Hezbollah vs Israel: जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली सेना को हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे First Person View Drones का मुकाबला करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अखबार ने बताया कि हिज़्बुल्लाह ड्रोन से जुड़े फाइबर ऑप्टिक धागों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे ऑपरेटर उन्हें मैन्युअल रूप से निर्देशित कर सकते हैं और इजराइली इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम से बच सकते हैं।
Hezbollah के ड्रोन अब Israel के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिज्बुल्लाह ऐसे FPV (First Person View) ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है जो फाइबर-ऑप्टिक केबल से जुड़े होते हैं। इसी वजह से इजरायली इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम इन्हें रोक नहीं पा रहे।
आयरन डोम बैटरी पर FPV ड्रोन से हमला
रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोन को ऑपरेटर सीधे फाइबर-ऑप्टिक थ्रेड के जरिए कंट्रोल करते हैं। चूंकि कंट्रोल सिग्नल रेडियो फ्रीक्वेंसी पर नहीं जाता, इसलिए इजरायल के जैमर इन्हें ब्लॉक नहीं कर पाते। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिज्बुल्लाह ने हाल ही में एक फुटेज जारी किया है जिसमें रविवार को उत्तरी सीमा के पास आयरन डोम बैटरी पर एफपीवी ड्रोन से हमला दिखाया गया है।
पिछले हफ्ते दक्षिणी लेबनान की यात्रा के दौरान, वरिष्ठ इजराइली अधिकारियों ने कथित तौर पर एफपीवी ड्रोन का पता लगाने और उन्हें रोकने में सुधार लाने के उद्देश्य से कई पायलट कार्यक्रमों पर चर्चा की, हालांकि अखबार ने कहा कि सेना अभी भी 'वास्तविक समय में पिछड़ने से उबरने की कोशिश कर रही है।'
क्या है FPV ड्रोन?
FPV यानी First Person View ड्रोन ऐसे ड्रोन होते हैं जिन्हें ऑपरेटर कैमरे की लाइव फीड देखकर उड़ाता है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद इनका इस्तेमाल युद्ध में तेजी से बढ़ा है।
इजरायल क्यों है परेशान?
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना अब ऐसे ड्रोन को पहचानने और मार गिराने के नए तरीके तलाश रही है। दक्षिणी लेबनान के दौरे पर गए वरिष्ठ अधिकारियों ने कई पायलट प्रोग्राम्स पर चर्चा की, लेकिन सेना अभी भी 'रियल टाइम में पकड़ने की कोशिश' कर रही है।
क्यों खतरनाक हैं फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन?
- इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का असर नहीं
- लो-लेवल उड़ान के कारण रडार से बच सकते हैं
- बेहद सटीक हमला करने में सक्षम
- कम लागत में बड़े हथियारों को चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता है, तो भविष्य के युद्धों में पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
