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खाना तो दूर लहसुन-प्याज का नाम सुनते ही कांप जाती है यहां के लोगों की रूह, खरीदते ही घटती है अनहोनी!

  • Authored by: आदित्य साहू
  • Updated Jan 23, 2023, 07:28 PM IST

Superstition about Garlic Onion: जहानाबाद जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर स्थित इस पूरे गांव में कोई भी इंसान लहसुन-प्याज नहीं खाता है। 30-35 घरों की बस्ती वाला यह गांव लहसुन-प्याज से कोसों दूर है। यहां तक कि इस गांव के लोगों के लिए लहसुन-प्याज बाजार से भी लाना मना है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोशल मीडिया)

KEY HIGHLIGHTS
  • बिहार में स्थित है अनोखा गांव
  • लहसुन-प्याज से दूर रहते हैं लोग
  • बाजार से भी नहीं लाते लहसुन-प्याज

Superstition about Garlic Onion: बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें बिना लहसुन-प्याज के खाना अच्छा नहीं लगता है। हालांंकि, कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो लहसुन-प्याज नहीं खाते हैं। सब्जी में अगर लहसुन-प्याज ना हो तो खाना सच में बेस्वाद ही बनता है। वहीं, कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें सलाद में भी प्याज चाहिए होता है। इसके बिना उनका खाना कंप्लीट नहीं होता है। दूसरी तरफ देश में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग लहसुन-प्याज का नाम सुनकर ही कांपने लगते हैं।

30-35 घरों वाला गांंव

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गांव के लोग प्याज खाना तो दूर इसे बाजार से भी खरीदकर नहीं लाते हैं। यह अनोखा गांव बिहार राज्य में है। बिहार के जहानाबाद जिले की चिरी पंचायत में स्थित त्रिलोकी बिगहा गांव के लोग लहसुन-प्याज का नाम लेने से भी डरते हैं। जहानाबाद जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर स्थित इस पूरे गांव में कोई भी इंसान लहसुन-प्याज नहीं खाता है। 30-35 घरों की बस्ती वाला यह गांव लहसुन-प्याज से कोसों दूर है। यहां तक कि इस गांव के लोगों के लिए लहसुन-प्याज बाजार से भी लाना मना है।

ये है वजह

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों से गांव के लोग लहसुन-प्याज नहीं खाते हैं। उनके पूर्वज भी लहसुन-प्याज से पूरी तरह दूर थे। बुजुर्ग बताते हैं कि गांव के ठाकुरबाड़ी मंदिर की वजह से उनके पुरखों ने लहसुन-प्याज खाना बंद कर दिया था। वहीं, 40-45 साल पहले किसी ने लहसुन-प्याज न खाने की परंपरा को तोड़ने की कोशिश की थी, तो उस परिवार के साथ बड़ी अनहोनी घट गई थी। इसके बाद से हर कोई बाजार से लहसुन-प्याज लाने से घबराते हैं। कोई भी लहसुन-प्याज खाने की हिम्मत नहीं करता। गांव के लोग सिर्फ लहसुन-प्याज ही नहीं बल्कि मांस-मदिरा से भी पूरी तरह दूर हैं।

आदित्य साहू
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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