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Kailash Mansarovar Yatra: यम द्वार क्यों है इतना खास? यहां दिखता है आस्था का सबसे भावुक रूप

Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक पड़ाव यम द्वार है। यम द्वार से उठाया गया पहला कदम श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर की आध्यात्मिक याद बन जाता है।

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यम द्वार क्यों है इतना खास (फोटो: Instagram)

Kailash Mansarovar Yatra: हर शिव भक्त अपने जीवन में एक बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जरूर जाना चाहता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा आस्था, विश्वास और आत्मिक अनुभव का ऐसा सफर है जो श्रद्धालुओं को भीतर तक छू जाती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक पड़ाव यम द्वार (Yam Dwar) है जिसके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं।

यम द्वार क्यों है इतना खास?

यम द्वार तिब्बत में कैलाश पर्वत की परिक्रमा का शुरुआती बिंदु है और यहीं से भगवान शिव के धाम की ओर जाने वाली 53 किलोमीटर लंबी कैलाश परिक्रमा शुरू होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस द्वार को पार करते ही व्यक्ति मृत्यु लोक से निकलकर भगवान शिव की आध्यात्मिक दुनिया में प्रवेश करता है। यही वजह है कि यहां पहुंचने के बाद श्रद्धालु बेहद श्रद्धा और विनम्रता के साथ भगवान शिव का स्मरण करते हैं और सफल यात्रा की प्रार्थना करते हैं।

आस्था का सबसे भावुक रूप

आस्था का सबसे भावुक रूप आपको यम द्वार पर देखने को मिलता है। कई श्रद्धालु अपने उन परिवारजनों की तस्वीरें यहां लेकर आते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे उन तस्वीरों को यम द्वार के पास श्रद्धा के साथ रखते हैं और भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि उनके प्रियजन भी इस पवित्र यात्रा का पुण्य प्राप्त करें। ऐसे में ये यात्रा सिर्फ जीवित लोगों की नहीं, बल्कि स्मृतियों और रिश्तों की भी यात्रा बन जाती है।

53 किलोमीटर की कठिन लेकिन दिव्य परिक्रमा

ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, बदलता मौसम और कठिन रास्ते इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। हर कदम पर यात्रियों की परीक्षा होती है। इसके बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु सिर्फ भगवान शिव के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव के लिए सफर पर निकलते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए आगे बढ़ते हैं, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति की अद्भुत अनुभूति होती है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी जानकारी

समुद्र तल से कैलाश मानसरोवर की ऊंचाई तकरीबन 22 हजार फीट है। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर 65 किलोमीटर दूर है। सिक्किम के नाथुला से इसकी दूरी 802 किलोमीटर है वहीं भारतीयों के लिए कैलाश मानसरोवर जाने का तीसरा रास्ता नेपाल की राजधानी काठमांडू से है जिसकी दूरी तकरीबन 500 किलोमीटर है। यात्रा पर जाने के लिए न्यूनतम उम्र 18 वहीं अधिकतम उम्र 70 साल हो सकती है।

prabhat sharma
प्रभात शर्मा author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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