Guru Ashlesha Nakshatra Transit 2026 : ग्रहों के गुरु बृहस्पति 19 अगस्त 2026 की सुबह 3 बजकर 37 मिनट पर अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पंचांग गणना के अनुसार इस समय गुरु कर्क राशि में ही रहेंगे और अश्लेषा के पहले चरण में प्रवेश करेंगे। 3 सितंबर 2026 की शाम तक गुरु अश्लेषा के पहले चरण में रहेंगे, जिसके बाद दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे।
अश्लेषा कर्क राशि में 16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक फैला नक्षत्र है और इसका स्वामी बुध है। इसका संबंध गहरी सोच, रणनीति, रहस्य, मनोवैज्ञानिक समझ और परिस्थितियों की तह तक जाने से जोड़ा जाता है। इसकी प्रकृति तीक्ष्ण मानी जाती है।
गुरु स्वयं ज्ञान, विस्तार, धर्म, शिक्षा, सलाह, संतान, धन और भाग्य के कारक माने जाते हैं। ऐसे में गुरु का बुध के नक्षत्र में जाना सामान्य गुरु गोचर से थोड़ा अलग परिणाम दे सकता है। यहां ज्ञान के साथ तर्क और रणनीति जुड़ती है। सही भाव में यह संयोजन व्यक्ति को गहरी समझ और बेहतर निर्णय दे सकता है, लेकिन अशुभ भाव में होने पर यही ऊर्जा ओवरथिंकिंग, गलत रणनीति, आर्थिक दबाव, रिश्तों में उलझन और फैसलों में भ्रम पैदा कर सकती है।
गुरु कर्क राशि में उच्च के हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 12 राशियों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन समान रूप से शुभ रहेगा। गोचर में गुरु किस भाव में जा रहे हैं और वह राशि विशेष के लिए किन भावों के स्वामी हैं, यही परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह गोचर कुछ राशि वालों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश तुलनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
सिंह राशि
सिंह राशि से कर्क 12वां भाव है। 12वां भाव खर्च, विदेश, अस्पताल, एकांत, नींद, मानसिक दबाव और ऐसी परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करता है जहां पैसा या ऊर्जा बाहर जाती है। गुरु सिंह राशि वालों के लिए पंचम और अष्टम भाव के स्वामी हैं। पंचम भाव शिक्षा, बुद्धि, संतान और निवेश से जुड़ा है, जबकि अष्टम भाव अचानक बदलाव, गुप्त विषय, रिसर्च और अनिश्चित परिस्थितियों का भाव माना जाता है।इन दोनों भावों के स्वामी गुरु का 12वें भाव में जाना आर्थिक और मानसिक स्तर पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।
इस दौरान बिना पूरी जानकारी के निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है। ऑनलाइन कारोबार, सट्टा जैसी जोखिम वाली गतिविधियों या किसी के कहने पर पैसा लगाने से विशेष सावधानी रखनी होगी। संतान की पढ़ाई या उनसे जुड़े किसी विषय पर अतिरिक्त खर्च भी हो सकता है। अश्लेषा का बुध से संबंध होने के कारण यहां समस्या सिर्फ खर्च की नहीं होगी, बल्कि फैसले की रणनीति भी महत्वपूर्ण रहेगी। कोई व्यक्ति अच्छी योजना बनाकर भी उसके क्रियान्वयन में गलती कर सकता है। विदेश से जुड़े अवसर मिल सकते हैं, लेकिन उनके साथ खर्च भी बढ़ सकता है। नींद और आराम की अनदेखी करने पर थकान महसूस हो सकती है।
उपाय: सिंह राशि वाले गुरुवार को पीली दाल या हल्दी का दान करें और भगवान विष्णु की पूजा कर 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करें।
तुला राशि
तुला राशि से कर्क 10वां भाव है। यह कर्म, नौकरी, पद, प्रतिष्ठा और प्रोफेशनल जीवन का सबसे महत्वपूर्ण भाव माना जाता है। पहली नजर में 10वें भाव में उच्च गुरु की स्थिति अच्छी दिखाई देती है, लेकिन तुला राशि के लिए गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं।
तीसरा भाव प्रयास, साहस, कम्युनिकेशन और छोटे भाई-बहनों से जुड़ा है, जबकि छठा भाव नौकरी, प्रतियोगिता, कर्ज, बीमारी और विरोधियों का प्रतिनिधित्व करता है।
गुरु का 10वें भाव में जाना काम का विस्तार कर सकता है, लेकिन इस विस्तार के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों की अपेक्षाएं बढ़ सकती हैं। ऑफिस में किसी सहकर्मी से मतभेद या प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन सकती है।
बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय पूरी तरह आसान नहीं रहेगा। किसी डील में छोटी-सी शर्त बाद में परेशानी पैदा कर सकती है। अश्लेषा बुध का नक्षत्र होने के कारण कागजी काम, कॉन्ट्रैक्ट, ईमेल, कम्युनिकेशन और लेनदेन में छोटी गलती को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
इस गोचर का एक दूसरा पहलू भी है। प्रतियोगिता में मेहनत करने वालों को सफलता मिल सकती है, लेकिन परिणाम आसानी से नहीं आएंगे। काम का दबाव बढ़ाकर ही उपलब्धि हासिल होने के संकेत हैं।
उपाय: बुधवार को हरी मूंग का दान करें और किसी भी महत्वपूर्ण कागजी या कारोबारी निर्णय से पहले भगवान गणेश की पूजा करें।
धनु राशि
धनु राशि के लिए यह गोचर सबसे ज्यादा सावधानी मांगने वाली स्थितियों में शामिल है। कर्क राशि धनु से आठवें भाव में आती है। आठवां भाव अचानक परिवर्तन, गुप्त घटनाओं, रिसर्च, साझा धन, विरासत और अनिश्चित परिस्थितियों से जुड़ा होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गुरु स्वयं धनु राशि के स्वामी हैं। इसके साथ वह चौथे भाव के भी स्वामी हैं। ऐसे में लग्नेश का आठवें भाव में जाना जीवन की दिशा, स्वास्थ्य, घर-परिवार और मानसिक शांति से जुड़े मामलों में बदलाव का संकेत दे सकता है।
यह जरूरी नहीं कि हर बदलाव नुकसान देने वाला हो, लेकिन चीजें आपकी योजना के अनुसार चलने में समय ले सकती हैं। अचानक कोई ऐसा खर्च सामने आ सकता है जिसकी पहले से तैयारी नहीं थी। प्रॉपर्टी से जुड़े मामले में दस्तावेजों की जांच किए बिना आगे बढ़ना नुकसान दे सकता है। परिवार में किसी पुराने विषय को लेकर बातचीत फिर शुरू हो सकती है। मानसिक रूप से व्यक्ति छोटी बातों को ज्यादा गहराई से सोच सकता है। अश्लेषा का प्रभाव इस प्रवृत्ति को और बढ़ा सकता है। रिसर्च और गुप्त विषयों में काम करने वालों को इस गोचर से फायदा भी मिल सकता है, लेकिन सामान्य जीवन में धन और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी रहेगी।
उपाय: धनु राशि वाले गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें और जरूरतमंद व्यक्ति को पीली वस्तु या चने की दाल का दान करें।
मकर राशि
मकर राशि से कर्क सातवां भाव है। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी, बिजनेस पार्टनर, क्लाइंट और पब्लिक डीलिंग का होता है। मकर राशि के लिए गुरु तीसरे और 12वें भाव के स्वामी हैं। गुरु का सातवें भाव में जाना सामान्य तौर पर संबंधों और साझेदारी को सक्रिय करता है, लेकिन 12वें भाव का स्वामित्व इसमें खर्च और दूरी का तत्व जोड़ देता है। बिजनेस पार्टनर के साथ पैसों या जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद हो सकते हैं। किसी नए पार्टनर पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचना होगा। बड़े कारोबारी समझौते में मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित शर्तों को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
विवाहित लोगों के लिए भी यह समय संवेदनशील हो सकता है। जीवनसाथी के काम या खर्च से जुड़ा कोई विषय तनाव का कारण बन सकता है। लंबे समय से अलग रह रहे लोगों के बीच दूरी कम करने का मौका भी आएगा, लेकिन बातचीत में कठोरता रिश्ते को और उलझा सकती है। तीसरे भाव के स्वामी होने के कारण गुरु कम्युनिकेशन को भी सक्रिय करेंगे। अश्लेषा बुध का नक्षत्र है, इसलिए एक गलत शब्द या अधूरी जानकारी विवाद को बढ़ा सकती है।
उपाय: गुरुवार को किसी योग्य गुरु, शिक्षक या बुजुर्ग का सम्मान करें और पीले फल का दान करें। महत्वपूर्ण रिश्तों में प्रतिक्रिया देने से पहले बात को पूरी तरह समझने की आदत रखें।
कुंभ राशि
कुंभ राशि से कर्क राशि छठे भाव में आती है। यह नौकरी, प्रतियोगिता, कर्ज, रोग, विवाद और विरोधियों का भाव माना जाता है। कुंभ राशि के लिए गुरु दूसरे और 11वें भाव के स्वामी हैं। दोनों ही धन से जुड़े महत्वपूर्ण भाव हैं। दूसरे भाव का संबंध बचत और परिवार से है, जबकि 11वां भाव आय और लाभ का प्रतिनिधित्व करता है। इन भावों के स्वामी का छठे भाव में जाना आर्थिक मामलों को सीधे संघर्ष और जिम्मेदारियों से जोड़ सकता है।
नौकरी करने वालों के लिए काम का दबाव बढ़ सकता है। ऑफिस में प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। किसी सहकर्मी के साथ मतभेद होने की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना होगा। आर्थिक स्तर पर आय बनी रह सकती है, लेकिन साथ में कर्ज, मेडिकल खर्च, कानूनी मामला या किसी पुरानी देनदारी से जुड़ा भुगतान सामने आ सकता है। जो लोग लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। अश्लेषा के बुध प्रभाव के कारण वित्तीय गणना में छोटी गलती भी समस्या पैदा कर सकती है। टैक्स, बैंकिंग, बीमा, लोन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों को दोबारा जांचना इस दौरान बेहतर रहेगा। प्रतियोगी परीक्षा और नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए यह समय पूरी तरह खराब नहीं है। छठे भाव की सक्रियता संघर्ष के बाद जीत भी दे सकती है। परिणाम पाने के लिए अनुशासन और लगातार मेहनत की जरूरत होगी।
उपाय: कुंभ राशि वाले बुधवार को हरी मूंग का दान करें और गुरुवार को गुरु मंत्र का जाप करें। कर्ज या वित्तीय दस्तावेजों में किसी भी शर्त को पढ़े बिना हस्ताक्षर न करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
