Science News: जनवरी 2022 में दक्षिण प्रशांत महासागर के भीतर जब हंगा टोंगा-हंगा हापाई (Hunga Tonga-Hunga Ha'apai) ज्वालामुखी फटा, तो वह आधुनिक इतिहास के सबसे विनाशकारी विस्फोटों में से एक था। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच एक ऐसी अप्रत्याशित और अनोखी घटना घटी, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
हालिया वैज्ञानिक शोध में यह खुलासा हुआ है कि इस ज्वालामुखी से निकले विशाल गुबार ने अपनी ही पैदा की हुई मीथेन गैस (Methane) का एक बड़ा हिस्सा खुद ही नष्ट कर दिया। नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) पत्रिका में प्रकाशित यह स्टडी ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से निपटने के तरीकों को हमेशा के लिए बदल सकती है।
सैटेलाइट को मिला एक अजीब 'केमिकल फिंगरप्रिंट'
इस अनोखी घटना का पता यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-5P सैटेलाइट में लगे TROPOMI इंस्ट्रूमेंट के जरिए चला। जब वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी के बादलों के सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया, तो उन्हें स्ट्रेटोस्फेयर यानी समताप मंडल में फॉर्मलडिहाइड (Formaldehyde) गैस का रिकॉर्ड-तोड़ स्तर दिखाई दिया।
बता दें कि जब हवा में मीथेन गैस टूटती या नष्ट होती है, तो बहुत कम समय के लिए फॉर्मलडिहाइड का निर्माण होता है। इस गैस का जीवनकाल केवल कुछ घंटों का होता है। लेकिन सैटेलाइट ने इस धुएं के गुबार को 10 दिनों तक ट्रैक किया, जो दक्षिण अमेरिका तक पहुंच गया था। इतने दिनों तक फॉर्मलडिहाइड का बना रहना इस बात का पक्का सबूत था कि ज्वालामुखी के बादल लगातार मीथेन को नष्ट कर रहे थे।
शोध के मुख्य लेखक डॉ. मार्टिन वान हर्पेन (Dr. Maarten van Herpen) बताते हैं कि "हम यह जानते थे कि ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान मीथेन गैस छोड़ते हैं, लेकिन यह पहली बार पता चला है कि ज्वालामुखी की राख इस प्रदूषण को खुद ही साफ करने की क्षमता भी रखती है।"
20 लाख गायों के बराबर बनी और नष्ट हुई मीथेन
वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार, हंगा टोंगा विस्फोट के दौरान लगभग 300 गीगाग्राम (Gg) मीथेन वातावरण में छोड़ी गई थी। यह मात्रा एक साल में 20 लाख से अधिक गायों द्वारा छोड़ी जाने वाली मीथेन के बराबर है। लेकिन कमाल की बात यह रही कि ज्वालामुखी के बादलों ने रोजाना लगभग 900 मेगाग्राम (Mg) मीथेन को लगातार नष्ट भी किया, यह मात्रा भी हर दिन 20 लाख गायों के उत्सर्जन के बराबर है।
नमक, धूप और ज्वालामुखी की राख का जादुई केमिकल
आखिर समुद्र की गहराइयों में फटे इस ज्वालामुखी ने हवा में मीथेन को कैसे नष्ट किया? इसके पीछे रसायन विज्ञान का एक अनोखा तंत्र काम कर रहा था और वह है समुद्री पानी और राख का मेल। चूंकि यह ज्वालामुखी समुद्र के अंदर फटा था, इसने लाखों टन खारा पानी और राख को आसमान में उछाल दिया, जो ट्रोपोस्फीयर को पार कर स्ट्रैटोस्फीयर तक पहुंच गया। पानी का नमक और खनिज राख मिलकर हवा में बारीक कण (Aerosols) बन गए। जब सूरज की किरणें इन कणों पर पड़ीं, तो इनमें से अत्यधिक सक्रिय एटम्स परमाणु मुक्त हुए। इस क्लोरीन ने वातावरण में मौजूद मीथेन के अणुओं पर हमला कर उन्हें तोड़ना शुरू कर दिया।
दोनों खोजों से जुड़े कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मैथ्यू जॉनसन बताते हैं कि यह प्रतिक्रिया पहले सहारा रेगिस्तान की धूल और महासागरों के नमकीन कणों में देखी गई थी, लेकिन समताप मंडल की विपरीत परिस्थितियों में ऐसा होना बेहद चौंकाने वाला है।
मीथेन को नष्ट करना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ग्लोबल वार्मिंग और पृथ्वी के बढ़ते तापमान में मीथेन का योगदान करीब एक-तिहाई है। हालांकि यह कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में हवा में कम समय (लगभग 10 साल) तक रहती है, लेकिन यह 20 साल की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड से 80 गुना अधिक गर्मी सोखती है। इसलिए, मीथेन में कटौती को क्लाइमेट चेंज पर 'इमरजेंसी ब्रेक' कहा जाता है। अगर हम मीथेन का स्तर तेजी से कम कर दें, तो इसका सकारात्मक असर अगले एक दशक के भीतर ही दिखाई देने लगेगा।
क्या इंसान भी कुदरत के इस तरीके की नकल कर सकते हैं?
हंगा टोंगा की इस घटना ने वैज्ञानिकों और कंपनियों को 'एटमॉस्फेरिक मीथेन रिमूवल' (Atmospheric Methane Removal) की दिशा में एक नया विचार दिया है। यानी सिर्फ नई मीथेन गैस को निकलने से रोकना ही नहीं, बल्कि जो मीथेन हवा में पहले से मौजूद है, उसे रसायन विज्ञान की मदद से तेजी से खत्म करना।हालांकि, चुनौती यह साबित करने की थी कि क्या हवा से मीथेन के खत्म होने को मापा भी जा सकता है? रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान के डॉ. जोस डी लाट कहते हैं कि हम इस समस्या का समाधान इस शोध से देते हैं, हमने सैटेलाइट के जरिए यह साबित कर दिखाया कि हवा में मीथेन के टूटने की प्रक्रिया को स्पेस से ट्रैक किया जा सकता है।" इसके अलावा, वैश्विक मीथेन बजट के आंकड़ों में अब तक धूल और राख के इस प्रभाव को शामिल नहीं किया गया था, जिसे अब वैज्ञानिकों को अपडेट करना पड़ेगा।