Iran Crisis: क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के साथ जारी अप्रत्यक्ष कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स और ANI की खबर के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) को 'आखिरी अल्टीमेटम' जारी कर दिया है। इसके साथ ही खामेनेई ने अमेरिका और क्षेत्रीय नीति से जुड़े प्रमुख फैसलों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी (Ahmad Vahidi) का खुलकर समर्थन किया है।
राष्ट्रपति का 'इस्तीफा हथियार' नहीं रहेगा
खामेनेई का कड़ा रुख इजरायली ब्रॉडकास्टर 'चैनल 14' की रिपोर्ट (तेहरान के सूत्रों के हवाले से) के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान नीतिगत मतभेदों के दौरान अक्सर अपने इस्तीफे की धमकी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे। खामेनेई ने अब यह साफ कर दिया है कि अगर राष्ट्रपति ने दोबारा इस्तीफा देने की कोशिश की, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा।
मई में दिया था औपचारिक इस्तीफा
रिपोर्ट का दावा है कि पेजेश्कियान ने मई 2026 में ही औपचारिक रूप से पद छोड़ने की पेशकश की थी। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के फैसलों से उनकी सरकार को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सर्वोच्च नेता के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि वे ईरान के सैन्य प्रतिष्ठान (IRGC) के साथ पूरी तरह खड़े हैं, जिससे राष्ट्रपति के पास सामरिक नीति बनाने का प्रभाव न के बराबर रह गया है।
IRGC कमांडर अहमद वाहिदी को अंतिम फैसला लेने का अधिकार मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को लेकर तेहरान का रुख अब और सख्त हो गया है। वाहिदी की नीति ही आधिकारिक नीति मानी जा रही है। आईआरजीसी (IRGC) कमांडर अहमद वाहिदी के कड़े रुख को ही अब शासन की आधिकारिक नीति बना दिया गया है।
सर्वोच्च अधिकार: नागरिक सरकार और सेना के बीच का अंतर लगभग खत्म हो चुका है और खामेनेई ने अमेरिका से जुड़े बड़े नीतिगत मामलों पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति वाहिदी को सौंप दी है।
नवंबर मध्यवाधि चुनाव की रणनीति: ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में होने वाले अमेरिका के मध्यवाधि चुनावों से पहले किसी बड़ी नीतिगत बदलाव के मूड में नहीं होंगे। इसलिए तेहरान ने अमेरिका पर अधिकतम दबाव बनाए रखने और अपने आर्थिक व रणनीतिक लाभ को बढ़ाने की योजना बनाई है।
अमेरिका के साथ बातचीत का क्या है सच?
वाशिंगटन और तेहरान के बीच औपचारिक वार्ता बंद है, लेकिन पर्दे के पीछे संपर्क जारी है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक सीधी बातचीत नहीं हो रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) और अमेरिकी विशेष दूतों (स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर) के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। इस कूटनीतिक संवाद में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बीच आया है जिसमें उन्होंने ईरान को समझौते पर पहुंचने का आखिरी मौका देने का दावा किया था। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका था।
खाड़ी देशों की अपील
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के अनुरोध पर वाशिंगटन ने सैन्य हमले को रोककर कूटनीति को एक आखिरी मौका देने का फैसला किया। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है, जिसे सऊदी अरब, यूएई और कतर का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी कई-कई घंटों तक अमेरिकी अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें करने के बावजूद सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करते रहते हैं।
