Tax On Life Insurance policy Maturity Money: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10 के खंड (10डी) के तहत नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। आईटी अधिनियम की धारा 10 के खंड 10 (डी) के तहत जीवन बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त किसी भी राशि पर टैक्स छूट मिलती है। इसमें ऐसी पॉलिसी पर बोनस के रूप में मिला पैसा भी शामिल होता है। हालाँकि इस छूट में कुछ अपवाद भी शामिल हैं। मगर नये दिशानिर्देशों के तहत 1 अप्रैल, 2023 को या उसके बाद खरीदी गई जीवन बीमा पॉलिसियों पर मिलने वाली मैच्योरिटी राशि पूरी तरह से टैक्स फ्री नहीं होगी।
5 लाख रु की लिमिट होगी अहम
ये नए दिशानिर्देश बजट 2023 के बाद जारी किए गए हैं, जिनके तहत एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख रुपये से अधिक का प्रीमियम होने पर जीवन बीमा मैच्योरिटी राशि टैक्सेबल बन गई है। ये दिशानिर्देश यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसियों (ULIP) को छोड़कर सभी जीवन बीमा पॉलिसियों पर लागू होंगे।
यह ध्यान रखना अहम है कि 1 फरवरी, 2022 से यूलिप से प्राप्त आय तब टैक्सेबल होगी, यदि भुगतान किया गया प्रीमियम एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख रुपये से अधिक हो।
प्रीमियम 5 लाख रु से अधिक हो तो क्या होगा
यदि पॉलिसी अवधि के सभी वर्षों में भुगतान किया गया प्रीमियम 5 लाख रुपये से अधिक है तो जीवन बीमा पॉलिसी से प्राप्त इनकम टैक्सेबल होगी।
एक से अधिक पॉलिसी पर क्या नियम लगेगा
यदि आपने एक से अधिक पॉलिसी ली हैं और सभी पॉलिसियों का प्रीमियम उन सभी की अवधि के दौरान मिलाकर 5 लाख रुपये से अधिक है, तो जीवन बीमा पॉलिसियों से प्राप्त इनकम टैक्सेबल होगी।
किन पॉलिसियों पर मिलेगी टैक्स छूट
नए सीबीडीटी दिशानिर्देश 1 अप्रैल, 2023 को या उसके बाद बेची गई जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए लागू होंगे। इसलिए, 31 मार्च, 2023 तक जारी की गई जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए, मैच्योरिटी इनकम टैक्स-फ्री रहेगी, चाहे पॉलिसी अवधि के दौरान भुगतान की गई प्रीमियम की राशि कितनी भी हो।
