आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की दोहरी मार पड़ती दिख रही है। एक तरफ जहां दैनिक उपयोग की वस्तुओं, रसोई गैस और खाद्य सामग्री की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने घर का मासिक बजट बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ अब बैंक लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ने का खतरा भी मंडराने लगा है। खाद्य पदार्थों के बढ़ते दाम और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच महंगाई दर में उछाल आया है, जिससे आम आदमी का रहना-खाना पहले से कहीं अधिक महंगा होता जा रहा है।
खाने पीने की चीजों के बढ़ेंगे दाम
रसोई के बजट पर नजर डालें तो सब्जियों, दूध, एडिबल ऑयल (खाने के तेल) और एलपीजी गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने आम परिवारों के गणित को उलझा दिया है। हर महीने रसोई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। जब खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो इसका सबसे पहला और सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मासिक बचत पर पड़ता है। लोग अपनी अन्य प्राथमिकताओं और खर्चों में कटौती करने पर मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली और आपातकालीन बचत दोनों प्रभावित होती हैं।
EMI होगी महंगी
रसोई के इस संकट के बीच अब लोन लेने वालों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। बढ़ती मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कटौती की संभावना कम हो जाती है या फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुनना पड़ता है। मौजूदा महंगाई वैसे भी RBI के टारगेट से ज्यादा है यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं या फिर से बढ़ती हैं, तो कमर्शियल बैंक भी होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन पर अपनी ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी मौजूदा लोन ईएमआई की राशि बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की समयावधि (Tenure) लंबी हो जाएगी।
पर्चेसिंग पावर पर पड़ता है असर
यह दोहरी मार आम आदमी की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। एक ओर दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर महीने बैंक को दी जाने वाली ईएमआई का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे दौर में वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि लोगों को अपने गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगानी चाहिए और इमरजेंसी फंड को मजबूत रखना चाहिए। आने वाले दिनों में रसोई की महंगाई और लोन की महंगी किश्तों का यह मिला-जुला असर आपकी वित्तीय योजना के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
