STT: सेक्युरिटीज ट्रेडिंग टैक्स पर बोलीं निर्मला सीतारमण, सरकार का उद्देश्य छोटे निवेशकों को बचाना
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Feb 4, 2026, 01:54 PM IST
Securities Transaction Tax: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का वायदा और विकल्प (एफ एंड ओ) कारोबार पर सेक्युरिटीज ट्रेडिंग टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का फैसला राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि छोटे निवेशकों को भारी नुकसान और सट्टेबाजी से बचाने के लिए लिया गया है। इसका उद्देश्य आम जनता और खुदरा निवेशकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (तस्वीर-PTI)
Securities Transaction Tax: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि सरकार का वायदा और विकल्प (एफ एंड ओ) कारोबार पर सेक्युरिटीज ट्रेडिंग टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का निर्णय केवल छोटे निवेशकों को भारी नुकसान से बचाने के लिए है, न कि राजस्व बढ़ाने के लिए। उन्होंने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि इस कदम का उद्देश्य आम जनता और खुदरा निवेशकों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सीतारमण ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि एफ एंड ओ बाजार में आने वाले 90 प्रतिशत से अधिक निवेशक नुकसान में रहे हैं। इसी वजह से सरकार ने वायदा एवं विकल्प कारोबार पर एसटीटी बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय को नियमित तौर पर निवेशकों से फ़ोन आते रहते हैं, जिसमें वे सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हैं ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके।
एसटीटी में प्रस्तावित बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, विकल्प प्रीमियम और विकल्प के प्रयोग पर एसटीटी को 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया जाने का सुझाव है। निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह बढ़ोतरी निवेशकों के लिए एक तरह का पाबंदी और निवारक उपाय साबित होगी, जिससे छोटे निवेशक भारी नुकसान से बच सकेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार निवेशकों के लिए वायदा एवं विकल्प कारोबार में भाग लेने की सीमा तय कर सकती थी, तो उन्होंने कहा कि एसटीटी बढ़ाना एक प्रभावी तरीका है, जो निवेशकों को खतरनाक सट्टेबाजी से रोकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान हमेशा सामान्य जनता और छोटे निवेशकों के हित पर होता है।
एफ एंड ओ बाजार में निवेशकों की गिरती संख्या
वित्त वर्ष 2024-25 में शेयर वायदा एवं विकल्प खंड में व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 1.06 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 (30 दिसंबर, 2025 तक) में घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई। सेबी के अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों को इस बाजार में 1,05,603 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। सेबी के अनुसार, वायदा एवं विकल्प खंड में खुदरा निवेशकों के 90 प्रतिशत से अधिक लेन-देन नुकसान में जाते हैं। पूंजी बाजार नियामक ने पहले भी इस समस्या को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें साप्ताहिक डेरिवेटिव को युक्तिसंगत बनाना, अनुबंध के आकार में वृद्धि और उच्च मार्जिन आवश्यकताएं शामिल हैं। ये सभी उपाय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए किए गए हैं।
अमेरिकी बाजार में भारत के लिए शुभ संकेत
निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने पहले लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिका ने अगस्त में भारतीय उत्पादों के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया था और रूस से तेल खरीद जारी रखने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी लगाया था। इसका मतलब था कि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल 50 प्रतिशत शुल्क लग रहा था। इस नई व्यवस्था से भारतीय निर्यात को राहत मिलेगी और व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे।
सरकार का यह कदम छोटे निवेशकों की सुरक्षा और बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए है। एसटीटी बढ़ाने का मकसद केवल राजस्व बढ़ाना नहीं बल्कि निवेशकों को भारी घाटे से बचाना और उन्हें सुरक्षित निवेश के लिए प्रेरित करना है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार हर कदम उठाते समय जनहित और आम जनता के फायदे को ध्यान में रखती है।
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