हरिद्वार : बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शनिवार को उसके परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, कोली की मौत की खबर मिलने के बाद उसके परिजन हरिद्वार पहुंचे जहां पोस्टमार्टम के बाद उसका शव उन्हें सौंपा गया। उसके बाद खड़खड़ी शमशान घाट पर पुलिस की उपस्थिति में परिजनों ने कोली का अंतिम संस्कार किया।
अल्मोड़ा निवासी कोली के अंतिम संस्कार में उसके भाई हरीश कोली, सुरेंद्र कोली के 20 वर्षीय बेटे शिवम के साथ पहुंचे और उनके साथ गांव के ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत भी थे। कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में उसकी चाय की दुकान में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। पुलिस ने आशंका जतायी है कि कोली ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या की है।
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पुलिस के मुताबिक, जिला अस्पताल में डॉक्टरों के एक पैनल ने कोली के शव का पोस्टमार्टम किया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सके। कोली के भाई और कोली के बेटे ने मीडिया से कोई बात नहीं की लेकिन उनके साथ आए नारायण सिंह रावत ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्हें यह मामला आत्महत्या का नहीं लग रहा है।
आत्महत्या की या हत्या-पुलिस
उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पता चलना चाहिए कि उसने आत्महत्या की या यह हत्या का मामला है।हरिद्वार के नगर पुलिस उपाधीक्षक शिशुपाल सिंह नेगी ने ’पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कोली के हरिद्वार में आने के बाद से उसकी गतिविधियों की जांच भी शुरू कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि उन लोगों से भी पूछताछ की जा रही है जिन्होंने उसे नौकरी पर रखा या किराए पर दुकान दिलाई।
बताया जा रहा है कोली ने मौत से चार दिन पहले ही अनिल शर्मा नाम के एक व्यक्ति से चाय की दुकान किराए पर ली थी। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इंकार किया कि उसके तथा कोली के बीच दुकान को लेकर कोई विवाद हुआ था।कोली को दुकान दिलाने में मदद करने वाले स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कौशिक ने बताया कि एक दिन पहले ही कोली ने अपने घर फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे के जन्मदिन को लेकर तनाव में था और फोन पर भी उसकी परिजनों से कहासुनी हुई थी।
पुलिस ने बताया कि कोली पिछले चार-पांच माह से हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और इस दौरान दो-तीन जगह पर सुरक्षा गार्ड के रूप में नौकरी भी की थी मगर वहां पर पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे जाने के बाद पहचान खुलने के डर से उसने नौकरी छोड़ दी थी। पुलिस के मुताबिक, यह भी पता चला है कि चाय की दुकान भी उसने सदाराम नाम बताकर किराए पर ली थी। उसकी मौत के बाद जब पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो आधार कार्ड और वोटर पहचान पत्र से उसकी असली पहचान के बारे में पता चला। माना जा रहा है कि निठारी कांड में सभी 13 मामलों में बरी होने के बाद कोली हरिद्वार आया।
