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Jugaad Video: ट्रेन की सीट को महिला ने बना दिया स्लीपिंग केबिन, जुगाड़ देख रेलवे वाले भी दंग रह जाएंगे

लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा में सीट को स्लीपिंग केबिन बनाने का एक मजेदार जुगाड़ वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला ने चादर का इस्तेमाल करके अपनी सीट को प्राइवेट बना लिया, जिससे यात्रियों को रात में सुकून भरी नींद मिल सके।

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ट्रेन सीट को स्लीपिंग केबिन में कर दिया तब्दील (Instagram)

KEY HIGHLIGHTS
  • सीट को स्लीपिंग केबिन में कर दिया तब्दील
  • स्लीपिंग केबिन बनाने का एक मजेदार जुगाड़
  • जमकर वायरल हो रहा ये वीडियो

Train Seat Convert Into Sleeping Cabin: आज भी लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन हमारी पहली पसंद बनी हुई है, आखिर जेब पर हल्की और पहुंचने में सुगम जो ठहरी! मगर जनाब, सीट का हाल ऐसा होता है कि लगता है किसी तपती हुई बेंच पर बिठा दिया हो। प्राइवेट केबिन की तो बात ही छोड़ दीजिए, वो तो अमीरों के चोंचले हैं। ऐसे में हम इंडियंस कहां मानने वाले, जुगाड़ तो हमारे खून में है!

इन दिनों इंटरनेट पर एक ऐसा ही 'जुगाड़ू' वीडियो वायरल हो रहा है। एक महिला ने तो कमाल ही कर दिया! उसने ट्रेन की मामूली सी चादर को पकड़ा और अपनी निचली सीट को पल भर में स्लीपिंग केबिन बना डाला। एक सिरा सीढ़ी पर बांधा, दूसरा ऊपर के पट्टे पर कसा और बस! बन गया चलता-फिरता प्राइवेट कमरा। अब आराम से खर्राटे लीजिए, कौन झांक रहा है, इसकी चिंता भी गई तेल लेने! रात की नींद तो सुकून भरी होनी चाहिए, आखिर कौन जाने कौन किस 'नजर' से देख रहा हो, है ना?

ट्रेन सीट को स्लीपिंग केबिन में कर दिया तब्दील

यह वीडियो इंस्टा पर 'dikshu_desle' नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, और इसे देखने वालों की गिनती हजारों में पहुंच चुकी है। लोग कह रहे हैं, "वाह! क्या আইডিয়া है!" और हो भी क्यों न, भारतीय रेलवे में सफर करने वालों के लिए यह किसी 'रामबाण' से कम नहीं। अब बस इंतजार है कि कब रेलवे वाले इस 'आविष्कार' को देखकर अपनी सीटों में कुछ सुधार करते हैं!

Kishan Gupta
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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