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मलबे के नीचे छिपे यूरेनियम को खोजेंगे अमेरिकी एक्सपर्ट्स! ईरान ने गुप्त समझौते के तहत दी परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की मंजूरी

अमेरिका-ईरान युद्ध विराम समझौते के बीच बड़ी खबर आई है। ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर UN और अमेरिकी निरीक्षकों को बुलाने पर सहमत हुआ है। सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी सीधी बातचीत को मंजूरी दे दी है।

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तेहरान जाएंगे अमेरिकी परमाणु वैज्ञानिक (फाइल फोटो | AP)

Photo : AP

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कूटनीतिक खुलासा हुआ है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने अमेरिकी सांसदों को एक गोपनीय ब्रीफिंग में बताया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था IAEA को आमंत्रित करने के लिए तैयार हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस निरीक्षण दल में अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।

मलबे के नीचे छिपे संवर्धित यूरेनियम की होगी खोज

AP को मामले से वाकिफ दो सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विटकॉफ ने कांग्रेस (संसद) के नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी समितियों को बंद कमरे में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए मुख्य समझौते (MoU) में तो कोई गुप्त डील नहीं है, लेकिन इसके साथ एक 'साइड लेटर' तैयार किया गया है।

इस पत्र के जरिए ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी को न्यौता भेजा है। इस समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय निगरानी में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम किया जाएगा। युद्ध के दौरान हुए हमलों के कारण ईरान का अधिकांश संवर्धित कंक्रीट और मलबे के नीचे दबा हुआ माना जा रहा है, जिसे खोजने और नष्ट करने का काम अब अमेरिकी और UN के विशेषज्ञ मिलकर करेंगे।

मोजतबा खामेनेई ने किया सीधी बातचीत का समर्थन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई का भी बड़ा बयान सामने आया है। सरकारी मीडिया द्वारा पढ़े गए एक बयान में उन्होंने अमेरिका के साथ आमने-सामने की बातचीत का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने अपने कड़े रुख को दोहराते हुए कहा कि "यह बिल्कुल साफ होना चाहिए कि भविष्य में अमेरिका के साथ होने वाली आमने-सामने की सीधी बातचीत का मतलब यह कतई नहीं है कि हम अपने दुश्मन की राय या शर्तों को स्वीकार कर रहे हैं।"

जंग की शुरुआत में हुए एक हमले में घायल होने के बाद से मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। युद्ध समाप्ति के बाद इस समझौते पर यह उनकी पहली प्रतिक्रिया है, जिसे ईरान की पुरानी कूटनीतिक नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका ने हटाई नाकेबंदी, लेकिन उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के दौरे पर सस्पेंस

समझौता लागू होते ही अमेरिका ने गुरुवार को ईरान की आर्थिक नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली, जिसके बाद महीनों से बंद पड़े 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है।

हालांकि, इस कूटनीतिक जीत के बीच अमेरिकी राजनीति में आंतरिक घमासान भी शुरू हो गया है। उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने संकेत दिए हैं कि वह स्विट्जरलैंड की अपनी आगामी यात्रा को स्थगित कर सकते हैं, जहां इस शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने थे। वहीं, इस समारोह की मेजबानी करने वाले देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अपनी स्विट्जरलैंड यात्रा टाल दी है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही फ्रांस के वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ डिनर के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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