Pushkar Mela 2026: राजस्थान का मशहूर पुष्कर मेला जल्द ही लगने जा रहा है। यहां सजे हुए ऊंटों और पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ लोक संस्कृति के रंग भी देखने को मिलते हैं। वहीं, पुष्कर सरोवर और कार्तिक स्नान इस आयोजन को आस्था से जोड़ते हैं। जानें मेले की तारीख और वह खासियत, जिसके लिए देश-विदेश से लोग यहां पहुंचते हैं।
राजस्थान घूमने की बात हो तो जयपुर के महल, उदयपुर की झीलें और जैसलमेर के रेतीले रास्ते अक्सर याद आते हैं। लेकिन नवंबर में एक छोटा-सा शहर भी यात्रियों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। यह है अजमेर के पास बसा पुष्कर। मेले के दिनों में यहां आने की वजह हर किसी की अलग होती है। कोई पशुओं का कारोबार करने आता है। कोई सरोवर पर पूजा करने। कुछ लोग कैमरा लेकर पहुंचते हैं, तो कुछ राजस्थान की लोक संस्कृति को करीब से देखने। यही अलग-अलग दुनिया एक जगह मिलकर पुष्कर मेले को खास बनाती हैं।
पुष्कर मेला 2026 कब से कब तक लगेगा
राजस्थान पर्यटन विभाग के प्रकाशित कैलेंडर के अनुसार, पुष्कर मेला 17 नवंबर से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 तक चलेगा। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल Incredible India पर भी इन तारीखों की जानकारी दी गई है। हालांकि, किसी खास प्रतियोगिता या सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के लिए उसका दिन और समय अलग से जांचना जरूरी होगा।
पुष्कर मेला कहां लगता है
यह मेला राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर में लगता है। शहर की पहचान पुष्कर सरोवर, उसके घाटों और ब्रह्मा मंदिर से जुड़ी है। इसलिए यहां जाने वाले लोग घूमने के साथ मंदिर दर्शन और घाटों पर कुछ समय बिताने का प्लान भी रखते हैं।
अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो लोग यात्रा को सिर्फ मेला मैदान तक सीमित न रखें। ऐसा प्लान बनाएं कि शहर देखने के लिए भी वक्त बचे। लगातार एक जगह से दूसरी जगह भागने के बजाय सुबह या शाम का कुछ समय पैदल घूमने के लिए रखना बेहतर रहेगा।
पुष्कर मेले की इतनी चर्चा क्यों होती है
पुष्कर मेले की सबसे बड़ी पहचान उसका ऊंट और पशु मेला है। इसे दुनिया के बड़े ऊंट मेलों में गिना जाता है। यहां पशुओं की खरीद-बिक्री होती है, लेकिन पर्यटकों के लिए इस कारोबार को करीब से देखना भी अलग अनुभव है। पशुपालकों की बातचीत, जानवरों की देखभाल और खरीदारी से पहले होने वाली परख ग्रामीण जीवन की वह झलक दिखाती है, जो आम शहर की यात्रा में कम मिलती है।
रंगीन कपड़ों, घंटियों और सजावट से सजे ऊंट इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं। इसके साथ लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक मनोरंजन इसकी रौनक बढ़ाते हैं। पुष्कर मेले की पहचान से मूंछों की प्रतियोगिता, मटका फोड़ और कठपुतली जैसे आकर्षण भी जुड़े हैं।
कार्तिक पूर्णिमा से पुष्कर मेले का संबंध
पुष्कर मेले का धार्मिक पक्ष कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ा है। इस अवसर पर श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान और पूजा के लिए आते हैं। इसलिए मेले में घूमने आए पर्यटक और धार्मिक यात्रा पर पहुंचे लोग एक ही शहर में अलग-अलग अनुभव तलाशते दिखाई देते हैं। यही मेल इस आयोजन को सामान्य पर्यटन उत्सव से अलग पहचान देता है।
