बिजनेस

SCSS vs Small Finance Bank FD: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सा ऑप्शन बेहतर, कहां मिलेगा ज्यादा फायदा

सीनियर सिटिजन के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों में सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सबसे अधिक पसंद की जाती है। हालांकि, सवाल यह कि इन दोनों विकल्पों में कौन-सा ज्यादा बेहतर है?

Image

SCSS vs Small Finance Bank FD कौन-सा ऑप्शन ज्यादा बेहतर (AI Generated Image)

सीनियर सिटिजन के लिए सुरक्षित और नियमित आय देने वाले निवेश विकल्पों में सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग ऐसे निवेश की तलाश में रहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और हर तिमाही या नियमित अंतराल पर आय मिलती रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि 8.2% ब्याज देने वाली SCSS बेहतर है या Small Finance Bank की FD, जहां कुछ बैंक 8.2 प्रतिशत से भी ज्यादा ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं?

दोनों ही विकल्पों की अपनी-अपनी खूबियां और सीमाएं हैं। निवेश का फैसला लेने से पहले सुरक्षा, ब्याज दर, लिक्विडिटी और टैक्स जैसे पहलुओं को समझना जरूरी है।

SCSS में सरकार का भरोसा

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक छोटी बचत योजना है। इसमें निवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सरकार की गारंटी मिलती है। मौजूदा समय में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है। SCSS में निवेश की अवधि 5 साल होती है, जिसे 3 साल के लिए आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसमें ब्याज का भुगतान हर तीन महीने में किया जाता है, जिससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है। इस योजना में अधिकतम 30 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, हालांकि मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है।

Small Finance Bank FD में ज्यादा ब्याज

दूसरी ओर, कुछ Small Finance Banks वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर SCSS से ज्यादा ब्याज दर ऑफर करते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक लंबी अवधि की एफडी पर आकर्षक रिटर्न देते हैं, जिससे निवेशकों को ज्यादा कमाई का मौका मिल सकता है। Small Finance Bank FD का एक फायदा यह है कि इसमें निवेश की अवधि चुनने की ज्यादा सुविधा होती है। ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से छोटी या लंबी अवधि के लिए एफडी करा सकते हैं। हालांकि, बैंक एफडी में जमा राशि की सुरक्षा के लिए यह देखना जरूरी है कि बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत काम कर रहा हो। हालांकि, अच्छी बात ये है कि बैंक डिपॉजिट पर डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत एक सीमा तक बीमा सुरक्षा भी मिलती है।

सुरक्षा के मामले में कौन आगे?

अगर सुरक्षा की बात करें तो SCSS को सरकार का समर्थन प्राप्त है, इसलिए जोखिम बेहद कम माना जाता है। वहीं Small Finance Bank FD में ब्याज ज्यादा मिल सकता है, लेकिन निवेशक को बैंक की विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के लिए पूंजी की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए केवल ज्यादा ब्याज देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

किसके लिए कौन सा विकल्प बेहतर?

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक पूरी सुरक्षा, सरकारी गारंटी और नियमित आय चाहता है तो SCSS एक मजबूत विकल्प हो सकता है। वहीं, जो निवेशक थोड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं और बैंक के जोखिम को समझते हैं, वे Small Finance Bank FD पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, फाइनेंशियस एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि वरिष्ठ नागरिक अपने पूरे पैसे को एक ही जगह निवेश करने के बजाय अलग-अलग विकल्पों में बांट सकते हैं। इससे जोखिम कम होता है और आय के अलग-अलग स्रोत बनते हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article