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ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिडटर्म चुनाव से पहले मेल वोटिंग प्रतिबंध लागू करने का रास्ता साफ

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले मेल वोटिंग को लेकर ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप के मेल बैलेट पर प्रतिबंध वाले आदेश को लागू करने का रास्ता खुला है। हालांकि, कोर्ट ने आदेश की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया।

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अमेरिका में मेल वोटिंग पर ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत (सांकेतिक फोटो)

अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले मेल के जरिए मतदान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के फैसले से ट्रंप के उस आदेश को लागू करने का रास्ता खुल गया है, जिसमें मेल वोटिंग पर नए प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि ट्रंप का आदेश कानूनी तौर पर सही है या नहीं।

राज्यों की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट के कंजर्वेटिव बहुमत वाले जजों ने कहा कि जिन राज्यों ने याचिका दायर की थी, वे यह साबित नहीं कर पाए कि उन्हें इस आदेश से अभी कोई सीधा नुकसान हुआ है, क्योंकि इसे अभी पूरी तरह लागू नहीं किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से उठाया गया हर कदम कानूनी ही होगा। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि सरकार इस आदेश को लागू करने के लिए जो भी कदम उठाएगी, उसकी वैधता पर आगे फैसला हो सकता है। तीन उदारवादी (Liberal) जजों ने इस फैसले पर कड़ी असहमति जताई। जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने इसे चुनाव से जुड़े मामलों में पहले से चली आ रही जटिलताओं को और बढ़ाने वाला फैसला बताया।

ट्रंप का आदेश क्या कहता है?

ट्रंप ने मार्च में एक कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसमें प्रशासन को मेल से वोट डालने वाले पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करने और अमेरिकी डाक सेवा को केवल सूची में शामिल लोगों तक मेल बैलेट पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया था। नई व्यवस्था के तहत उन राज्यों से मेल बैलेट भेजने पर भी रोक लग सकती है, जो ट्रंप के आदेश का पालन नहीं करते। ट्रंप लंबे समय से मेल वोटिंग पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका दावा है कि इससे चुनाव में धोखाधड़ी की संभावना बढ़ती है। हालांकि, बड़े पैमाने पर मेल वोटिंग में धोखाधड़ी के उनके दावों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

23 राज्यों ने किया था विरोध

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 23 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी ने ट्रंप के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था। उनका कहना था कि चुनाव कराने और उसके नियम तय करने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों और कांग्रेस के पास है। उनका तर्क था कि चुनाव से ठीक पहले नियमों में बड़े बदलाव करने से मतदान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कुछ निचली अदालतों ने ट्रंप के आदेश पर रोक लगाई है, जबकि दूसरी अदालतों ने इसे लागू करने का रास्ता खुला रखा है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना है।

चुनाव से कुछ हफ्ते पहले बढ़ी चिंता

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव तेजी से करीब आ रहे हैं। कुछ राज्यों में सितंबर की शुरुआत से ही विदेश में रहने वाले और सैन्य मतदाताओं को बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में मेल वोटिंग के नियमों में बड़े बदलाव चुनाव अधिकारियों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। डेमोक्रेट नेताओं ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन नए नियमों के जरिए लोगों के लिए मतदान को मुश्किल बनाना चाहता है। वहीं ट्रंप प्रशासन इसे चुनाव की पारदर्शिता और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

मेल वोटिंग अमेरिका में लगातार लोकप्रिय हुई है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 30 फीसदी वोट मेल बैलेट के जरिए डाले गए थे। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले नियमों में बदलाव का असर बड़ी संख्या में मतदाताओं पर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को आगे बढ़ने का रास्ता तो मिला है, लेकिन मेल वोटिंग पर अंतिम कानूनी फैसला अभी बाकी है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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