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पानी नहीं जहर! यहां मछलियां भी सोचकर जाती हैं, समुद्र की वो जगह जहां सेकंडों में खत्म हो जाती है जिंदगी

ब्राइन पूल समुद्र के अंदर बनी ऐसी झीलें होती हैं जिनका पानी बहुत ज्यादा खारा और बिना ऑक्सीजन का होता है। इनमें जाने वाला ज्यादातर समुद्री जीव कुछ ही सेकंड में बेहोश या मर जाता है, इसलिए इन्हें "समुद्र की मृत्यु की झील" कहा जाता है। हालांकि यहां खास सूक्ष्म जीव रहते हैं, जिनसे वैज्ञानिक जीवन की शुरुआत और नई दवाओं के रहस्य समझने की कोशिश कर रहे हैं।

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समुद्र की वो जगह जहां सेकंडों में खत्म हो जाती है जिंदगी (फोटो: iStock)

समुद्र की गहराइयों में कुछ ऐसी जगहें होती हैं, जहां पहुंचते ही जिंदगी थम जाती है। इन्हें ही ब्राइन पूल कहा जाता है, जिन्हें लोग “समुद्र की मृत्यु की झील” भी कहते हैं। ये समुद्र के अंदर बनी ऐसी झीलें होती हैं जिनका पानी इतना ज्यादा खारा और जहरीला होता है कि वहां जाने वाला ज्यादातर समुद्री जीव कुछ ही सेकंड में मर जाता है। ब्राइन पूल तब बनते हैं जब बहुत ज्यादा नमक वाला पानी समुद्र तल के गड्ढों में जमा हो जाता है।

यह पानी सामान्य समुद्री पानी से भारी होता है, इसलिए ऊपर नहीं मिलता और अलग झील की तरह जमा रहता है। इनमें मौजूद नमक की मात्रा सामान्य समुद्र से 3 से 8 गुना तक ज्यादा होती है। इसके अलावा इनमें लगभग ऑक्सीजन नहीं होती। इसी वजह से ये पानी और आसपास के समुद्र के बीच साफ-साफ एक सीमा बन जाती है, जैसे पानी के नीचे कोई झील की सतह हो।

ऑक्सीजन नहीं मिलने से रुक जाती हैं सांसें

जब कोई मछली, केकड़ा या दूसरा जीव गलती से इस सीमा को पार कर लेता है, तो उसके शरीर पर तुरंत असर पड़ता है। ज्यादा नमक की वजह से उसके शरीर की कोशिकाओं से पानी बाहर निकलने लगता है और ऑक्सीजन न मिलने से सांस रुक जाती है। कई बार कुछ ही पलों में जीव सुन्न हो जाता है या मर जाता है। इसी कारण ब्राइन पूलों के नीचे मरे हुए जीवों के ढेर दिखाई देते हैं, जिसे वैज्ञानिक “पानी के नीचे कब्रिस्तान” कहते हैं।

हालांकि कुछ चालाक शिकारी इस खतरे का फायदा उठाते हैं। जैसे झींगे और कुछ मछलियां ब्राइन पूल की सीमा पर इंतजार करती हैं। जब कोई जीव अंदर जाकर कमजोर होकर बाहर निकलता है, तो ये शिकारी उसे पकड़ लेते हैं। यानी ब्राइन पूल उनके लिए एक प्राकृतिक जाल बन जाता है। भले ही बड़े जीव यहां नहीं टिक पाते, लेकिन ब्राइन पूल पूरी तरह खाली नहीं होते। यहां खास तरह के सूक्ष्म जीव यानी बैक्टीरिया और आर्किया रहते हैं, जिन्हें एक्सट्रीमोफाइल कहा जाता है।

बैक्टीरिया और कैंसर से लड़ने की ताकत

ये जीव बिना ऑक्सीजन और धूप के भी जिंदा रहते हैं और रसायनों से ऊर्जा बनाते हैं। ये मोटी परत बनाकर पूल के किनारों पर रहते हैं और बाकी जीवों के लिए भोजन का आधार बनते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे ही हालातों में करोड़ों साल पहले धरती पर जीवन की शुरुआत हुई थी। इसलिए ब्राइन पूल का अध्ययन करके यह समझा जा सकता है कि जीवन कैसे पैदा हुआ और दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना कैसी हो सकती है। इतना ही नहीं, इन सूक्ष्म जीवों से ऐसी दवाइयों के तत्व भी मिले हैं जिनमें बैक्टीरिया और कैंसर से लड़ने की ताकत हो सकती है।

दुनिया में ब्राइन पूल बहुत कम जगहों पर मिलते हैं। मेक्सिको की खाड़ी, भूमध्य सागर और सबसे ज्यादा लाल सागर में। लाल सागर में अब तक करीब 25 ब्राइन पूल खोजे जा चुके हैं। इनमें से एक खास खोज NEOM ब्राइन पूल की है, जो सऊदी अरब के तट से सिर्फ दो किलोमीटर दूर और करीब 1,770 मीटर गहराई में मिला। यह खोज ओशनएक्स के अभियान में हुई थी।

ब्राइन पूलों की एक और खासियत है कि यहां की मिट्टी की परतें हजारों साल तक सुरक्षित रहती हैं, क्योंकि वहां कीड़े-मकोड़े नहीं रहते जो मिट्टी को हिला सकें। इससे वैज्ञानिकों को पुराने भूकंप, बाढ़ और सुनामी तक का रिकॉर्ड मिल जाता है। इसे प्राकृतिक टाइम कैप्सूल भी कहा जाता है।

कुल मिलाकर, ब्राइन पूल समुद्र की सबसे खतरनाक लेकिन सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक हैं, जहां मौत भी है और जीवन के सबसे पुराने राज भी छिपे हैं।

monu jha
मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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