अहमदाबाद में पैदल यात्रियों की सुविधा और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से गुजरात का पहला ‘पेलिकन सिग्नल’ स्थापित किया गया है। इस नई तकनीक के जरिए अब पैदल यात्री केवल एक बटन दबाकर वाहनों के लिए सिग्नल लाल कर सकेंगे और सुरक्षित रूप से सड़क पार कर सकेंगे। यह व्यवस्था पारंपरिक चौराहों से अलग है। अब सड़क के बीच ऐसे स्थानों पर भी सिग्नल लगाए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग सड़क पार करते हैं। इसके माध्यम से पैदल यात्रियों को सड़क पार करने के लिए ट्रैफिक के रुकने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
कैसे काम करेगा ये सिस्टम?
पेलिकन सिग्नल प्रणाली में सड़क किनारे एक विशेष कंट्रोल बॉक्स लगाया गया है। जब कोई व्यक्ति सड़क पार करना चाहता है, तो उसे इस बॉक्स में लगे बटन को दबाना होगा। बटन दबाने के लगभग पांच सेकंड बाद वाहनों के लिए सिग्नल लाल हो जाएगा और पैदल यात्रियों के लिए ग्रीन वॉकिंग सिग्नल चालू हो जाएगा।
इस दौरान वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक जाएगी और पैदल यात्रियों को सड़क पार करने के लिए कुल 25 सेकंड का समय मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह समय इस तरह निर्धारित किया गया है कि लोग आराम से और सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। सिग्नल अवधि समाप्त होने से लगभग पांच सेकंड पहले एक विशेष बीप ध्वनि सुनाई देगी। यह ध्वनि पैदल यात्रियों को संकेत देगी कि सड़क पार करने के लिए उपलब्ध समय समाप्त होने वाला है और जल्द ही वाहनों की आवाजाही फिर शुरू होगी।
जागरूकता अभियान से होगा काम
हालांकि यह तकनीक हाल ही में शुरू की गई है, इसलिए अभी लोगों में इसकी जानकारी सीमित है। कई वाहन चालक और पैदल यात्री अभी तक चौराहे के अलावा अन्य स्थानों पर लगे ऐसे सिग्नलों के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। इसे देखते हुए अहमदाबाद नगर निगम (AMC) और ट्रैफिक विभाग लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चला रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर शुरुआती चरण में इन स्थानों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जा सकती है, ताकि लोग नई व्यवस्था को आसानी से समझ सकें और उसका पालन कर सकें। अहमदाबाद गुजरात का पहला शहर बन गया है जहां इस प्रकार की पेलिकन सिग्नल तकनीक लागू की गई है। यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहता है तो शहर के अन्य व्यस्त क्षेत्रों, जिनमें सिंधुभवन रोड जैसे स्थान शामिल हैं, वहां भी इसे स्थापित किया जाएगा। भविष्य में इसकी सफलता के आधार पर राज्य के अन्य शहरों में भी इस प्रणाली को लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
