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Delhi-NCR Holika Dahan Timing Today 2026: नोएडा, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद, गुडगांव, दिल्ली एनसीआर में होली में आग कब लगेगी, होलिका दहन का सही समय देखें यहां

Holika Dhana 2026 Timing Today (होली में आग कब लगेगी), Holi Mein Aag Lagne ka Time (होलिका दहन का सही समय क्या है): अगर आप दिल्ली या दिल्ली के आसपास रहते हैं तो यहां से जान सकते हैं कि आज शाम में कितने बजे आपके शहर में होलिका दहन होने वाला है।

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दिल्ली- एनसीआर में होलिका दहन का सही समय क्या है (pc: canva)

Holika Dhana 2026 Timing Today (होली में आग कब लगेगी): हिरण्यकशिपु चाहता था कि सभी लोग उसे भगवान मानें। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने की कई कोशिशें कीं। अंत में उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे आग में न जलने का वरदान था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन वरदान का दुरुपयोग करने के कारण होलिका जल गई और भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। इसी घटना की याद में होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। अब आज होलिका दहन का ही शुभ दिन है। आज के दिन दिल्ली और दिल्ली के आसपास के शहरों में होलिका दहन कितने बजे होगा, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां दिल्ली-एनसीआर का होलिका दहन मुहूर्त बताया गया है।

दिल्ली-एनसीआर के शहरों में होलिका दहन कब होगा 2026 (Holika Dahan 2026 Time In Delhi-NCR)-

शहर का नामहोलिका दहन का मुहूर्त
दिल्ली में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
नोएडा में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
गाजियाबाद में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
गुरुग्राम में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
फरीदाबाद में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
मेरठ में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
पानीपत में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
रेवाड़ी में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
भिवानी में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
दादरी में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
झज्जर में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
करनाल में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
अलवर में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM
भरपुर में होलिका दहन कब होगा6:20 PM से 8:50 PM

होलिका दहन का महत्व-

होलिका दहन का महत्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए, और अंत में अपनी बहन होलिका के साथ अग्नि में बैठाकर उसे जलाने की योजना बनाई। लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई। इसी घटना की स्मृति में फाल्गुन पूर्णिमा की रात अग्नि प्रज्वलित की जाती है। ये अग्नि अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता के दहन और आस्था, सत्य और धर्म की विजय का संदेश देती है। होलिका दहन का पर्व समाज में एकता, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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