India Semiconductor Mission : उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर एक बड़ा विजन शेयर किया है। उन्होंने बताया कि भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र के सालाना उत्पादन को 2030 तक बढ़ाकर 500 अरब अमेरिकी डॉलर और स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक 5.3 से 8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का है। यह विशाल लक्ष्य देश में विनिर्माण और निवेश के नए अवसरों के दरवाजे खोलेगा।
'इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स' में विजन किया शेयर
इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) संवाद 2026 को संबोधित करते हुए भाटिया ने कहा कि सरकार के 'विकसित भारत 2047' के सपने को केवल एक विचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे विस्तृत क्षेत्र-वार (sector-specific) कार्य योजनाओं में बदल दिया गया है। इन योजनाओं में सामाजिक और आर्थिक दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें 2047 तक हासिल किए जाने वाले मुख्य लक्ष्यों को तय करने के साथ-साथ अगले कुछ वर्षों यानी 2030 तक उठाए जाने वाले जरूरी कदमों और कार्यों का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।
मौजूदा स्थिति से भविष्य के बड़े लक्ष्य
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए DPIIT सचिव ने कहा कि आज भारत का बेसलाइन उत्पादन करीब 330 अरब अमेरिकी डॉलर है। यहाँ से उत्पादन को बढ़ाकर पहले 2030 तक 500 अरब डॉलर और फिर 2047 तक 5.3 से 8 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य से न केवल देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक कंपनियों और घरेलू उद्योगों के लिए निर्माण तथा रोजगार के अपार नए अवसर पैदा होंगे।
भारत और जर्मनी के मजबूत ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंध
भारत और जर्मनी के बीच के ऐतिहासिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 25 से अधिक वर्षों की रणनीतिक साझेदारी और 75 वर्षों के राजनयिक संबंध हैं। व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह रिश्ता 100 साल से भी अधिक पुराना है। आजादी से पहले से ही जर्मन कंपनियां भारत में अपना परिचालन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने में इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स की अहम भूमिका रही है, जिसमें 2,500 से अधिक भारतीय और जर्मन सदस्य शामिल हैं। हाल के वर्षों में कई प्रतिनिधिमंडलों के भारत दौरे से इन संबंधों में और गहराई आई है।
आर्थिक सुधार और नियमों का सरलीकरण
भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए भाटिया ने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में सुधारों और उनके कार्यान्वयन पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है। पिछले तीन वर्षों में इस प्रक्रिया को और गति मिली है। व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर उच्चस्तरीय समितियां काम कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर जटिल नियमों को आसान बनाने और लालफीताशाही को कम करने के लिए कैबिनेट सचिवालय में एक विशेष 'डिरेगुलेशन सेल' भी बनाया गया है, जो उद्योगों को सुगमता से काम करने का माहौल प्रदान कर रहा है।
