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Ajab Gajab: सोने-चांदी से भी महंगी है इस जीव की उल्टी, जिसे मिलता है बदल जाती है किस्मत, जानें पूरा मामला

Ajab Gajab: इस दुनिया में एक से एक अनोखी चीजें मिलती हैं। कुछ चीजें तो बेशकीमती होती हैं, जिनके बारे में जानकर लोग दंग रह जाते हैं। वेल की उल्टी भी काफी महंगी बिकती है।

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बेशकीमती है वेल की उल्टी (तस्वीर साभार- @Istock)

Ajab Gajab: इस धरती पर एक से एक अनोखी चीजें मिलती हैं। समय-समय पर कई चौंकाने वाले खुलासे भी होते रहते हैं। कुछ चीजें तो ऐसी भी होती हैं, जिनके बारे में जानकर दुनिया दंग रह जाता है। जबकि, कुछ पर तो लोगों को यकीन तक करना मुश्किल हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मामले से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। क्योंकि, ये चीज काफी घिनौनी है, लेकिन उसकी कीमत सोने-चादी से भी ज्यादा है। सुनकर भले ही आपको यकीन करना मुश्किल हो रहा होगा, लेकिन यह सच है।

दुनियाभर में कई बेशकीमती चीजें पाई जाती हैं। कुछ चीजें जमीन पर होती हैं, तो कुछ पानी के अंदर। कुछ के बारे में आप जानते होंगे, जबकि कइयों से अब तक अनजान होंगे। लेकिन, समुद्र के अंदर एक ऐसी घिनौनी चीज मिलती है, जिसकी कीमत काफी ज्यादा है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये घिनौनी चीज क्या है? तो हम आपको बता दें कि व्हेल (whale vomit) मछली की उल्टी की कीमत सोने चांदी से भी ज्यादा है। इसे वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रिस कहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी बाजार में इसकी कीमत लाख-करोड़ों तक पहुंच जाती है। इतना ही नहीं इस उल्टी का एक टुकड़ा जिसे भी मिल जाए उसकी किस्मत रातोंरात बदल सकती है और वो करोड़पति भी बन सकता है। गौलतलब है कि परफ्यूम इंडस्ट्री में इसकी भारी डिमांड है। तभी तो इसे समुद्री खजाना या फिर फ्लोटिंग गोल्ड कहते हैं।

ajab gajab whale vomit

सोने-चादी से भी महंगी है ये उल्टी (तस्वीर साभार- @istock)

रातोंरात बदल सकती है किस्मत

यह स्पर्म व्हेल के पेट में बनने वाला एक मोम जैसा पदार्थ है। व्हेल इसे उल्टी या मल के रूप में बाहर निकाल देती है। शुरुआत में तो इससे काफी बदबू निकलता है। लेकिन, कुछ दिनों बाद इससे खुशबू आने लगती है। यही कारण है कि लग्जरी परफ्यूम बनाने वाली कंपनियां इसे फिक्सेटिव के तौर पर इस्तेमाल करती है। यहां आपको बता दें कि एक ग्राम एम्बरग्रिस 30-40 डॉलर में बिकता है जबकि अच्छी क्वालिटी का तो 100 डॉलर प्रति ग्राम तक मिल जाता है। लेकिन, यह आसानी से किसी को नहीं मिलता है। स्पर्म व्हेल में भी सिर्फ 1 फीसदी मामलों में ही यह बनती है। कई मछुआरों की इसके जरिए किस्मत बदली है और इसे लेकर कई खबरें भी सामने आ चुकी हैं।

Kaushlendra Pathak
कौशलेंद्र पाठकauthor

कौशलेंद्र पाठक टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कार्यरत हैं। मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उनका सफर ग्राउंड रिपोर्टिंग से डिजिटल डेस्क तक फैला, जहां उन्होंने कंटेंट की विविध शैलियों को नजदीक से समझा। अजब-गजब, अनोखी, सोशल और ट्रेंडिंग कंटेंट पर उनकी गहरी पकड़ और तेज न्यूज सेंस ने उन्हें डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कौशलेंद्र का ध्यान हमेशा ऐसे कंटेंट पर रहता है जो रीडर्स को नई, दिलचस्प और अनजानी कहानियों से रूबरू कराए—हर बार कुछ अलग, कुछ नया।

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