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पितृपक्ष और नवरात्रि में घूम आएं नैमिषारण्य, एक ट्रिप में हो जाएगा तीर्थ दर्शन और पितरों का तर्पण

Naimisharanya Travel Guide: पितृपक्ष से लेकर नवरात्रि तक अगर आप कहीं घूमने जाना चाहते हैं तो उत्तरप्रदेश का नैमिषारण्य आपके लिए बेस्ट प्लेस साबित हो सकता है।

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नैमिषारण्य में कहां घूमने जा सकते हैं (Image AI Generated and Newsroom Verified)

Naimisharanya Travel Guide: पितृपक्ष से लेकर नवरात्रि तक अगर आप किसी ऐसी जगह जाने का प्लान बना रहे हैं जहां धार्मिक यात्रा के साथ प्रकृति और पुराने तीर्थ स्थलों को भी करीब से देखा जा सके, तो नैमिषारण्य एक अच्छा विकल्प है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य को नीमसार के नाम से भी जाना जाता है। गोमती नदी से जुड़ा यह इलाका अपने प्राचीन मंदिरों, कुंडों और पौराणिक स्थलों के लिए जाना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान यहां लोग पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी और सूत गद्दी जैसे प्रमुख स्थानों के दर्शन किए जा सकते हैं। कम समय में कई जगह घूमने की वजह से यह जगह धार्मिक वीकेंड ट्रिप के लिए भी पसंद की जा सकती है।

88 हजार ऋषियों की तपस्थली से जुड़ा है नैमिषारण्य

नैमिषारण्य का नाम सुनते ही सबसे पहले इसकी पौराणिक पहचान सामने आती है। इसे 88 हजार ऋषियों और मुनियों की तपस्थली कहा जाता है। पुराणों और धार्मिक कथाओं में भी नैमिषारण्य का खास स्थान मिलता है। यही वजह है कि यहां मंदिरों के साथ पुराने आश्रम, गद्दियां और कुंड भी देखने को मिलते हैं।

यात्रा के दौरान यहां का धार्मिक माहौल सबसे अलग अनुभव देता है। सुबह और शाम मंदिरों में होने वाली पूजा, घाटों के आसपास की गतिविधियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही नैमिषारण्य को बाकी सामान्य ट्रैवल डेस्टिनेशन से अलग बनाती है।

पितृपक्ष में चक्रतीर्थ जाएं

नैमिषारण्य पहुंचकर सबसे पहले चक्रतीर्थ के दर्शन किए जा सकते हैं। यह यहां का प्रमुख तीर्थ स्थल है और गोलाकार जलकुंड इसकी सबसे खास पहचान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से इसका संबंध है। पितृपक्ष में चक्रतीर्थ पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां स्नान, तर्पण और पितरों के लिए धार्मिक कर्म किए जाते हैं। अगर आप भी पितृपक्ष के दौरान नैमिषारण्य जा रहे हैं तो अपनी यात्रा की शुरुआत यहीं से कर सकते हैं।

मां ललिता देवी मंदिर जरूर जाएं

चक्रतीर्थ के बाद मां ललिता देवी मंदिर का रुख किया जा सकता है। नैमिषारण्य का यह सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मंदिर में मां ललिता देवी की पूजा की जाती है और नवरात्र, पितृपक्ष समेत अलग-अलग धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

मंदिर के आसपास का माहौल भी धार्मिक यात्रा को खास बनाता है। सुबह दर्शन करने के बाद आसपास के दूसरे प्रमुख स्थलों की ओर आसानी से जाया जा सकता है।

व्यास गद्दी के भी करें दर्शन

नैमिषारण्य की यात्रा सिर्फ मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं है। यहां व्यास गद्दी भी एक प्रमुख स्थान है। इसे महर्षि वेदव्यास से जुड़ा स्थल माना जाता है। धार्मिक कथाओं में नैमिषारण्य को वेद, पुराण और ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपराओं की स्थली माना गया है। व्यास गद्दी पहुंचने पर यहां का शांत वातावरण और पुराना धार्मिक माहौल यात्रियों को कुछ समय ठहरने और जगह को करीब से देखने का मौका देता है।

हनुमान गढ़ी में 12 फीट ऊंची प्रतिमा

नैमिषारण्य की ट्रिप में हनुमान गढ़ी को भी शामिल किया जा सकता है। यहां भगवान हनुमान की करीब 12 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित है। मंदिर को बड़े हनुमान और दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। चक्रतीर्थ के आसपास होने की वजह से इसे उसी रूट में कवर किया जा सकता है। परिवार के साथ आने वाले लोग भी कम समय में यहां दर्शन कर सकते हैं।

सूत गद्दी में जुड़ी हैं पुराणों की कथाएं

नैमिषारण्य में सूत गद्दी भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। धार्मिक कथाओं के अनुसार यहां ऋषि सूत ने शौनक समेत दूसरे ऋषियों को पुराणों की कथाएं सुनाईं। इस जगह पर पहुंचने के बाद नैमिषारण्य के पौराणिक इतिहास से जुड़ी कई कहानियों को जानने का मौका मिलता है। अगर आप सिर्फ मंदिरों की बजाय नैमिषारण्य का पूरा धार्मिक सर्किट देखना चाहते हैं तो सूत गद्दी को अपनी लिस्ट में जरूर रखें।

दधीचि कुंड को भी कर सकते हैं एक्सप्लोर

नैमिषारण्य के आसपास घूमने वालों के लिए दधीचि कुंड भी एक प्रमुख जगह है। यह मिश्रिख क्षेत्र में स्थित है। महर्षि दधीचि से जुड़े इस स्थान पर मंदिर और कुंड देखने को मिलता है। समय ज्यादा हो तो इसे नैमिषारण्य की एक दिन की ट्रिप में शामिल किया जा सकता है। इससे मुख्य तीर्थ क्षेत्र के साथ आसपास के धार्मिक स्थलों को भी देखा जा सकेगा।

पितृपक्ष और नवरात्रि में नैमिषारण्य क्यों जाएं

पितृपक्ष और नवरात्रि के दौरान नैमिषारण्य की यात्रा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की स्मृति में तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए यहां पहुंचते हैं। इसके साथ ही ललिता देवी मंदिर माता के 52 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक कर्म के बाद तीर्थ दर्शन की वजह से इस यात्रा को एक साथ दो उद्देश्य पूरे करने वाली ट्रिप बनाया जा सकता है। जो लोग पितृपक्ष और नवरात्रि में किसी तीर्थ पर कुछ समय बिताना चाहते हैं, उनके लिए नैमिषारण्य एक ऐसा विकल्प है जहां धार्मिक अनुष्ठान के साथ कई ऐतिहासिक और पौराणिक जगहें भी देखी जा सकती हैं।

कुछ घंटों में घूम सकते हैं प्रमुख स्थल

नैमिषारण्य की सबसे खास बात यह है कि इसके प्रमुख मंदिर और तीर्थ स्थल एक-दूसरे से ज्यादा दूर नहीं हैं। चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी और सूत गद्दी को एक ही ट्रिप में कवर किया जा सकता है।

सुबह जल्दी पहुंचने पर पहले चक्रतीर्थ में स्नान और तर्पण किया जा सकता है। इसके बाद ललिता देवी मंदिर और हनुमान गढ़ी के दर्शन करके व्यास गद्दी और सूत गद्दी जाया जा सकता है। समय बचने पर आसपास के दूसरे धार्मिक स्थलों को भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।

लखनऊ और आसपास के शहरों से पहुंचना आसान

नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग के जरिए जुड़ा है। लखनऊ से यहां सड़क के रास्ते पहुंचा जा सकता है। सीतापुर और आसपास के शहरों से भी बस और निजी वाहन आसानी से मिल जाते हैं। ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्री नैमिषारण्य और आसपास के रेलवे स्टेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए लखनऊ हवाई अड्डा प्रमुख विकल्प रहेगा, जहां से आगे सड़क मार्ग से नैमिषारण्य पहुंचा जा सकता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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