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10 नहीं इन 16 हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन पर नजर रखता है Income Tax, एक छोटी सी गलती और मुसीबत में पड़ जाएंगे आप

आयकर विभाग टैक्स चोरी रोकने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए करदाताओं के बड़े वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर रखता है। जानिए कौन से हैं वे 16 हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस, जिनकी जानकारी एसएफटी (SFT) रिपोर्टिंग और फॉर्म 61A के तहत सीधे आयकर विभाग तक पहुंचती है।

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10 नहीं इन 16 हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन पर नजर रखता है Income Tax

आयकर विभाग (Income Tax Department) करदाताओं द्वारा किए जाने वाले बड़े और उच्च मूल्य के वित्तीय लेन-देन (High-Value Transactions) पर लगातार अपनी नजर बनाए रखता है। कई बार लोग सोचते हैं कि केवल बैंक खाते में बड़ी रकम जमा करने या निकालने पर ही आयकर विभाग का ध्यान जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि टैक्स अथॉरिटी केवल 10 नहीं बल्कि ऐसे 16 प्रमुख हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस को ट्रैक करती है। इन लेन-देन का विवरण वित्तीय संस्थानों जैसे बैंक, म्यूचुअल फंड हाउस, शेयर ब्रोकर और रजिस्ट्रार द्वारा स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) के माध्यम से आयकर विभाग को भेजा जाता है। इसके लिए निर्धारित संस्थानों को हर साल 31 मई तक फॉर्म 61A दाखिल करके बीते वित्तीय वर्ष के सभी उच्च-मूल्य वाले सौदों की रिपोर्ट देनी होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने आयकर रिटर्न (ITR) में इन लेन-देन से जुड़ी वास्तविक आय या जानकारी को छिपाता है या गलत जानकारी दर्ज करता है, तो उसे आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगने वाला नोटिस जारी कर दिया जाता है।

इन लेन देन पर इनकम टैक्स रखता है पैनी नजर

आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा निगरानी में रखे जाने वाले 16 प्रमुख उच्च मूल्य वाले लेन-देन (High-Value Transactions) की लिस्ट नीचे दी गई है

  • 1. बचत खाते में नकद जमा या निकासी: एक वित्तीय वर्ष में बचत खाते (Savings Account) में ₹10 लाख या उससे अधिक का नकद लेन-देन।
  • 2. चालू खाते में नकद जमा या निकासी: एक वित्तीय वर्ष में चालू खाते (Current Account) में ₹50 लाख या उससे अधिक का नकद लेन-देन।
  • 3. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक की बैंक या पोस्ट ऑफिस एफडी (नकदी या डिजिटल दोनों माध्यमों से)।
  • 4. बैंक ड्राफ्ट (DD) / पे ऑर्डर: एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य के बैंक ड्राफ्ट या पे ऑर्डर की नकद खरीदारी।
  • 5. क्रेडिट कार्ड बिल का नकद भुगतान: एक वित्तीय वर्ष में क्रेडिट कार्ड के बिलों का ₹1 लाख या उससे अधिक का नकद भुगतान।
  • 6. क्रेडिट कार्ड बिल का कुल भुगतान: किसी भी माध्यम (डिजिटल या चेक) से एक वित्तीय वर्ष में क्रेडिट कार्ड के बिलों का कुल ₹10 लाख या उससे अधिक का भुगतान।
  • 7. अचल संपत्ति (Immovable Property): ₹30 लाख या उससे अधिक मूल्य की जमीन, मकान या किसी भी अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री।
  • 8. शेयर बाजार में निवेश: एक वित्तीय वर्ष में किसी कंपनी के शेयर (Stocks) खरीदने या बेचने के लिए ₹10 लाख या उससे अधिक का निवेश।
  • 9. म्यूचुअल फंड (Mutual Funds): एक वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड स्कीमों में ₹10 लाख या उससे अधिक का कुल निवेश।
  • 10. बॉन्ड या डिबेंचर (Bonds/Debentures): किसी कंपनी या संस्था द्वारा जारी बॉन्ड या डिबेंचर में ₹10 लाख या उससे अधिक का निवेश।
  • 11. बायबैक ऑफ शेयर (Buyback of Shares): किसी सूचीबद्ध कंपनी द्वारा ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य के शेयरों का बायबैक (प्रमोटर्स या शेयरधारकों से)।
  • 12. विदेशी मुद्रा की बिक्री (Foreign Exchange): एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य की विदेशी मुद्रा (फौरन करेंसी/ट्रेवल कार्ड) की बिक्री या खरीदारी।
  • 13. नकद वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री: किसी भी व्यवसाय या पेशेवर (Professional) द्वारा ₹2 लाख से अधिक का सामान या सेवाएं नकद (Cash) में बेचना।
  • 14. प्रीपेड पेमेंट्स इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs): एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य के वॉलेट, प्रीपेड कार्ड या डिजिटल वॉलेट रिचार्ज/खरीदारी।
  • 15. एनआरई/एनआरओ (NRE/NRO) खातों में ट्रांसफर: अनिवासी भारतीयों (NRI) के खातों में एक निश्चित सीमा से अधिक का उच्च-मूल्य फंड ट्रांसफर या जमा।
  • 16. वित्तीय संस्थानों द्वारा SFT-014/015 रिपोर्टिंग: बैंकों और वित्तीय निकायों द्वारा किसी करदाता के खाते में ब्याज, डिविडेंड या सिक्योरिटीज से हुई उच्च-मूल्य आय की वार्षिक रिपोर्टिंग।
Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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