भारतीय बैंकिंग प्रणाली में सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) रखने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए खातों में न्यूनतम राशि यानी मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश के प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक अपने ग्राहकों को हर महीने खाते में एक निश्चित औसत राशि बनाए रखने का निर्देश देते हैं। अगर कोई ग्राहक अपने खाते में यह न्यूनतम रकम मेंटेन करने में विफल रहता है, तो बैंक उन पर जुर्माना या पेनल्टी चार्ज लागू कर देते हैं। हाल ही में जारी किए गए वित्तीय आंकड़े यह दर्शाते हैं कि बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से पेनल्टी (Penalty) के रूप में हजारों करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली है।
यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे देखकर आम बैंकिंग उपभोक्ता और विशेषज्ञ दोनों ही चौंक गए हैं। छोटे जमाकर्ताओं और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर इस जुर्माने का सीधा और सबसे ज्यादा असर पड़ता है, क्योंकि कई बार जागरूकता की कमी या आर्थिक तंगी के कारण लोग समय पर खाते में निर्धारित बैलेंस नहीं रख पाते हैं।
सबसे ज्यादा किसने काटे पैसे?
बैंकों की इस पेनल्टी नीति से सबसे अधिक प्रभावित वह उपभोक्ता होते हैं जो नियमित आय वाले नहीं हैं या जो विभिन्न बैंकिंग शुल्कों के प्रति पूरी तरह सतर्क नहीं रहते। जब कोई उपभोक्ता न्यूनतम राशि नहीं बनाए रख पाता, तो बैंक ऑटोमैटिक तरीके से खाते से चार्ज काट लेते हैं, जिससे कई बार खाता बैलेंस नेगेटिव में चला जाता है या जमा पूंजी और भी घट जाती है। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से लेकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और प्रमुख निजी बैंकों जैसे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) व आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामने आता है कि हर साल नॉन-मेंटेनेंस चार्ज के जरिए बैंकों की गैर-ब्याज आय (Non-Interest Income) में बड़ा इजाफा होता है। यद्यपि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियम कहते हैं कि बैंक पेनल्टी वसूलते समय सीमा से अधिक चार्ज नहीं लगा सकते और खाता बैलेंस को चार्ज काटकर शून्य से नीचे (नेगेटिव) नहीं ले जा सकते, फिर भी कटने वाली रकम ग्राहकों के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका साबित होती है।
किस बैंक ने कितनी वसूली पेनल्टी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार (28 जुलाई 2026) को राज्यसभा में जानकारी दी कि मिनिमम एवरेज डिपॉजिट बैलेंस (MAB) मेंटेन न करने की वजह से बैंकों ने पिछले चार वित्तीय वर्षों (FY23 से FY26) के दौरान ग्राहकों से पेनल्टी के रूप में ₹26,170.37 करोड़ (₹2,61,70,00,00,000) की भारी-भरकम राशि वसूली है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार, केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ही बैंकों ने ₹7,086.63 करोड़ का जुर्माना वसूला, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 के ₹6,974.79 करोड़ से अधिक है। इस जुर्माना वसूली में प्राइवेट बैंक सबसे आगे रहे, जिन्होंने कुल ₹4,948.71 करोड़ पेनल्टी के तौर पर वसूले। इनमें सबसे ज्यादा कमाई HDFC बैंक ने की, जिसने चार सालों में ₹1,798.14 करोड़ जुटाए, जबकि एक्सिस बैंक ₹1,081.33 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर रहा; वहीं दूसरी ओर, देश के सभी 12 सरकारी बैंकों ने मिलकर कुल ₹2,137.92 करोड़ की पेनल्टी वसूली।
खाते में मिनिमम बैलेंस बनाए रखने के नियम बैंक-दर-बैंक और ब्रांच के स्थान (मेट्रो, शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण) के आधार पर अलग-अलग तय होते हैं। आमतौर पर बैलेंस मेंटेन न करने पर पेनल्टी का यह चार्ज ₹50 से लेकर ₹600 तक हो सकता है, जिसे बैंक मासिक या तिमाही आधार पर काटते हैं। इस पेनल्टी राशि के साथ जीएसटी (GST) भी अलग से जोड़ा जाता है, और यदि खाते में बार-बार मिनिमम बैलेंस कम रहता है, तो यह चार्ज लगातार कटता रहता है।
कितनी पेनल्टी वसूलते हैं बैंक?
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि मिनिमम बैलेंस पेनल्टी से बचने के लिए ग्राहकों को अपने खातों के प्रकार और उनसे जुड़े नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। जो लोग खाते में हर समय 2,000 से 10,000 रुपये का न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने में असमर्थ हैं, उन्हें अपने सामान्य बचत खाते को बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) या 'जीरो बैलेंस' (Zero Balance Account) में ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। इसके अलावा, वित्तीय संस्थाओं और आरबीआई को भी डिजिटल वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना चाहिए ताकि गरीब व ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहक पेनल्टी की मार से बच सकें।
