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Ajab Gajab: न्यूयॉर्क में शुरू हुआ Panic Rooms का ट्रेंड, आखिर क्यों अपने घरों में बना रहे लोग? जानें

न्यूयॉर्क में इन दिनों पैनिक रूम्स का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर ये पैनिक रूम्स क्या है और इसका क्या मतलब है?

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न्यूयॉर्क में पैनिक रूम्स का बढ़ा ट्रेंड (Photo Credit - iStock)

Panic Rooms In New York: आजकल सोशल मीडिया पर ऑफिस के पैनिक रूम्स काफी वायरल हो रहे हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा स्थान या एक प्लेस ऑफिस के अंदर जरूर होना चाहिए। जहां जाकर इंसान अपना वर्क प्रेशर या फ्रस्ट्रेशन निकाल सके। इन दिनों न्यूयॉर्क में ये एक ट्रेंड बन गया है। लोग अपने घरों में पैनिक रूम्स बनवा रहे हैं और बुलेट प्रूफ दरवाजों से अपने घरों को सुरक्षित भी करवा रहे हैं। अपराध, इमिग्रेशन और राष्ट्रीय अस्थिरता की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए यहां के लोग इस ओर रूख करने पर मजबूर हैं।

आपको लगता होगा कि केवल मिलेनियर्स ही ऐसा कर रहे हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस ट्रेंड को समाज का हर वर्ग फॉलो कर रहा है और अपने घर को सेफ करने जुटा हुआ है। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क पोस्ट में छपी खबर के मुताबिक, इसमें मिडिल क्लास फैमिली भी शामिल हैं, जो अपने घर में पैनिक रूम्स बनवा रहे हैं और बुलेट प्रूफ दरवाजे-खिड़कियां भी लगवा रहे हैं। सुरक्षा को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।

न्यूयॉर्क में पैनिक रूम्स का बढ़ा ट्रेंड

पिछले साल न्यूयॉर्क में 28000 के करीब हमले हुए थे, जिससे लोगों को सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। ऐसे में समाज की अस्थिरता को देखते हुए यहां के लोग ऐसा करने पर मजबूर हैं। यह मुश्किलें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद से काफी बढ़ी हैं। इससे परेशान होकर लोग न सिर्फ पैनिक रूम्स बनवा रहे हैं बल्कि सीक्रेट रूम्स भी बनवा रहे हैं। इस लिस्ट मशहूर सेलिब्रिटीज, पॉलिटिशियंस और आम जनता सभी शामिल हैं।

Kishan Gupta
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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