भारतीय सेना सिर्फ देश की सुरक्षा ही नहीं करती, बल्कि कई बार ऐसे काम भी करती है जो लोगों को हैरानी में डाल देते हैं। हाल में एक ऐसा ही नमूना सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। जहां भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में बने एक पुराने और बेकार पुल को अपनी क्रिएटिविटी से बेहद ही खूबसूरत कैफे में बदल दिया।

नदी के ऊपर बना है बॉर्डर ब्रियू कैफे (X/@flyingpebbles)
भारतीय सेना ने प्रकृति की गोद में बनाया शानदार कैफे
इस कैफे को घूमने आई एक महिला ने इसका वीडियो अपने एक्स अकाउंट से शेयर किया है। जहां महिला ने इस कैफे की खूबसूरती को दिखाते हुए इसके बारे में कई गजब की बातें बताईं। महिला ने वीडियो में बताया कि इस कैफे का नाम बॉर्डर ब्रू कैफे है। जो कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के जेमिथांग इलाके में स्थित है। महिला ने वीडियो में आगे यह भी बताया कि यहां पहले एक बेली ब्रिज हुआ करता था, जो बेकार जंग खा रहा था। इस ब्रिज का कोई इस्तेमाल नहीं था। बाद में इस ब्रीज को भारतीय सेना ने सिर्फ 31 दिनों के अंदर एक शानदार कैफे में बदल डाला।
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फाइव स्टार कैफे के मजे भूल जाएंगे यहां
वीडियो में कैफे की खूबसूरती को देख आपको भी ऐसा लगेगा जैसे कि आप विदेश में किसी फाइव स्टार कैफे में बैठे हों। भारतीय सेना की इस क्रिएटिविटी को देख आप भी यह कहेंगे कि दुनिया ने अब तक हमारी सेना का अदम्य साहस देखा है लेकिन अब वह उनकी क्रिएटिविटी भी देख ले जो कि नेक्स्ट लेवल की है। इस कैफे की सबसे खास बात यह है कि यह कैफे न्गमजंग चू (Ngamjang Chu) नदी के ऊपर बना हुआ है और यहां बैठकर लोग चाय या कॉफी पीते हुए नीचे बहती नदी और आसपास के खूबसूरत पहाड़ों का नजारा का आनंद ले सकते हैं।कांच की दीवारों से दिखता है शानदार नजारा
सेना ने इस कैफे को कुछ इस तरह से डिजाइन किया है कि यहां बैठने वाले लोगों को चारों तरफ का प्रकृति का अद्भुत नजारा साफ दिखाई दे रहा है। कैफे में बड़े-बड़े कांच के पैनल लगाए गए हैं, जिससे बाहर के पहाड़, बादल और नदी का नजारा और भी शानदार लग रहा है। इस नजारे को देखने पर ऐसा लगता है जैसे कॉफी पीते समय आपके पैरों के नीचे नदी बह रही हो। इस तरह का कैफे शायद ही दुनिया में आपको कहीं पर देखने को मिलेगा।
स्थानीय मोनपा समुदाय की महिलाएं चलाती हैं यह कैफे (X/@flyingpebbles)
स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार
इस कैफे की एक और खास बात यह है कि इसे स्थानीय मोनपा समुदाय की महिलाएं चलाती हैं। इससे उन्हें रोजगार भी मिल रहा है और इलाके में पर्यटन को भी बढ़ावा भी। बता दें कि, भारतीय सेना ने इस कैफे को ऑपरेशन सद्भावना के तहत बनाया है, जिसका मकसद सीमावर्ती इलाकों में विकास और स्थानीय लोगों की मदद करना है।डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
