

बचत बनाम निवेश का फर्क?

बचत का सीधा अर्थ है आप अपनी आय में से पैसे बचा रहे हैं। लेकिन, निवेश उस रणनीतिक योजना को कहा जाता है, जिसके तहत आप अपनी बचत की रकम को महंगाई से निपटते हुऐ ऐसे एसेट्स में डिप्लॉय करते हैं, जो आपके फ्यूचर के लिए फाइनेंशियल सिक्योरिटी देते हैं। जब आप बचत खाते में रकम को रखते हैं, तो बहां 2 से 3 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। लेकिन, इसी दौरान अगर महंगाई 6-7 फीसदी बढ़ जाती है, तो आपकी बचत की वैल्यू रखे-रखे 3-4 फीसदी घट जाएगी। मसलन, आपने 1 लाख रुपये बचत खाते में रखे। एक साल में इस रकम पर 2 या 3 हजार रुपये ब्याज मिला, इस तरह कुल रकम 1 लाख 2 हजार या 1 लाख तीन हजार हो गई। लेकिन, अगर इस दौरान महंगाई 7 फीसदी बढ़ गई, तो आपकी रकम की असली कीमत 95-96 हजार रुपये ही रह जाएगी।

कैसे करे डायवर्सिफिकेशन?

Asset Allocation : निवेशक के तौर पर आपके सामने कई तरह के एसेट हैं। मसलन, अगर आप हाई रिस्क, हाई रिवार्ड कैटेगरी में निवेश करते हैं, तो इसके लिए आपके पास स्टॉक मार्केट के तमाम विकल्प हैं। जहां, इक्विटी में ही प्राइमरी मार्केट से लेकर डेरिवेटिव्ज तक के विकल्प मिलते हैं। इसके बाद रियल एस्टेट में कई तरह के विकल्प मिलते हैं। वहीं, कमोडिटी सेग्मेंट में गोल्ड, सिल्वर, कॉपर और क्रूड जैसे विकल्प मिलते हैं। वहीं, फिस्क्ड इनकम कैटेगरी में बॉन्ड मिलते हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF और NPS जैसे विकल्प भी मिलते हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड की अपनी एक पूरी दुनिया है। यहां, मार्केट, कमोडिटी सहित कई तरह के एसेट में निवेश के रास्ते मिलते हैं।

कौन सा एसेट देगा ग्रोथ और कौन सुरक्षा?

निवेश यात्रा में सही संतुलन बनाने के लिए एसेट क्लासेस को दो भागों में समझा जा सकता है: ग्रोथ (बढ़त) के लिए शेयर बाजार (Stocks) और इक्विटी म्यूचुअल फंड सबसे बेहतरीन माने जाते हैं, क्योंकि लंबे समय में इन्होंने महंगाई को पछाड़ते हुए सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है, हालांकि इनमें शॉर्ट-टर्म में रिस्क और उतार-चढ़ाव होता है। दूसरी ओर, सुरक्षा (Security) के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सरकारी बॉन्ड्स और सोना (Gold) सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं, क्योंकि इनमें आपका मूल धन (Principal Amount) पूरी तरह सुरक्षित रहता है और निश्चित रिटर्न मिलता है, भले ही इनका रिटर्न ग्रोथ एसेट्स के मुकाबले थोड़ा कम हो।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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