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विनेश फोगाट को किया था अयोग्य घोषित, कोर्ट ने WFI को लगाई फटकार

Vinesh Phogat: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि खिलाड़ियों के आपसी विवाद या प्रशासनिक फैसलों की वजह से खेल का नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विनेश फोगाट सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा ले सकें।

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विनेश फोगाट (फोटो- PTI)

Vinesh Phogat: भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि खिलाड़ियों के आपसी विवाद या प्रशासनिक फैसलों की वजह से खेल का नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विनेश फोगाट सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा ले सकें। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें विनेश फोगाट ने हाई कोर्ट में WFI के फैसले को चुनौती दी थी।

WFI ने विनेश को क्यों किया था अयोग्य घोषित

दरअसल, WFI ने 9 मई के नोटिस में उन्हें 26 जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोक दिया था। इसके अलावा एशियन गेम्स के सिलेक्शन नियमों में भी बदलाव किया गया था। WFI के अनुसार, केवल वही खिलाड़ी एशियन गेम्स ट्रायल्स के लिए योग्य होंगे जिन्होंने 2025 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, 2026 फेडरेशन कप और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीता हो। महासंघ ने यह भी कहा कि पुराने प्रदर्शन को आधार नहीं माना जाएगा। इसके साथ ही WFI ने विनेश पर एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। महासंघ का कहना था कि रिटायरमेंट के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को छह महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है, जिसे विनेश पूरा नहीं कर पाईं। हालांकि विनेश ने अपने जवाब में माना कि उनसे एक टेस्ट मिस हुआ था, लेकिन उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी उन्होंने पहले ही इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) को दे दी थी।

कोर्ट ने WFI के रवैये पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने WFI के रवैये पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा क्यों न माना जाए कि नियम सिर्फ विनेश फोगाट को ध्यान में रखकर बदले गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि विनेश पिछले साल जुलाई में मां बनी थीं और भारत में मातृत्व का सम्मान किया जाता है, इसलिए इसे किसी खिलाड़ी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि खेल और खिलाड़ियों के हित सबसे ऊपर होने चाहिए। अब इस मामले में एक्सपर्ट कमेटी की राय और अगली सुनवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।

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