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कुश्ती की चोट ने बदली किस्मत, अखाड़े से पहुंचीं शूटिंग रेंज: भारत को गोल्ड मेडल जिताने में बड़ी भूमिका निभाने वाली सुरुचि की दिलचस्प कहानी

Who Is Suruchi Singh: भारत के निशानेबाजों ने एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। जहां 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल मिला। वहीं, उससे भी बड़ी कामयाबी सुरुचि सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने 10 मीटर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत को दूसरा गोल्ड मेडल जिताकर हासिल की। यहां आपको बताएंगे गोल्ड मेडलिस्ट सुरुचि सिंह की कहानी, जिन्होंने एक खेल में लगी चोट से हार नहीं मानी और दूसरा खेल पकड़कर उसमें देश का नाम रोशन किया।

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कौन हैं भारत को गोल्ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाने वाली सुरुचि सिंह (AI Generated Image)

KEY HIGHLIGHTS
  • कौन हैं भारतीय निशानेबाज सुरुचि सिंह
  • अखाड़े की चोट ने पहुंचा दिया शूटिंग रेंज तक
  • भारत को एशियन गेम्स 2026 में दूसरा गोल्ड दिलाने में निभाई बड़ी भूमिका

Who Is Suruchi Singh: एशियाड में भारतीय निशानेबाजों ने अपनी सटीकता और अनुशासन का लोहा मनवाते हुए देश की झोली में एक और स्वर्णिम सफलता डाली है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में सुरुचि सिंह और कमलजीत की भारतीय जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही भारतीय तिकड़ी ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर दिन की शुरुआत को ऐतिहासिक बना दिया।

हम यहां बात करेंगे भारत को इस एशियन गेम्स का दूसरा गोल्ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाने वाली सुरुचि सिंह की। एक खिलाड़ी जिसको मजबूरी में अपना खेल बदलना पड़ा और फिर किस्मत व मेहनत ने कुछ और ही कहानी लिख दी।

दक्षिण कोरिया को दी शिकस्त, एशियाई रिकॉर्ड बनाया

10 मीटर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल मुकाबले में सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा और कुल 484.6 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। दक्षिण कोरिया की टीम 478.0 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसे सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। जबकि ईरान ने 415.8 अंकों के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस जीत के साथ ही भारतीय जोड़ी ने एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी बना दिया। उन्होंने उज़्बेकिस्तान द्वारा इसी वर्ष नई दिल्ली में आयोजित एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप के दौरान बनाए गए 481.3 अंकों के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।

अखाड़े से शूटिंग रेंज तक, एक चोट जिसने बदली राह

सुरुचि सिंह की इस अंतरराष्ट्रीय सफलता के पीछे उनके और उनके परिवार का कड़ा संघर्ष छिपा है। सुरुचि की मां सुदेश ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए इस बात का खुलासा किया कि परिवार सुरुचि को एक पेशेवर पहलवान बनाना चाहता था।

उनकी मां ने कहा, "हम सुरुचि को रेसलर बनाना चाहते थे। लेकिन अभ्यास के दौरान उसकी कॉलरबोन (Collard Bone) टूट गई। उस चोट की वजह से हमें उसकी राह बदलनी पड़ी और हमने उसे शूटिंग की तरफ मोड़ा। उसने कभी हार नहीं मानी और सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत की।"

पिता का त्याग: बच्चों के सपने के लिए छोड़ी सेना की नौकरी

सुरुचि के खेल के प्रति बढ़ते जुनून को देखते हुए उनके पिता ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी भारतीय सेना की नौकरी छोड़ दी ताकि वो सुरुचि और उनके छोटे भाई को शूटिंग का पेशेवर प्रशिक्षण दिला सकें। आज दोनों भाई-बहन शूटिंग में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

घर पर जश्न की तैयारी: ढोल-नगाड़े और 'दाल-चूरमा'

बेटी की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार और गांव जश्न के माहौल में डूबा हुआ है। मां सुदेश ने बताया कि जब सुरुचि एयरपोर्ट से घर लौटेगी, तो उसका स्वागत ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ किया जाएगा।

सुरुचि का पसंदीदा व्यंजन: घर लौटने पर सुरुचि को उसका पसंदीदा व्यंजन दाल-चूरमा परोसा जाएगा।

शुद्ध देशी खान-पान: सुरुचि की मां सुदेश ने बताया कि घर में गाय पली हुई है, जिससे सुरुचि हमेशा घर का बना शुद्ध देशी घी खाती है, जो उसकी फिटनेस और मानसिक एकाग्रता का राज है। सुरुचि ने मैच के बाद अपनी मां से फोन पर बात की और इस ऐतिहासिक जीत की खुशी साझा की।

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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