स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक युवा खिलाड़ी की तरह भारत की टी20 टीम के उप-कप्तान तिलक वर्मा का सपना भी टेस्ट क्रिकेट में खेलना है और उनका मानना है कि खेल का सबसे लंबा प्रारूप उनके खून में है। तिलक ने साउथ जोन की तरफ से नॉर्थ जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 116 और नाबाद 51 रन बनाकर रेड बॉल क्रिकेट में फिर से अपनी काबिलियत साबित की। उनके इस शानदार प्रदर्शन से साउथ जोन फाइनल में जगह बनाने में सफल रहा।
तिलक ने अपनी टीम की जीत के बाद कहा, ’मुझे शुरू से ही लाल गेंद से क्रिकेट खेलना पसंद रहा है। मैंने कभी भारत के लिए सीमित ओवरों की क्रिकेट खेलने का सपना नहीं देखा था, लेकिन ईश्वर की यही इच्छा थी। मैंने भारत के लिए टी20 और वनडे में पदार्पण किया है, लेकिन रेड बॉल क्रिकेट मेरा मजबूत पक्ष रहा है।’
'10 की उम्र से कर रहा कड़ी मेहनत'
तिलक पिछले तीन सालों में भारत के लिए 53 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच और 5 वनडे मैच खेल चुके हैं, लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि इसके बावजूद वह लगातार रेड बॉल से अभ्यास करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ’मैंने कड़ी मेहनत की है। शायद जब मैं 10 साल का था तब से मैं कड़ी मेहनत कर रहा हूं और अब मैं 23 साल का हूं।
'IPL की वजह से चुना गया टीम में'
तिलक वर्मा ने कहा, मुझे आईपीएल की वजह से सफेद गेंद वाले प्रारूप में चुना गया। लेकिन उससे पहले मैंने लाल गेंद की क्रिकेट में काफी अनुभव हासिल कर लिया था। लंबी अवधि का प्रारूप मेरा मजबूत पक्ष रहा है और मुझे टेस्ट क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। यह कुछ ऐसा है जो हमेशा से मेरे खून में रहा है।’
टेस्ट टीम में जगह बनाने को बेताब
तिलक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मैचों में व्यस्त होने के कारण वह घरेलू क्रिकेट में पर्याप्त मैच नहीं खेल पा रहे हैं। उन्होंने कहा, ’अभी मैं देश के लिए टी20 और वनडे मैचों में खेल रहा हूं, लेकिन मुझे लाल गेंद से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में व्यस्त होने के कारण मेरे पास घरेलू स्तर पर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने का बहुत ज्यादा समय नहीं है। मैं पिछले तीन-चार सालों से रणजी ट्रॉफी में खेलने का प्रयास कर रहा था। तिलक वर्मा भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाना चाहते हैं।
