Indian Retail Leasing : आर्थिक चुनौतियों और महंगाई की चिंताओं के बावजूद भारत का रिटेल लीजिंग बाजार मजबूती से आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय संपत्ति सलाहकार संस्था CBRE की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) में रिटेल लीजिंग गतिविधियों में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस अवधि में कुल रिटेल स्पेस लीजिंग का आंकड़ा करीब 39 लाख वर्ग फुट (3.9 million sq ft) तक पहुंच गया।
दिल्ली-NCR में ही आई नई सप्लाई
रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इस साल की पहली छमाही में करीब 9 लाख वर्ग फुट का नया रिटेल स्पेस है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान देश भर में चालू हुई यह पूरी की पूरी नई सप्लाई अकेले दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में ही केंद्रित रही। CBRE का मानना है कि आने वाले समय में नए ए-ग्रेड (Grade A) रिटेल प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से उपनगरीय (Suburban) और नए उभरते इलाकों में रिटेल स्पेस की मांग तेजी से बढ़ेगी।
फैशन सेक्टर का दबदबा, मेट्रो से ज्यादा छोटे शहरों में मांग
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुल लीजिंग गतिविधियों में हमेशा की तरह फैशन और परिधान (Fashion & Apparel) क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल लीज की गई जगह में से करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी सेक्टर के खाते में गया। फैशन की मांग बड़े महानगरों के बजाय गैर-मेट्रो शहरों में अधिक मजबूत देखी गई। चंडीगढ़ और जयपुर में कुल रिटेल लीजिंग में फैशन ब्रांड्स की हिस्सेदारी करीब 69-69 प्रतिशत रही, जबकि कोच्चि में यह आंकड़ा करीब 65 प्रतिशत दर्ज किया गया।
किस सेक्टर ने कितनी जगह ली?
रिटेल स्पेस के इस्तेमाल के मामले में फैशन के बाद अन्य प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा।
- फूड एंड बेवरेज (F&B): खान-पान से जुड़े सेक्टर ने कुल लीजिंग में 14 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की।
- एंटरटेनमेंट (मनोरंजन): गेमिंग जोन और सिनेमा जैसे एक्सपीरियंस आधारित फॉर्मेट्स की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत रही।
- ज्वैलरी और होम फर्निशिंग: गहनों तथा घर की सजावट वाले ब्रांड्स का हिस्सा 7-7 प्रतिशत रहा।
- कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स: इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स ने कररीब 6 प्रतिशत स्पेस लीज पर लिया।
स्वदेशी और D2C ब्रांड्स का जलवा
भारतीय बाजारों में इस दौरान घरेलू ब्रांड्स का दबदबा साफ नजर आया। H1 2026 में कुल लीजिंग गतिविधियों का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वदेशी रिटेलर्स का रहा। इसके अलावा, ऑनलाइन से ऑफलाइन स्टोर की ओर रुख कर रहे डाइरेक्ट-टू-कंज्यूमर यानी D2C ब्रांड्स ने कुल लीजिंग में करीब 28 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मिक्स्ड-यूज मॉल देंगे रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि मल्ल और संगठित रिटेल प्रोजेक्ट्स अब ग्राहकों को केवल शॉपिंग नहीं, बल्कि अनुभव देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, नए रिंग रोड और बेहतर कनेक्टिविटी से मॉल्स की पहुंच नए ग्राहक वर्गों तक आसान हो रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से आने वाले समय में रिटेल रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश और अधिक मजबूत बना रहेगा।
