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PoJK में खूनी दमन, 80 लोगों की मौत, पत्रकारों का अपहरण, इंटरनेट ठप; एमनेस्टी और CPJ ने खोला मोर्चा

PoJK में महंगाई, बिजली बिलों, भारी करों और कश्मीरी युवाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भड़की विरोध की आग अब पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। HRC-PoJK की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा में 80 नागरिकों की जान गई...

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PoJK में खूनी दमन

Photo : AP

Pak Army Crackdown in PoJK: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थिति लगातार विस्फोटक होती जा रही है। रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर चल रहे जन-आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल भारी हिंसा और दमन का सहारा ले रहे हैं। मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ PoJK' (HRC-PoJK) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आंदोलन में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल और पत्रकारों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली वैश्विक संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ Asia) ने कड़ा बयान जारी कर पाकिस्तानी अधिकारियों की इस बर्बर कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है।

अब तक 80 लोगों की मौत

PoJK में महंगाई, बिजली बिलों, भारी करों और कश्मीरी युवाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भड़की विरोध की आग अब पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। HRC-PoJK की रिपोर्ट के अनुसार, 27 जुलाई से पहले हिंसा में 33 नागरिकों की जान गई थी। लेकिन 27 जुलाई के बाद रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा और यह संख्या 80 तक पहुंच गई है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल का हमला

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि रावलकोट से आ रही रिपोर्टें सुरक्षा बलों द्वारा गैर-कानूनी बल प्रयोग के लंबे इतिहास को दोहराती हैं। एमनेस्टी ने सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी और हिंसा की तत्काल एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बाहरी जांच कराने की मांग की है। पत्रकारों की जबरन गुमशुदगी और इस्लामाबाद से अपहरणपत्रकारों की सुरक्षा पर काम करने वाली संस्था CPJ ने अलर्ट जारी करते हुए बताया कि PoJK में जमीनी हकीकत दिखाने वाले पत्रकारों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। स्वतंत्र पत्रकार रजी ताहिर और उनके सहयोगी मोहम्मद सैफ 1 अगस्त से रहस्यमय तरीके से गायब हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस की वर्दी में आए अज्ञात लोग इस्लामाबाद स्थित उनके दफ्तर से ही उन्हें उठाकर ले गए। कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम को भी 1 अगस्त को इस्लामाबाद से हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

CPJ का अल्टीमेटम

CPJ ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि वह तुरंत स्वीकार करे कि रजी ताहिर और मोहम्मद सैफ उसकी हिरासत में हैं या नहीं, और बिना शर्त उन्हें रिहा किया जाए। 5 जून से जारी है इंटरनेट और संचार ब्लैकआउट पाकिस्तान प्रशासन ने PoJK में सच को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर सूचना का गला घोंट दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, PoJK में 5 जून से ही आंशिक इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है।

एमनेस्टी की चेतावनी

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि जब तक इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद रहेंगी, तब तक जमीनी स्तर पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों का सही दायरा और आंकड़े जुटाना नामुमकिन होगा। सरकार को तुरंत सभी संचार सेवाएं बहाल करनी चाहिए और स्वतंत्र प्रेक्षकों तथा अंतरराष्ट्रीय मीडिया को इलाके में जाने की अनुमति देनी चाहिए।

अल जजीरा पर प्रतिबंध

पाकिस्तानी शासन की यह पाबंदी केवल स्थानीय मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का मुंह भी बंद करने की कोशिश की जा रही है। 1 अगस्त को PoJK से जमीनी रिपोर्टिंग करने के बाद अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'अल जजीरा' की पहुंच पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लगा दिया गया है। पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अल जजीरा पर "पीत पत्रकारिता" और देश के खिलाफ गलत प्रचार करने का आरोप लगाते हुए उसकी रिपोर्टिंग को रोकने का प्रयास किया।

क्या हैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मुख्य मांगें?

रावलकोट और अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों पर हुई अंधाधुंध हिंसा और हत्याओं की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराई जाए। PoJK में जून से ठप पड़े टेलीकॉम और इंटरनेट नेटवर्क को तुरंत चालू किया जाए ताकि मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच हो सके। हिरासत में लिए गए या गायब किए गए पत्रकारों की स्थिति स्पष्ट की जाए और उन्हें रिहा किया जाए। विदेशी मीडिया, अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षकों और स्थानीय पत्रकारों को बिना किसी डर के क्षेत्र में जाने और रिपोर्टिंग करने की इजाजत दी जाए।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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