Bank Expense on Stationary : एक तरफ देश में Digital India जैसी मुहिम के तहत सरकार से लेकर बाजार तक हर चीज ऑनलाइन है। वहीं, इस दौर में भी देश के बैंक पेन और पेपर पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। यह खर्च तब है, जब देश की सरकार कैशलेस इकोनॉमी बनाने पर जोर दे रही है। बैंक पहले ही अपनी तकरीबन हर सेवा ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन, इसके बाद भी देश के 15 बड़े बैंकों की तरफ से एक साल में पेन और पेपर जैसी चीजों पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
यह आंकड़ा इस वजह से भी हैरान करने वाला है कि रिजर्व बैंक करीब इतनी ही रकम खर्च करके पूरी इकोनॉमी को चलाने के लिए नोट छापता है। यानी एक तरफ जहां देश के टॉप बैंक सिर्फ पेन और पेपर पर जितनी रकम खर्च कर रहे हैं, उतनी रकम में RBI नोट छापकर पूरी इकोनॉमी को चला रहा है। RBI के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में रिजर्व बैंक ने नोट छापने पर कुल ₹4,875.2 करोड़ खर्च किए हैं। वहीं, देश के बैंकों ने पेन और पेपर पर करीब ₹7000 करोड़ खर्च किए हैं। इसमें से ₹3,878 करोड़ यानी आधी से ज्यादा रकम टॉप 15 बैंकों ने खर्च की है।
कहां से आए आंकड़े?
ब्रोकरेज फर्म ग्रो (Groww) ने बैंकों की FY25 की वार्षिक रिपोर्टों बैंकों की तरफ से पेन पेपर जैसी चीजों पर होने वाले खर्च के आंकड़े जारी किए हैं। UPI की धूम और डिजिटल क्रांति के दौर में ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं, क्योंकि बैंक अब भी हजारों करोड़ रुपये पेन-पेपर पर खर्च कर रहे हैं। यह रकम इतनी बड़ी है कि कई बैंक अपने कुल प्रॉफिट का 8 फीसदी तक इस मद में खर्च कर रहे हैं।
कौन सा बैंक कितना खर्च कर रहा?
Groww की तरफ से शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश के सबसे बड़े बैंक State Bank of India (SBI) ने करीब ₹986.4 करोड़ रुपये पेन-पेपर जैसी चीजों पर खर्च किए। इसके बाद प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने ₹922.5 करोड़ और Axis Bank ने ₹373.8 करोड़ खर्च किए हैं।

हैरान करने वाला है बैंकों के खर्च का डाटा
मुनाफे का बड़ा हिस्सा हो रहा खर्च
दिलचस्प बात यह है कि पेन-पेपर पर खर्च की जाने वाली रकम बैंकों के मुनाफे का अच्छा हिस्सा है। इस लिहाज से देखें, तो IDFC First Bank सबसे ऊपर है, जहां प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर खर्च बैंक का नेट प्रॉफिट का 8.05% है। इसके बाद IndusInd Bank का अनुपात 4.46% और Yes Bank का 2.86% रहा। वहीं SBI, HDFC Bank, ICICI Bank और Bank of Baroda जैसे बड़े बैंकों के लिए यह खर्च उनके नेट प्रॉफिट का लगभग 0.5% से 1.3% के बीच ही रहा। आंकड़े दिखाते हैं कि डिजिटल बैंकिंग के तेजी से बढ़ने के बावजूद चेकबुक, फॉर्म, पासबुक, दस्तावेज़ प्रिंटिंग और शाखा संचालन से जुड़ी कागजी जरूरतों पर बैंक अब भी हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।
गंभीर सवाल खड़े कर रहा खर्च
1. एक तरफ बैंक अपने CSR Funds से पर्यावरण को बचाने वाले अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। वहीं, कागज का इस्तेमाल कर पैसिव तरीके से कागज की खपत बढ़ाकर पेड़ों के कटने का इंतजाम कर रहे हैंं।
2. एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर बैंक कैसे अपने कुल प्रॉफिट का 8 फीसदी तक स्टेशनरी पर खर्च कर रहे हैं। यह बैंकों की तरफ से स्टेशनरी पर किए जाने खर्च की तार्किकता और तौर-तरीकों पर सवालिया निशान है।
3. बैंक जहां ग्राहकों से SMS अलर्ट के नाम पर भी पैसे वूसलते हैं और स्टेटमेंट को कागज की जगह ईमेल पर मंगाने के लिए कहते हैं। लेकिन, खुद कागजों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।
4. निवेशकों के नजरिये से देखा जाए, तो यह बैंकों के ऑपरेशन पर एक बड़ा सवाल है। आखिर फिनटेक के जमामने में प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा क्यों कागजों पर खर्च किया जा रहा है। जबकि, इस खर्च को काबू कर बैंक अपना प्रॉफिट बढ़ा सकती हैं।
