अध्यात्म

मोहिनी एकादशी की व्रत कथा यहां पढ़ें, जानें वैशाख शुक्ल की एकादशी का महात्म्य

वैशाख शुक्ल एकादशी को रखा जाने वाला मोहिनी एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इसकी कथा सुनने या पढ़ने से पाप दूर होते हैं, पुण्य मिलता है और मोक्ष का मार्ग खुलता है।

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मोहिनी एकादशी व्रत कथा

Mohini Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, और वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से मोह-माया और बुरे कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं मोहिनी एकादशी की व्रत कथा।

धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा

हे भगवन्! मैं आपको प्रणाम करता हूं। आपने वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, यानी वरुथिनी एकादशी के बारे में विस्तार से बताया। अब कृपा करके बताइए कि वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? उसकी कथा क्या है और इस व्रत की विधि क्या मानी गई है? कृपया यह सब विस्तार से समझाइए।

भगवान श्रीकृष्ण बोले

हे धर्मराज! वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। मैं तुम्हें इसकी एक पवित्र कथा सुनाता हूँ, जो महर्षि वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम को सुनाई थी। तुम इसे ध्यानपूर्वक सुनो।

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

एक समय भगवान श्रीराम ने अपने गुरु वशिष्ठ से कहा, 'हे गुरुदेव! ऐसा कौन-सा व्रत है, जिससे मनुष्य के सभी पाप और दुख समाप्त हो जाएं? मैंने सीता जी के वियोग में बहुत कष्ट सहा है, अब कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मुक्ति मिल सके।'

महर्षि वशिष्ठ बोले, 'हे राम! आपने बहुत उत्तम प्रश्न किया है। आपकी बुद्धि अत्यंत निर्मल है। वैसे तो आपके नाम का स्मरण मात्र ही मनुष्य को पवित्र कर देता है, फिर भी लोककल्याण के लिए आपका यह प्रश्न उचित है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इसका व्रत करने से मनुष्य सभी पापों और दुखों से मुक्त हो जाता है और मोह-माया के बंधन से भी छुटकारा पाता है। अब इसकी कथा सुनो।'

सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नाम की एक नगरी थी। वहाँ द्युतिमान नाम का चंद्रवंशी राजा राज्य करता था। उसी नगर में धनपाल नाम का एक समृद्ध और धर्मपरायण वैश्य रहता था, जो भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था। उसने नगर में धर्मशालाएं, कुएं, सरोवर, प्याऊ और यात्रियों के लिए कई सुविधाएं बनवाई थीं। साथ ही सड़कों के किनारे पेड़ भी लगवाए थे।

धनपाल के पाँच पुत्र थे-सुमना, सद्बुद्धि, मेधावी, सुकृति और धृष्टबुद्धि। इनमें से धृष्टबुद्धि सबसे छोटा और अत्यंत दुष्ट प्रवृत्ति का था। वह न तो धर्म मानता था और न ही बड़ों का आदर करता था। वह बुरी संगति में पड़ गया था-जुआ खेलता, पर-स्त्री संग रहता और मद्य-मांस का सेवन करता था। इसी तरह वह अपने पिता की संपत्ति भी नष्ट करता रहा।

उसकी इन हरकतों से परेशान होकर धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया। घर से निकलने के बाद उसने अपने गहने और कपड़े बेचकर गुजारा किया। जब सब खत्म हो गया तो उसके साथी भी उसे छोड़कर चले गए। भूख और परेशानी से मजबूर होकर वह चोरी करने लगा।

एक बार चोरी करते हुए पकड़ा गया, लेकिन वैश्य का पुत्र होने के कारण उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। दूसरी बार पकड़े जाने पर राजा ने उसे जेल में डाल दिया। वहां उसे बहुत कष्ट सहने पड़े। बाद में उसे राज्य से बाहर निकाल दिया गया।

वह जंगल में जाकर रहने लगा और पशु-पक्षियों का शिकार करके अपना जीवन बिताने लगा। धीरे-धीरे वह एक बहेलिया बन गया।

एक दिन भूख-प्यास से परेशान होकर वह जंगल में भटकते हुए कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम तक पहुंच गया। उस समय वैशाख मास चल रहा था और ऋषि गंगा स्नान करके लौट रहे थे। उनके भीगे वस्त्रों के जल के छींटे उस पर पड़े, जिससे उसके भीतर थोड़ी सद्बुद्धि जागी।

वह ऋषि के पास गया और हाथ जोड़कर बोला, 'हे मुनिवर! मैंने जीवन में बहुत पाप किए हैं। कृपया मुझे कोई ऐसा सरल उपाय बताइए, जिससे मैं इन पापों से मुक्त हो सकूं, और जिसमें धन की आवश्यकता भी न हो।'

उसकी विनम्रता देखकर कौण्डिन्य मुनि प्रसन्न हुए और बोले, 'तुम वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करो। इससे तुम्हारे कई जन्मों के बड़े-बड़े पाप भी नष्ट हो जाएंगे।'

मुनि की बात सुनकर वह बहुत खुश हुआ और बताई गई विधि के अनुसार व्रत किया।

हे राम! इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और अंत में वह गरुड़ पर बैठकर विष्णु लोक को गया। यह व्रत मोह-माया को समाप्त कर देता है। इस संसार में इससे श्रेष्ठ कोई व्रत नहीं है। इसके माहात्म्य को पढ़ने या सुनने से हजार गौदान के बराबर फल मिलता है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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