Maharashtra News: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने नक्सल विरोधी अभियानों के लिए खरीदे गए 82.78 करोड़ रुपये के हेलीकॉप्टर के रखरखाव के लिए एजेंसी नियुक्त करने में हुई देरी को लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की है। कैग ने कहा कि इसके कारण हेलीकॉप्टर 17 महीने तक जमीन पर खड़ा रहा और सरकार पर 2.07 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा, जिससे बचा जा सकता था।
रखरखाव एजेंसी तय करने में 10 महीने की देरी
राज्य विधानसभा में 10 जुलाई को पेश वर्ष 2024 की अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में कैग ने कहा कि हेलीकॉप्टर की आपूर्ति किए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय को रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) एजेंसी नियुक्त करने में लगभग 10 महीने लग गए। रिपोर्ट में कहा गया है, ’’एमआरओ एजेंसी को अंतिम रूप देने में लगभग 10 महीने की देरी के कारण हेलीकॉप्टर का अनिवार्य दैनिक निरीक्षण और जमीन पर इंजन चलाकर उसकी कार्यक्षमता की जांच नहीं हो सकी, जो उसकी उड़ान-योग्यता बनाए रखने के लिए जरूरी था।’’
नक्सल ऑपरेशन के लिए खरीदा गया था हेलीकॉप्टर
महाराष्ट्र सरकार ने मई 2018 में गढ़चिरौली और आसपास के क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों को सुगम बनाने के लिए हेलीकॉप्टर खरीदने को मंजूरी दी थी। महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय ने जुलाई 2019 में जर्मनी की कंपनी ’एयरबस हेलीकॉप्टर्स’ से एच-145 (वीटी-जीओवी) हेलीकॉप्टर 82.78 करोड़ रुपये में खरीदा था। हेलीकॉप्टर को दो दिसंबर 2020 को उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी किया गया और अंततः 19 फरवरी 2021 को इसे सेवा में शामिल किया गया। यानी राज्य सरकार को सौंपे जाने के एक साल पांच महीने बाद यह परिचालन में आ सका।
कमजोर योजना और अनुबंध प्रबंधन पर सवाल
कैग ने कहा, ’’यह चूक विमानन निदेशालय में अपर्याप्त योजना और कमजोर अनुबंध प्रबंधन को दर्शाती है, जिसके कारण सरकार को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ा।’’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2024 में ऑडिट द्वारा मामला उठाए जाने के बाद बार-बार पत्र भेजने के बावजूद राज्य के विमानन निदेशालय ने कोई टिप्पणी नहीं की। सितंबर 2025 में यह मामला राज्य सरकार को भी भेजा गया, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने तक उसका जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
(इनपुट - भाषा)
