दिसंबर 2025 में कब रखा जाएगा दूसरा एकादशी व्रत, जानिए सफला एकादशी की तिथि और पूजा विधि
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 8, 2025, 05:07 PM IST
Saphala Ekadashi 2025: दिसंबर 2025 में एक नहीं तीन एकादशी पड़ने जा रही हैं। इसमें पहली एकादशी 1 दिसंबर को थी, जो मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोक्षदा एकादशी थी। अब इस महीने में दूसरी एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने जा रही है, जिसको सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि सफला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा।
कब है सफला एकादशी 2025
Saphala Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, दिसंबर 2025 में तीन एकादशी व्रत रखे जाने हैं। इसमें पहली एकादशी मोक्षदा एकादशी थी, जो 1 दिसंबर को थी, जबकि दूसरी एकादशी सफला एकादशी है। यह पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। 'सफला' नाम से ही स्पष्ट है कि यह व्रत सफलता प्रदान करने वाला है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति, सौभाग्य और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। यह विशेष रूप से स्टूडेंट्स, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए लाभकारी मानी जाती है।
सफला एकादशी 2025 की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर 2025 को शाम 6:49 बजे से होगी और यह तिथि 15 दिसंबर 2025 को रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार का दिन होने से इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन किया गया उपवास और पूजन भक्तों को विशेष फल प्रदान करता है। व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 दिसंबर 2025 को सुबह 7:07 बजे से 9:11 बजे के बीच करना शुभ रहेगा। पारण द्वादशी तिथि में ही करें ताकि व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो। यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो फलाहार व्रत भी रखा जा सकता है।
शुभ मुहूर्त और योग
सफला एकादशी पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:17 से 6:12 बजे तक रहेगा, जो जप-ध्यान के लिए उत्तम है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र और शोभन योग का संयोग बन रहा है, जो सभी शुभ कार्यों को सफल बनाने वाला है। इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं।
सफला एकादशी का महत्व
ब्रह्मांड पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सफला एकादशी का महत्व बताया है। इस व्रत का पुण्य हजारों अश्वमेध यज्ञ और सैकड़ों राजसूय यज्ञ के समान होता है। यह एकादशी पापों का नाश करती है, नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है और जीवन में नई शुरुआत के अवसर प्रदान करती है। इस दिन भगवान विष्णु अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेते हैं और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। करियर में उन्नति, परीक्षा में सफलता, व्यापार में लाभ और पारिवारिक सुख के लिए यह व्रत विशेष रूप से किया जाता है।
सफला एकादशी की पूजा विधि और नियम
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। प्रभु को फूल, तुलसी दल, चंदन और मौसमी फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या विष्णु गायत्री मंत्र का जाप करें।
भोग में केला, बेसन के लड्डू, पंजीरी, नारियल और पंचामृत लगाएं। दिन भर उपवास रखें। शाम को सफला एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। रात में भजन-कीर्तन या जागरण करें। अगले दिन पारण से पहले जरूरतमंदों को अन्न, फल या धन का दान जरूर करें। व्रत में चावल, नमक और अनाज का सेवन न करें। सफला एकादशी का व्रत नियम और श्रद्धा से करने से भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।