जब कोई दोस्त या रिश्तेदार लोन लेना चाहता है और बैंक उससे गारंटर मांगता है, तो अक्सर करीबी लोग बिना ज्यादा सोचे उसकी मदद के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि गारंटर बनने से उन्हें कोई खास परेशानी नहीं होगी, क्योंकि लोन तो दूसरा व्यक्ति ले रहा है। लेकिन ऐसा सोचना भारी पड़ सकता है। गारंटर बनने का मतलब सिर्फ किसी की मदद करना नहीं है, बल्कि लोन की अदायगी को लेकर एक बड़ी जिम्मेदारी लेना भी है।
गारंटर बनने का क्या मतलब है?
आसान भाषा में समझें तो गारंटर बैंक को यह भरोसा देता है कि अगर मुख्य कर्ज लेने वाला व्यक्ति लोन नहीं चुकाता है, तो उसकी जिम्मेदारी गारंटर पर भी आ सकती है। भारतीय कानून के तहत सामान्य तौर पर गारंटर की जिम्मेदारी मुख्य कर्जदार की जिम्मेदारी के बराबर हो सकती है, जब तक लोन के अनुबंध में कुछ अलग व्यवस्था न हो। यानी सिर्फ नाम देने भर से आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
EMI नहीं भरी तो क्या होगा?
मान लीजिए आपके किसी रिश्तेदार ने 10 लाख रुपये का लोन लिया और आप उसके गारंटर बन गए। कुछ समय बाद उसने EMI चुकाना बंद कर दिया। ऐसी स्थिति में बैंक बकाया रकम की वसूली के लिए गारंटर से भी संपर्क कर सकता है। कई मामलों में बैंक को पहले मुख्य कर्जदार के खिलाफ सभी उपाय खत्म करने का इंतजार करना जरूरी नहीं होता। इसलिए गारंटर बनने से पहले यह समझना जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर आपको भी भुगतान करना पड़ सकता है।
CIBIL Score पर भी पड़ सकता है असर
गारंटर बनने का एक बड़ा जोखिम आपके क्रेडिट रिकॉर्ड से जुड़ा है। अगर मुख्य कर्जदार EMI का भुगतान समय पर नहीं करता या लोन में डिफॉल्ट होता है, तो इसका असर गारंटर के क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी पड़ सकता है। इससे आगे चलकर आपके लिए नया लोन या क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सिर्फ रिश्ते के भरोसे किसी के लोन की गारंटी देने से पहले उसकी भुगतान क्षमता जरूर समझें।
आपकी अपनी Loan लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है
किसी दूसरे व्यक्ति के लोन का गारंटर बनने पर वह लोन आपकी वित्तीय जिम्मेदारियों में भी गिना जा सकता है। अगर भविष्य में आपको खुद घर, कार या किसी दूसरे काम के लिए बड़ा लोन चाहिए, तो बैंक आपकी कुल जिम्मेदारियों को देखकर आपकी लोन लेने की क्षमता का आकलन कर सकता है। इसलिए गारंटर बनने का असर सिर्फ मौजूदा लोन तक सीमित नहीं रहता।
गारंटर बनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर कोई करीबी आपसे गारंटर बनने के लिए कहता है, तो पहले उसकी आय, नौकरी या कारोबार और पुराने लोन की जानकारी समझें। यह भी देखें कि वह हर महीने EMI आसानी से चुका सकता है या नहीं। लोन की कुल रकम, अवधि, ब्याज और गारंटी की शर्तों को ध्यान से पढ़े बिना किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि गारंटर बनने को केवल औपचारिकता न समझें। अगर लोन लेने वाला व्यक्ति भविष्य में भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है, तो बैंक की ओर से आप पर भी जिम्मेदारी आ सकती है। RBI से जुड़े नियमों और भारतीय कानून में गारंटर की जिम्मेदारी को गंभीरता से देखा गया है। इसलिए दोस्ती या रिश्तेदारी निभाने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
