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क्या पाकिस्तान में फिर तख्तापलट की आहट है? गृह मंत्री के एक बयान से क्यों मच गया सियासी बवाल, समझिए पूरा मामला

पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल ला दिया है। उनके हालिया बयान से देश में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता,प्रशासनिक सुधार और सत्ता के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है।

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पाकिस्तान में फिर तख्तापलट की तैयारी? (फोटो- AI)

पाकिस्तान में एक बार फिर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है। इसकी वजह शहबाज शरीफ सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाने वाले गृह मंत्री मोहसिन नकवी हैं। पहले उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा शासन व्यवस्था को नाकाम बताते हुए बड़े प्रशासनिक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया और अब उन्होंने देश के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक का दावा कर सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ होगा,जिसमें न्यायपालिका, राजनीति,नौकरशाही और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली लोग शामिल रहे हों। उनके मुताबिक,21 वर्षों तक रिश्वत का यह खेल चलता रहा और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने किसी भी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

नकवी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब पहले से ही उनके और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के रिश्तों में खटास की चर्चाएं चल रही हैं। इससे पहले इस्लामाबाद में आयोजित पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में उन्होंने सार्वजनिक रूप से मौजूदा शासन व्यवस्था को विफल बताते हुए नए प्रशासनिक ढांचे और व्यापक सुधारों की वकालत की थी। उनके लगातार आक्रामक बयानों ने सरकार को असहज कर दिया है और पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता, सत्ता परिवर्तन और यहां तक कि तख्तापलट की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मोहसिन नकवी के बयान से क्यों मचा सियासी तूफान?

पूरे विवाद की शुरुआत 30 जुलाई को इस्लामाबाद में आयोजित पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट से हुई। इस दौरान गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा प्रशासनिक ढांचा अब देश की जरूरतों के अनुरूप काम नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, वर्तमान शासन प्रणाली अपनी उपयोगिता खो चुकी है और यदि समय रहते व्यापक संस्थागत सुधार नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में भी देश इन्हीं समस्याओं से जूझता रहेगा। नकवी ने नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन और बड़े सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पुराने ढांचे के सहारे पाकिस्तान आर्थिक और प्रशासनिक संकटों से बाहर नहीं निकल सकता।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्या कदम उठाया?

विवाद बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सभी संघीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की व्यापक समीक्षा के आदेश दिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी मंत्रालयों को फरवरी 2024 से अब तक की उपलब्धियों, प्रमुख योजनाओं और फैसलों का विस्तृत रिकॉर्ड निर्धारित प्रारूप में जमा करने का निर्देश दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल दावे पर्याप्त नहीं होंगे। प्रत्येक उपलब्धि के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य होगा और बिना साक्ष्य वाले दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

समीक्षा के दायरे में आर्थिक और वित्तीय मामलों के 18 मंत्रालय, कानून, सुरक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र के 14 मंत्रालय तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवाओं से जुड़े 9 मंत्रालय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा सीपीईसी अथॉरिटी, योजना आयोग, वार्षिक विकास कार्यक्रम और सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं की भी जांच की जाएगी।

राणा सनाउल्लाह ने क्यों जताई नाराजगी?

गृह मंत्री के बयान के बाद सरकार के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए। प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयों का गठन किसी मंत्री के बयान से नहीं हो सकता। इसके लिए संविधान और संसद की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव आता है, तो पहले राष्ट्रीय आयोग का गठन करना होगा, जो वित्तीय संसाधनों, प्रशासनिक ढांचे और संसदीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर विचार करेगा।

ख्वाजा आसिफ ने भी साधा निशाना

मोहसिन नकवी के बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से आई। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति वर्षों तक सत्ता के सबसे प्रभावशाली पदों पर रहा हो, उसके लिए अब व्यवस्था की खामियां गिनाना हैरान करने वाला है। एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में नकवी बेहद प्रभावशाली भूमिका में रहे हैं और कई मामलों में उनकी स्थिति इतनी मजबूत थी कि वे सीधे प्रधानमंत्री के प्रति भी जवाबदेह नहीं दिखते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि इतना ताकतवर व्यक्ति भी व्यवस्था से असंतुष्ट है, तो फिर कैबिनेट के बाकी सदस्यों के सरकार में बने रहने का औचित्य क्या है।

रक्षा मंत्री ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था में बदलाव लाना ही है, तो इसकी शुरुआत गृह मंत्रालय और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) से की जानी चाहिए, क्योंकि क्रिकेट प्रशंसक भी बोर्ड के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं।

नए प्रांतों की बहस क्यों बन गई राजनीतिक मुद्दा?

इस पूरे विवाद के बीच पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने बेहद सतर्क रुख अपनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे दोनों दलों की चुनावी मजबूरियां हैं। पीएमएल-एन की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत पंजाब में है, जबकि पीपीपी का आधार सिंध प्रांत में है। यदि भविष्य में नए प्रांत बनाए जाते हैं या मौजूदा प्रांतीय सीमाओं में बदलाव होता है, तो दोनों दलों के राजनीतिक समीकरण और चुनावी प्रभाव पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दोनों पार्टियां इस मुद्दे पर फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रही हैं।

'मुशर्रफ मॉडल' की चर्चा क्यों हो रही है?

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का प्रभाव केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मामलों में भी उनकी मजबूत भूमिका मानी जाती है। ऐसे में कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बढ़ती चुनौतियों के बीच सेना भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नए विकल्पों पर विचार कर सकती है।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि मोहसिन नकवी की राजनीतिक भूमिका लगातार मजबूत होती है, तो भविष्य में ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं जिनसे जनरल असीम मुनीर के लिए परवेज मुशर्रफ की तरह सत्ता के शीर्ष पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का रास्ता तैयार हो। हालांकि, इस तरह के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर ही देखा जा रहा है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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