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मंदिर है या घूमने की जगह, चढ़ाया जाता है एयरोप्लेन, दिलचस्प है कारण...

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 10, 2023, 12:28 PM IST

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके बारे में सुनने के बाद आप बिना गए रह ही नहीं सकते। वीजा मंदिर भी इसी में से एक है। यह मंदिर आंध्रप्रदेश में स्थित है, जहां भक्तों की काफी भीड़ होती है।

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वीजा वाला मंदिर (फोटो साभारः iStock)

KEY HIGHLIGHTS
  • आंध्र प्रदेश में स्थित है एयरोप्लेन वाला मंदिर
  • नाम है चिल्कुर बालाजी का मंदिर
  • दर्शन करने से मिल जाता है वीजा

About Visa Temple: भारत में कई ऐसे मंदिर है, जो अपनी रोचकताओं के लिए जाना जाता है। इन सभी मंदिरों का अपना एक अनोखापन है। ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में सुनकर आप चौंक जाएंगे। यह मंदिर आम मंदिरों की तरह बिल्कुल भी नहीं है। यहां ना ही फूल चढ़ाए जाते हैं और ना ही प्रसाद में लड्डू या पेड़ा। यहां जो चीज चढ़ाई जाती है, उसके बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे और इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाली इसके पीछे का कारण है।

वीजा वाला मंदिर

आंध्रप्रदेश के हैदराबाद से करीब 40 किमी की दूरी पर स्थित ओसमान सागर लेक है, जिसके तट पर एक मंदिर है। इस मंदिर का नाम चिल्कुर बालाजी है। इस मंदिर को भक्त वीजा मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं। जी हां, वीजा वाला मंदिर। दरअसल, इस मंदिर में वे भक्त आते हैं, जिन्हें विदेश जाना होता है, या तो पढ़ाई करने या तो नौकरी करने। नहीं समझें, कोई बात नहीं, हम बताते हैं। अगर किसी को भी विदेश का वीजा नहीं मिल पा रहा होता है और जाने की इमरजेंसी होती है तो वह इस मंदिर में दर्शन करने आता है। लेकिन माला-फूल या प्रसाद लेकर नहीं, बल्कि एयरोप्लेन लेकर आता है और वीजा पाने की कामना करता है।

Chilkur Balaji Temple

चिल्कुर बालाजी मंदिर, हैदराबाद (फोटो साभारः iStock)

मांगी गई मन्नत कभी खाली नही जाती

करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में भक्तों की पुकार भी सुन ली जाती है और भगवान चिल्कुर बालाजी उन्हें आशीर्वाद स्वरूप वीजा दिलवा देते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में आने वाले सभी भक्तों की पुकार सुनी जाती है। ऐसे में अगर आपको भी वीजा नहीं मिल पा रहा है तो आप इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जा सकते हैं और वीजा पाने के लिए मन्नत मांग सकते हैं। मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि 11 परिक्रमा कर मांगी गई मन्नत कभी खाली नही जाती और जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो भक्त यहां आकर 108 बार मंदिर का परिक्रमा करते है।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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